Parenting Tips: बच्चों से माफी मांगने से नहीं घटता अधिकार, मजबूत होता है रिश्ता

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अक्सर तनाव में माता-पिता बच्चों पर चिल्ला देते हैं, जिससे उनके रिश्ते और व्यवहार पर बुरा असर पड़ता है। गलती होने पर बच्चे से माफी मांगने से माता-पिता का अधिकार घटता नहीं, बल्कि बच्चों में भरोसा और सम्मान बढ़ता है। अपनी गलती स्वीकार कर शांत व्यवहार अपनाना सकारात्मक पेरेंटिंग का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करता है।

आज के समय सबसे जरुरी हो गया बेहतर पेरेंटिंग अनुभव देना। गौरतलब है कि हर माता-पिता की यह चाहत होती है कि उनका बच्चों के साथ मजबूत,दोस्तना और भरोसमंद रिश्ता जरुर कायम रहे, लेकिन एक समय ऐसा भी होता है पेरेंट्स आपा खोकर अपने बच्चे को चिल्लाने या डांटने लगते हैं।

अक्सर काम से थके हुए व तनाव के चलते माता-पिता गुस्से में अपने बच्चों को पीट देते हैं, जो कि बिल्कुल सही नहीं है। जिससे बच्चे जिद्दी हो जाते है। कई बार माता-पिता के मन में यह डर बना रहता है कि यदि अगर वे बच्चे से माफी मांगेंगे, तो उनका दबदबा कम हो जाएगा या बच्चा उन्हें कमजोर समझेगा।

लेकिन सच्चाई कुछ और है। खासतौर पर बच्चों से दिल से मांगी गई माफी आपके अधिकार को घटाती नहीं, बल्कि आपके प्रति उनके सम्मान, भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव को और भी गहरा बना देती है।

आखिर क्यों जरुरी है रिश्तों में मरम्मत?

कई बार माता-पिता का सख्त अनुशासन सिर्फ नियंत्रण और हुकुम चलाने पर मौजूद रहता है, लेकिन सकारात्मक पेरेंटिंग में प्यार, संवेदनशीलता और स्पष्ट सीमाओं के साथ ही अपनी जवाबदेही भी होती है। असल में जब हम बच्चे पर कहते हैं, 'बेटा, आज मुझसे गलती हुई, मुझे तुम पर चिल्लाना नहीं चाहिए था' तो ऐसा करने से आपकी अथारिटी खो नहीं जाती है बल्कि बच्चे के सामने बेहतरीन उदाहरण पेश होता है। क्योंकि गलतियां इंसान से होती है और अपनी गलती को स्वीकारना और अपने गुस्से पर काबू पाना असली समझदारी होती है। गौरतलब है कि पेरेंटिंग में मतभेद और तनाव आना एक स्वाभाविक नेचर है। सबसे जरुरी है कि आप उस रिश्ते को मरम्मत कैसे करें।

कहें वही जो है सही

कई बार बच्चों पर ज्यादा कठोरता या चिल्लाने से उनका मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। जब माता-पिता अपनी गलतियों की जिम्मेदारी लेते हैं, तो बच्चों अपनी भावनाओं को छिपाने के बजाय खुलकर व्यक्त करना सीखते हैं।

जब बच्चे अपनी गलतियों पर झूठ बोलने के जगह जिम्मेदारी लेना सीखते है, तो वे दूसरों के प्रति अधिक संवेदनशील और दयालु बनते हैं। हां, आपको हर बात पर माफी मांगने की जरुरत नहीं है। वहीं, सही नियमों और सीमाओं के लिए कभी माफी न मांगे।

इतना ही नहीं, आप बच्चे का स्क्रीन टाइम कम करवाना चाहते हैं, तो सही समय पर सोने या पढ़ाई करने के लिए कहे, अगर बच्चा उदास होता है, तो इसक लिए मांफी मांगने की जरुरत नहीं है।

जब खो दें आपा

- सबसे पहले खुद को शांत करें। शांत होने के बाद ही बच्चे के पास जाएं।

- बिना किसी बहाने के अपनी गलती स्वीकार करें। जैसे कि- 'मैं तुम पर चिल्लाया और वह गलत था।'

- बच्चे पर पड़े असर को अलग रखें। 'हमें तुम्हारे व्यवहार पर बात करनी है, लेकिन मेरा चिल्लाना गलत था।'

- इसके बाद बताएं कि अगली बार आप क्या अलग करेंगे। 'अगली बार गुस्सा आने पर मैं पहले शांत होने के लिए 5 मिनट रुकूंगा।'

- बच्चों को आश्वस्त करें।  'आई लव यू, कहें, बच्चा नाराज है, तो बोलें मेरा प्यार तुम्हारे लिए कम नहीं होता।'

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