Snow Moon ने रिश्तों में मचाई खलबली, देर रात इमोशनल होकर क्यों लोगों ने किए Breakup?

Snow Moon Psychology
CANVA PRO
एकता । Feb 2 2026 4:05PM

स्नो मून 2026 के दौरान भावनाओं में तेजी, देर रात मैसेज और ब्रेकअप की घटनाएं बढ़ीं, जिसका कारण ज्योतिष और मनोविज्ञान में खोजा जा रहा है। हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन पूर्णिमा को लेकर बनी सांस्कृतिक मान्यताएं और नींद पर असर लोगों को अपने अनसुलझे रिश्तों का सामना करने के लिए प्रेरित करता है।

1 फरवरी की रात को, स्नो मून, यानी फरवरी के पूर्णिमा के चांद ने आसमान को रोशन कर दिया। इसके साथ ही, सोशल मीडिया, रिलेशनशिप ब्लॉग और ज्योतिष से जुड़ी चर्चाओं में जाना-पहचाना माहौल लौट आया। लोगों ने भावनाओं में तेजी महसूस की, पुरानी भावनाएं फिर से जाग उठीं, देर रात मैसेज, माफी और कुछ मामलों में तो कपल्स के बीच ब्रेकअप भी हुए।

हालांकि, इस बात का कोई पक्का साइंटिफिक सबूत नहीं है कि चांद के फेज सीधे इंसानी व्यवहार को बदलते हैं, लेकिन सांस्कृतिक मान्यताएं, भावनाओं का मनोविज्ञान और पर्सनल अनुभव, ये सभी यह समझाने में मदद करते हैं कि पूर्णिमा के दौरान लोग ज्यादा संवेदनशील क्यों महसूस कर सकते हैं। यह इस बात को ज्यादा दिखाता है कि इंसान अपनी भावनाओं को कैसे समझते और जाहिर करते हैं, न कि चांद असल में उन्हें कंट्रोल करता है।

2026 के स्नो मून के दौरान भावनाएं ज्यादा तीव्र क्यों महसूस हुईं?

संस्कृति और ज्योतिष में, पूर्णिमा को चंद्र चक्र का सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली समय माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस समय, दबी हुई भावनाएं सतह पर आ जाती हैं। यह भी माना जाता है कि 2026 के स्नो मून ने लोगों को अपने पिछले रिश्तों, अनसुलझे मुद्दों और अधूरे सवालों पर सोचने के लिए प्रेरित किया।

शांति और स्पष्टता पाने के बजाय, लोग अक्सर इस समय आंतरिक उथल-पुथल का अनुभव करते हैं। कई लोगों को उन रिश्तों की समस्याओं को सुलझाने की जरूरत महसूस हुई जिनसे वे लंबे समय से बच रहे थे। माफी मांगी गई, और पुरानी बातचीत फिर से शुरू हुई। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि स्नो मून के दौरान भावनात्मक थकान और संवेदनशीलता बढ़ सकती है। इससे ज्यादा सोचने और भावनाओं में तेजी आ सकती है, जिसका सीधा असर रिश्तों पर पड़ता है।

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स्नो मून के दौरान देर रात मैसेज क्यों बढ़ जाते हैं

1 फरवरी की पूर्णिमा के आसपास देर रात किए गए मैसेज और भावुक बातचीत की एक वजह यह भी मानी जाती है कि इस समय लोग अपनी भावनाओं को अलग तरह से समझते हैं।

नींद की कमी: कुछ रिसर्च बताती हैं कि पूर्णिमा के आसपास कुछ लोगों की नींद हल्की हो जाती है या देर से आती है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो इंसान अपनी भावनाओं पर कम कंट्रोल रख पाता है। ऐसे में बिना ज्यादा सोचे-समझे मैसेज भेज देना आसान हो जाता है।

रात में ज्यादा सोचने की आदत: ज्यादातर लोग रात को सोने से पहले अपनी पुरानी बातचीत, अधूरे रिश्ते और मन की उलझनों के बारे में सोचते हैं। यही समय होता है जब वे ऐसे मैसेज भेज देते हैं, जिनके बारे में अगली सुबह सोचते हैं।

वैज्ञानिक अध्ययनों में आम तौर पर चांद की स्थिति और इंसानी व्यवहार के बीच सीधा रिश्ता नहीं मिला है, लेकिन यह जरूर साफ है कि लोग अगर मानते हैं कि पूर्णिमा भावनाओं को बढ़ा देती है, तो वे अपने मूड को उसी नजर से देखने लगते हैं। इसे मनोविज्ञान में 'खुद सच हो जाने वाली सोच' भी कहा जाता है।

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स्नो मून और ब्रेकअप की बातें क्यों बढ़ीं

दुनिया की कई संस्कृतियों में पूर्णिमा को एक ऐसे समय के रूप में देखा जाता है जब चीजें अपने चरम पर पहुंचती हैं। इसी वजह से, जो लोग टकराव से बच रहे थे, उन्हें बात करने की मजबूरी महसूस हुई, रिश्तों में चल रही परेशानियां ज्यादा साफ दिखने लगीं, लंबे समय से दबा असंतोष ब्रेकअप या गंभीर बातचीत में बदल गया।

विशेषज्ञ मानते हैं कि स्नो मून एक तरह से भावनाओं पर रोशनी डालता है। इस दौरान लोग अपनी जरूरतों और सच्चाई से भागने के बजाय उसका सामना करते हैं। पिछले सालों के अनुभव भी बताते हैं कि इस समय लोग या तो रिश्ते सुधारने की कोशिश करते हैं या फिर उन्हें खत्म करने का फैसला लेते हैं।

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