Asian Games: 5 टेनिस खिलाड़ी चयन मानदंड पूरे नहीं कर पाए, SAI सूत्र ने दी जानकारी

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अखिल भारतीय टेनिस संघ द्वारा भारतीय ओलंपिक संघ को भेजी गई संक्षिप्त सूची में बाहर किए गए पांचों खिलाड़ियों के नाम शामिल नहीं थे क्योंकि वे महाद्वीपीय रैंकिंग के आवश्यक मानकों को पूरा नहीं करते थे। खेल मंत्रालय के नियमों के तहत एकल स्पर्धा में एशिया में शीर्ष छह और युगल में शीर्ष आठ में रहना अनिवार्य रखा गया था। रोहन बोपन्ना द्वारा चयन प्रक्रिया पर उठाए गए सवालों के बाद खेल प्राधिकरण से जुड़े सूत्रों ने यह स्थिति स्पष्ट की है।

(इंट्रो और तीसरे पैरा में सुधार के साथ) नयी दिल्ली, 25 अगस्त भारत की एशियाई खेलों की टेनिस टीम से बाहर किए गए पांच खिलाड़ियों के नाम अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) द्वारा भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) को भेजी गई संक्षिप्त सूची में शामिल नहीं थे। भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के एक सूत्र ने मंगलवार को यह जानकारी दी और कहा कि निर्धारित अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग मानदंड पूरा नहीं करने के कारण उन्हें टीम में जगह नहीं मिली। मानस धामने (पुरुष एकल), वैष्णवी अडकर (महिला एकल), सहजा यमलापल्ली (महिला एकल), वैदेही चौधरी (महिला युगल) और प्रार्थना थोम्बारे (महिला युगल) सात सदस्यीय भारतीय टेनिस टीम में जगह नहीं बना सके क्योंकि वे महाद्वीपीय रैंकिंग में शीर्ष आठ में होने के मानदंड को पूरा नहीं करते थे।

सूत्र ने पीटीआई से कहा, ‘‘खेल मंत्रालय को आईओए द्वारा साझा की गई अंतिम सूची में उनके नाम नहीं मिले थे। असल में एआईटीए द्वारा आईओए को भेजी गई संक्षिप्त सूची में भी उनके नाम नहीं थे।’’ सूत्र के अनुसार इन खिलाड़ियों को बाहर किया जाना उचित है क्योंकि उनके हालिया प्रदर्शन से भी पदक जीतने की संभावना या प्रतियोगिता में प्रभावी भागीदारी की क्षमता नहीं झलकती। खेल मंत्रालय के चयन मानदंड के अनुसार एकल स्पर्धाओं में खिलाड़ियों का एशिया में शीर्ष छह में और युगल में शीर्ष आठ में होना जरूरी था।

इसके लिए 12 महीने की अवधि में प्रदर्शन का आकलन किया गया। खेल मंत्रालय ने यह मानदंड पिछले साल सितंबर में जारी किया था। इन खिलाड़ियों को टीम से बाहर किए जाने की दो बार के एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता रोहन बोपन्ना ने कड़ी आलोचना की थी।

उन्होंने कहा था कि ‘एक ऐसी समिति ने कागज पर उनका भाग्य तय कर दिया जो कभी उस स्थिति में खड़ी नहीं रही जहां वे खड़े हैं और खेलने से पहले ही उनका फैसला कर दिया गया।’ सहजा (विश्व रैंकिंग 344) फिलहाल महिला एकल में भारत की नंबर एक खिलाड़ी हैं जबकि वैष्णवी (विश्व रैंकिंग 388) राष्ट्रीय स्तर पर दूसरे स्थान पर हैं। प्रार्थना 2014 एशियाई खेलों की कांस्य पदक विजेता हैं जबकि वैदेही दो बार की राष्ट्रीय चैंपियन हैं और 18 वर्षीय मानस चैलेंजर स्तर के टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंच चुके हैं। खेल मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया था कि कुछ वर्गों की ओर से दबाव बनाए जाने के बावजूद चयन मानदंड में ढील नहीं दी जाएगी।

सूत्र ने कहा, ‘‘एशिया में 25वें से 40वें स्थान पर रहने वाले टेनिस खिलाड़ियों के लिए विवेकाधीन तरीके से पिछले दरवाजे से मंजूरी देना प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता को खत्म कर देगा और अन्य राष्ट्रीय खेल महासंघों (एनएसएफ) की ओर से बड़े पैमाने पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता खोल देगा।’’ प्रार्थना को युगल स्पर्धा में वैदेही के साथ जोड़ी बनानी थी लेकिन दोनों ने अब तक साथ में कोई टेनिस नहीं खेला है। सूत्र ने कहा, ’’इससे एशियाई खेलों से पहले उनकी तैयारी और प्रतिस्पर्धी जोड़ी बनाने के इरादे को लेकर उचित सवाल उठते हैं।’’ बोपन्ना ने कहा था कि इन खिलाड़ियों को खेलने का अवसर नहीं देना खेल राष्ट्र बनाने के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। उन्होंने कहा था, ‘‘आप बोर्डरूम में यह तय करके खेल राष्ट्र या खेल अर्थव्यवस्था नहीं बन सकते कि कौन प्रतियोगिता में हिस्सा ले सकता है।’’ हालांकि साइ के सूत्र ने इसका जवाब देते हुए कहा, ‘‘खेल अनुभव हासिल करने के लिए आईटीएफ और चैलेंजर सर्किट होते हैं, एशियाई खेल नहीं।’’ एशियाई खेलों के लिए अंतिम टेनिस टीम में एकल में केवल सुमित नागल को जगह मिली है, जबकि रामकुमार रामनाथन, साकेत माइनेनी, युकी भांबरी, ऋतुजा भोसले और अंकिता रैना युगल टीम का हिस्सा हैं।

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