Craig Fulton बोले, भारतीय टीम के लिए Paris Olympics का कांस्य पदक सबसे खास रहा

भारतीय पुरुष हॉकी टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टोन ने पेरिस खेलों में मिले कांस्य को अपने कार्यकाल का सबसे संतोषजनक पल बताया है। उन्होंने कहा कि खराब दौर के बावजूद टीम ने रणनीतियों पर भरोसा रखा और 52 साल बाद ऑस्ट्रेलिया को हराया। टीम अब एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी और न्यूजीलैंड दौरे के जरिए 2028 ओलंपिक के लिए नए खिलाड़ियों को जोड़ेगी।
... सौमोज्योति एस चौधरी ... लखनऊ, पांच अक्टूबर भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने एशियाई खेलों में अपने स्वर्ण पदक का शानदार ढंग से बचाव करते हुए 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधे क्वालीफाई कर लिया, लेकिन मुख्य कोच क्रेग फुल्टोन के लिए अपने मौजूदा कार्यकाल का सबसे संतोषजनक पल पेरिस ओलंपिक में जीता गया कांस्य पदक ही है। मौजूदा ओलंपिक कांस्य पदक विजेता भारत ने फाइनल में मलेशिया को 5-1 से करारी शिकस्त देकर लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों का स्वर्ण अपने नाम किया। फुल्टोन ने पीटीआई को दिए विशेष साक्षात्कार में कहा, ‘‘सबसे संतोषजनक पल शायद पेरिस ओलंपिक ही था।
जिस तरह हमने अपनी रणनीति और प्रक्रियाओं पर भरोसा बनाए रखा, वह बेहद खास था। पेरिस से पहले एफआईएच प्रो लीग में और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हमें हार का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन हमने अपनी योजनाओं से समझौता नहीं किया।’’ उन्होंने कहा कि सही समय पर टीम का प्रदर्शन शीर्ष स्तर पर पहुंचा। फुल्टोन ने कहा ‘‘हमने अच्छी योजना बनाई और टीम के सभी सहयोगी सदस्यो ने शानदार काम किया।
इसका नतीजा यह रहा कि हमने 50 साल में पहली बार ऑस्ट्रेलिया को हराया।’’ पेरिस ओलंपिक में भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 3-2 से हराकर उनके खिलाफ ओलंपिक में 52 साल से चले आ रहे जीत के सूखे को समाप्त किया था। फुल्टोन ने कहा, ‘‘इसके बाद हम 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हुए, लेकिन फिर भी शूटआउट में जीत हासिल की। क्वार्टर फाइनल में ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ मुकाबला ड्रॉ रहने के बाद शूटआउट में जीत मिली।
सेमीफाइनल में हमने जर्मनी के खिलाफ भी शानदार हॉकी खेली, लेकिन 2-3 से हार गए।’’ फुल्टोन ने माना कि वह दौर बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन वह इस बात से बेहद खुश हैं कि भारत ने एशियाई हॉकी में अपना दबदबा कायम रखा है। उन्होंने कहा, ‘‘वह दौर निश्चित रूप से बहुत खास था। लेकिन साथ ही एशिया में हमारा प्रदर्शन भी शानदार रहा है।
लोग कहते हैं कि एशियाई खेलों में लगातार दो बार पदक जीतना आसान है, लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। भारत ने भी इससे पहले ऐसा नहीं किया था। इसलिए यह आसान नहीं था।
मुझे एशिया में टीम के प्रदर्शन पर बेहद गर्व है।’’ भारत के लिए एफआईएच विश्व कप और एशियाई खेलों के बीच महज तीन सप्ताह का अंतर था। विश्व कप में टीम आठवें स्थान पर रही थी। ऐसे में इतनी कम अवधि में खिलाड़ियों को संभालकर एशियाई खेलों में फिर से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए तैयार करना फुल्टोन के लिए बड़ी चुनौती थी।
दक्षिण अफ्रीकी कोच ने कहा, ‘‘तीन सप्ताह के अंतराल में होने वाली दो बड़ी प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करना बेहद मुश्किल होता है। यही कारण है कि बड़े टूर्नामेंट अगर तीन सप्ताह के अंतराल में हों तो खिलाड़ियों को उबरने, आराम करने और फिर से तैयारी करने के लिए समय और पर्याप्त जगह की जरूरत होती है।’’ फुल्टोन ने स्पष्ट किया कि 2026 के लिए उनका सबसे बड़ा लक्ष्य शुरू से ही एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए सीधा स्थान हासिल करना था। उन्होंने कहा, ‘‘हमने ईमानदारी से यह आकलन किया था कि 2026 में हमें क्या हासिल करना है।
हमें पता था कि विश्व कप भी है और हमारी महत्वाकांक्षा वहां अच्छा प्रदर्शन करने की थी, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका। हमारा मुख्य लक्ष्य एशियाई खेलों का स्वर्ण था। हम खिताब का बचाव करके लगातार दो स्वर्ण जीतना चाहते थे और भारतीय हॉकी के इतिहास में अपनी जगह बनाना चाहते थे।’’ फुल्टोन का मानना है कि भारतीय हॉकी में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की अगली खेप मौजूद है।
उन्होंने बताया कि टीम के विभिन्न स्तरों पर एक जैसी रणनीतिक रूपरेखा के साथ योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘टीम में बदलाव कैसे करना है? कुछ जूनियर खिलाड़ियों को कैसे शामिल करना है और किस तरह के संयोजन तैयार करने हैं।
इन सब पर काम करना जरूरी है। हमारे पास फिलहाल एक अच्छी अंडर-21 टीम है। इंडिया-ए टीम भी प्रशिक्षण ले रही है और सीनियर टीम यहां मौजूद है।’’ उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के अनुसार दो सप्ताह का ब्रेक होगा, जिसके बाद पंजाब के जालंधर में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी (एसीटी) की तैयारी के लिए शिविर लगाया जाएगा।
इसी दौरान खिलाड़ियों के नये समूह का चयन किया जाएगा। फुल्टोन ने कहा, ‘‘एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी के अगले ही सप्ताह हमें न्यूजीलैंड के लिए रवाना होना है, जहां तीन टेस्ट मैच खेलने हैं। इसलिए अभी से लेकर एसीटी की तैयारी और उसके बाद न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों तक हमें खिलाड़ियों के बड़े समूह का इस्तेमाल करना होगा।’’ फुल्टोन ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए भारतीय पुरुष टीम में बदलाव और नयी प्रतिभाओं को शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी से ही शुरू हो जाएगी, जिसका आयोजन 27 अक्टूबर से पांच नवंबर तक मोहाली और जालंधर में होना है। उन्होंने कहा, ‘‘हम वहां 30 खिलाड़ियों के साथ जाएंगे। इनमें से 20 खिलाड़ियों का चयन एसीटी खेलने के लिए किया जाएगा।
कुछ अतिरिक्त खिलाड़ी टीम के साथ बने रहेंगे, क्योंकि एसीटी के एक सप्ताह बाद उन्हें न्यूजीलैंड जाकर वहां खेलने वाली टीम में शामिल किया जाएगा। इस तरह हम खिलाड़ियों के एक और समूह का इस्तेमाल करेंगे।’’ फुल्टन के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया लॉस एंजिलिस ओलंपिक के लिए भारतीय टीम को धीरे-धीरे तैयार करने और मजबूत बदलाव सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी।
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