Aman Sehrawat और Sujeet Kalakal चमके, भारतीय पहलवानों ने एशियन गेम्स में जीते छह पदक

एशियाई खेलों में भारतीय पहलवानों ने शानदार वापसी करते हुए दो स्वर्ण सहित कुल छह पदक अपने नाम किए। स्वदेश लौटने पर पदक विजेताओं का भव्य स्वागत हुआ और उन्होंने अब 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य रखा है। अमन सहरावत और सुजीत कलकल के अलावा नितेश सिवाच, अंतिम पंघाल, दीपक पूनिया और सुनील कुमार ने भी पदक तालिका में योगदान दिया।
(संस्कृति गौबा) नयी दिल्ली, पांच अक्टूबर एशियाई खेलों से पहले चोटों से लेकर फॉर्म में गिरावट जैसी कई समस्याओं से जूझने वाले भारतीय पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदकों सहित छह पदक जीते और अब उनकी निगाह 2028 में लॉस एंजिलिस में इसी तरह का प्रदर्शन करने पर टिकी हैं। एशियाई खेलों में अमन सहरावत और सुजीत कलकल ने स्वर्ण पदक, जबकि नितेश सिवाच और अंतिम पंघाल ने रजत पदक तथा दीपक पूनिया और सुनील कुमार ने कांस्य पदक जीते। पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद 23 वर्षीय सहरावत को पेट की बीमारी से भी जूझना पड़ा, जिसके कारण वह कई टूर्नामेंट में भाग नहीं ले पाए।
नागोया में उन्होंने फाइनल में मौजूदा विश्व चैंपियन हान चोंग सोंग को 11-7 से हराया। सहरावत ने सोमवार को स्वदेश लौटने पर कहा, ‘‘जीवन में उतार-चढ़ाव और चोटें लगती रहती हैं। लेकिन मुझे खुद पर पूरा विश्वास था।
हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए और मैंने भी यही किया। मैंने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। मेरा अगला लक्ष्य ओलंपिक है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने देश के लिए स्वर्ण पदक जीता और आगे भी हम ऐसा ही करेंगे।
अब हमारा राष्ट्रगान लॉस एंजिलिस ओलंपिक में बजाया जाएगा।’’ भारत के फ्रीस्टाइल में दूसरे स्वर्ण पदक विजेता सुजीत के लिए यह उम्मीदों पर खरा उतरने से जुड़ा था। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने जो भी संघर्ष किया, उसका फल मिला। फाइनल कठिन था, लेकिन उस समय मेरा ध्यान सिर्फ जीतने पर था।
अब हम और कड़ी मेहनत करेंगे। अगर सब ठीक रहा तो हम ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक जीतेंगे। हमने ओलंपिक के लिए अभ्यास पहले ही शुरू कर दिया है।’’ पुरुषों के 97 किलोग्राम ग्रीको-रोमन वर्ग में रजत पदक जीतने वाले नितेश सिवाच ने कहा, ‘‘मुझे बहुत अच्छा लग रहा है।
मुझे पहली बार इतना सम्मान और आदर मिल रहा है। मुझे पहली बार इतना शानदार स्वागत मिल रहा है और मैं बहुत खुश हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मेरा लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना था। मैं स्वर्ण पदक तो नहीं जीत पाया, लेकिन रजत पदक जरूर हासिल किया।
मैं इससे बहुत खुश हूं क्योंकि यह मेरा पहला एशियाई खेल था। हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन जारी रखेंगे और उम्मीद है कि ओलंपिक से भी पदक लेकर लौटेंगे।’’ दीपक पूनिया भी चोट से उबरकर पदक जीतने में सफल रहे। उन्होंने कांस्य पदक के मुकाबले में मंगोलिया के गंखुयाग गंबातर को 2-1 से हराया।
पूनिया ने कहा, ‘‘मेरे लिए पदक जीतना काफी चुनौतीपूर्ण था क्योंकि मैं पहले 86 किलोग्राम वर्ग में भाग लेता था, लेकिन इस बार मैंने 97 किलोग्राम वर्ग में भाग लिया। मुझे कांस्य पदक से ही संतोष करना पड़ा। उम्मीद है कि मैं आगामी प्रतियोगिताओं में इससे अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रहूंगा।’’ रजत पदक जीतने वाली महिला पहलवान अंतिम पंघाल ने कहा, ‘‘यह एशियाई खेलों में मेरा दूसरा पदक है।
मैं स्वर्ण पदक को लक्ष्य बनाकर खेलों में भाग लेने गई थी। उम्मीद है कि मैं भविष्य में इससे बेहतर प्रदर्शन करूंगी।’’ हवाई अड्डे पर हरियाणा के खेल मंत्री गौरव गौतम भी खिलाड़ियों के परिवार के सदस्यों और समर्थकों के साथ पहलवानों का स्वागत करने के लिए मौजूद थे।
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