बॉल टेंपरिंग के नियम में बदलाव की तैयारी, कोरोना की वहज से मिल सकती है इजाजत

बॉल टेंपरिंग के नियम में बदलाव की तैयारी, कोरोना की वहज से मिल सकती है इजाजत

फिलहाल किसी भी पदार्थ को गेंद पर लगाना आईसीसी के नियम के खिलाफ है। लेकिन अगर आईसीसी अपने नियमों में बदलाव करता है और इसकी इजाजत देता है तो आने वाले दिनों में बॉल टेंपरिंग जैसा शब्द क्रिकेट से गायब हो सकता है।

अगर आप खेल प्रेमी है और वह भी क्रिकेट के तो बॉल टेंपरिंग का नाम जरूर सुना होगा। बॉल टेंपरिंग अचानक 2018 में सुर्खियों में आ गया जब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया पर बॉल टेंपरिंग का आरोप लगा। मुकाबला ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच केपटाउन में चल रहा था। उस मुकाबले में बॉल टेंपरिंग अचानक सामने आता है जिसके बाद उस वक्त के ऑस्ट्रेलियाई कप्तान स्टीव स्मिथ, उप कप्तान डेविड वॉर्नर सहित गेंदबाज को 1 साल का प्रतिबंध झेलना पड़ता है। इस प्रतिबंध की वजह से ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट पर बहुत असर पड़ा लेकिन बॉल टेंपरिंग को गलत माना गया।

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तो सबसे पहले आपको यह बताते है कि आखिर यह बॉल टेंपरिंग होता क्या है? दरअसल आईसीसी के नियम के मुताबिक अगर कोई खिलाड़ी गेंद से छेड़छाड़ करता है और उसकी स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश करता है तो उसे ही बॉल टेंपरिंग कहा जाता है। कहने का मतलब यह है कि गेंद की चमक को बरकरार रखने के लिए या गेंद में चमक लाने के लिए अगर कोई खिलाड़ी किसी पदार्थ का इस्तेमाल करता है तो वह बॉल टेंपरिंग है। इसे क्रिकेट के नियमों में अवैध माना गया है। उदाहरण के लिए अगर कोई गेंदबाज च्विंगम खा रहा है और उसका इस्तेमाल बॉल पर भी कर रहा है तो इसे ही बॉल टेंपरिंग कहा जाएगा या गेंद पर वैसलीन या सनस्क्रीन लगाया जा रहा है तो भी यह ball-tampering के ही कैटेगरी में आएगा। इसके अलावा खिलाड़ी गेंद से निकलने वाले रेशे से छेड़छाड़ करता है या फिर गेंद को जमीन पर रगड़ता है तो उसे भी गेंद से छेड़छाड़ माना जाएगा।

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लेकिन अब ऐसा लगता है कि बॉल टेंपरिंग को फिलहाल क्रिकेट में वैध्य कर दिया जाएगा। क्रिकेट की एक प्रमुख वेबसाइट के मुताबिक के आईसीसी इस पर विचार कर रहा है और प्रशासक अंपायरों की निगरानी में गेंद चमकाने के लिए किसी पदार्थ के इस्तेमाल की इजाजत देने पर विचार कर रहा है। फिलहाल किसी भी पदार्थ को गेंद पर लगाना आईसीसी के नियम के खिलाफ है। लेकिन अगर आईसीसी अपने नियमों में बदलाव करता है और इसकी इजाजत देता है तो आने वाले दिनों में बॉल टेंपरिंग जैसा शब्द क्रिकेट से गायब हो सकता है। बॉल टेंपरिंग ना सिर्फ क्रिकेट के नियमों का उल्लंघन है बल्कि खेल भावना के भी खिलाफ है। तभी तो भले ही दोषी खिलाड़ियों के खिलाफ आईसीसी ने उतनी कड़ी कार्रवाई नहीं की लेकिन ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट ने अपने बड़े खिलाड़ियों को बैन करने देरी नहीं की।

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लेकिन अब सवाल यह है कि आखिर बॉल टैंपरिंग की इजाजत क्यों दी जाएगी? दरअसल, बॉल में चमक बरकरार रखने के लिए खिलाड़ी लारवा का इस्तेमाल करते हैं लेकिन कोरोनावायरस के कहर को देखते हुए आईसीसी बॉल टेंपरिंग के नियमों में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। दरअसल कोरोना मुंह से निकलने वाले ड्रॉपलेट के जरिए ही एक दूसरे को फैलता है। ऐसे में बॉल पर चमक बरकरार रखने के लिए अगर खिलाड़ी लारवा का इस्तेमाल करते हैं तो कहीं ना कहीं यह स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ माना जाएगा। हालांकि यह फैसला कितने दिनों में होता है अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन कोरोनावायरस के बाद भी यह फैसला जारी रहता है यह भी संशय के दायरे में है।

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बॉल की चमक क्रिकेट में इसलिए जरूरी होता है क्योंकि इससे गेंदबाजों को स्विंग और रिवर्स स्विंग में मदद मिलती है। खासकर के लंबे फॉर्मेट के क्रिकेट में गेंद में चमक बरकरार रखना बेहद जरूरी है। अगर टेस्ट क्रिकेट में गेंद में चमक नहीं रहेगी तो गेंदबाजी करना मुश्किल हो सकता है। स्विंग और रिवर्स स्विंग गेंदबाजों का बड़ा हथियार होता है। अच्छे-अच्छे बल्लेबाज इस तरीके के गेंदों पर मात खा जाते हैं। लेकिन इसके लिए गेंद में चमक का रहना जरूरी है और इसी को ध्यान में रखते हुए आईसीसी फिलहाल बॉल टेंपरिंग पर विचार कर रहा है।