Asian Games से बाहर होने के बाद छलका PV Sindhu का दर्द, कमियों को सुधारकर वापसी का लिया संकल्प

(डेटलाइन में सुधार के साथ रिपीट) नागोया, 28 सितंबर दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू एशियाई खेलों से निराशाजनक तरीके से बाहर होने के बाद आहत हैं लेकिन इस हार के दर्द ने उनके कुछ और हासिल करने के संकल्प को और मजबूत कर दिया है। सिंधू ने अपनी कमियों पर काम
दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू एशियाई खेलों से निराशाजनक तरीके से बाहर होने के बाद आहत हैं लेकिन इस हार के दर्द ने उनके कुछ और हासिल करने के संकल्प को और मजबूत कर दिया है। सिंधू ने अपनी कमियों पर काम करने का वादा करते हुए कहा कि ‘‘एक निराशाजनक नतीजा उस सफर को परिभाषित नहीं कर सकता, जो मेरे लिए इतना मायने रखता है।’’
सिंधू का अभियान रविवार को चीन की चेन यूफेई के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में हार के साथ समाप्त हुआ। एक समय वह मुकाबला अपने पक्ष में खत्म करने से महज तीन अंक दूर थीं, लेकिन इसके बाद उन्हें 21-11, 18-21, 10-21 से हार का सामना करना पड़ा। सिंधू ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘इसे शब्दों में बयां करने के लिए मुझे थोड़ा समय चाहिए था। मेरा एशियाई खेलों का अभियान समाप्त हो गया है और मैं आहत हूं। क्वार्टर फाइनल में मुकाबला अपने पक्ष में करने से मैं तीन अंक दूर थी।
मैं बार-बार उन्हीं तीन अंकों के बारे में सोच रही हूं।’’ इस 31 वर्षीय खिलाड़ी ने स्वीकार किया कि अहम मौकों पर लंबे और थकाऊ रैलियों में वह फिर पिछड़ गईं। हाल में चीन में उनके अभियान के दौरान भी ऐसे ही रैलियों ने निर्णायक भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा, ‘‘मेरे पास मौका था। उसे हाथ से निकल जाने का दर्द है।’’ निराशा को अपने अभियान की पहचान बनाने देने के बजाय सिंधू ने दबाव के क्षणों में सामने आई कमियों को दूर करने पर ध्यान देना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं और मेरी टीम पहले से ही उन मौकों पर मुकाबला खत्म करने की क्षमता पर काम कर रहे हैं। हम इसे सुधारेंगे।’’ सिंधू ने एशियाई खेलों में 2014 में पदार्पण से लेकर 12 साल बाद अपने चौथे एशियाई खेलों में हिस्सा लेने तक के सफर पर भी गर्व जताया। उन्होंने लिखा, ‘‘गर्व करने की भी वजह है। 2014 में अपने पहले एशियाई खेलों से लेकर अब चौथे खेलों तक, भारत के लिए 12 साल तक अपना सब कुछ देने का सफर रहा है। मैं खुद को इस एहसास को महसूस करने देना चाहती हूं। एक दर्दनाक नतीजा उस सफर को परिभाषित नहीं कर सकता, जो मेरे लिए इतना मायने रखता है।’’
सिंधू ने लिखा, ‘‘मैं आहत हूं, लेकिन यह ठीक है। मुझे खुशी है कि यह अब भी मेरे लिए इतना मायने रखता है कि इतनी तकलीफ हो। मैं अब भी इसे चाहती हूं। मैं अब भी कोर्ट पर पूरे दमखम से खेलना चाहती हूं। यही भावना मुझे आगे बढ़ाती है।’’ एशियाई खेलों के व्यस्त कार्यक्रम ने भी सिंधू की शारीरिक क्षमता की परीक्षा ली। उन्होंने 18 घंटे के अंदर तीन मुकाबले खेले। तीसरे मैच के बाद वह रात करीब तीन बजे अपने कमरे में लौटीं और सुबह 8:30 बजे फिर कोर्ट पर उतरना पड़ा।
उन्होंने कहा, ‘‘18 घंटे में तीन मैच। रात तीन बजे वापस आई और सुबह 8:30 बजे फिर बाहर निकलना पड़ा। इसका असर पड़ा। लेकिन जिस प्रशिक्षण शिविर ने मुझे हर कारण दिया कि मैं बेहतर कर सकती हूं, उसके बाद मैं इससे कहीं ज्यादा हासिल करना चाहती थी।’’ अपने चौथे एशियाई खेलों के अनुभव पर सिंधू ने अपने प्रशंसकों का भी आभार जताया।
उन्होंने कहा कि जो लोग देर रात तक जागकर उनका मुकाबला देखते और उनका हौसला बढ़ाते रहे, वह उनके लिए भी निर्णायक तीन अंक हासिल करना चाहती थीं। सिंधू ने कहा, ‘‘उन सभी लोगों का धन्यवाद, जो देर रात तक जागे, मेरा हौसला बढ़ाया और मुझ पर भरोसा किया। मैं उन आखिरी तीन अंकों को हम सभी के लिए हासिल करना चाहती थी। मेरे साथ खड़े रहने के लिए धन्यवाद। मैं फिर कोशिश करूंगी।
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