टीजी मोहनदास की टिप्पणी पर आरएसएस ने जताई असहमति, कहा- ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने छात्र आंदोलन को लेकर दक्षिणपंथी राजनीतिक विश्लेषक टीजी मोहनदास की विवादित टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा की है। आरएसएस के पदाधिकारी केबी श्रीकुमार ने स्पष्ट किया कि मोहनदास संगठन के पदाधिकारी नहीं हैं और यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं। इस विवादित टिप्पणी के खिलाफ छात्र संगठन एआईएसएफ ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
तिरुवनंतपुरम, 28 जुलाई राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने नयी दिल्ली में हाल में हुए छात्र आंदोलन को लेकर दक्षिणपंथी राजनीतिक विश्लेषक टीजी मोहनदास की विवादित टिप्पणी की निंदा करते हुए मंगलवार को कहा कि ये उनके ‘‘व्यक्तिगत विचार’’ हैं और इसकी आलोचना की जानी चाहिए। आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी केबी श्रीकुमार ने एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि मोहनदास किसी भी स्तर पर संघ के पदाधिकारी नहीं हैं। श्रीकुमार ने कहा, ‘‘हालिया विरोध-प्रदर्शन पर टीजी मोहनदास की टिप्पणियां उनके व्यक्तिगत विचार हैं।
वह किसी भी स्तर पर आरएसएस के पदाधिकारी नहीं हैं। आरएसएस उनके विचारों से सहमत नहीं है। उनकी टिप्पणियों की कड़े से कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए।’’ यह स्पष्टीकरण मोहनदास की टिप्पणियों को लेकर केरल में और सोशल मीडिया पर व्यापक विरोध के एक दिन बाद आया है।
मोहनदास के बयान के बाद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के समर्थन वाले छात्र संगठन ‘ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन’ (एआईएसएफ) ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। मोहनदास ने यूट्यूब पर जारी एक वीडियो में कथित रूप से कहा था कि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक के विरोध में दिल्ली में छात्रों का प्रदर्शन ‘‘सामूहिक बलात्कार की घटनाओं का कारण बन सकता है और इसके खिलाफ कोई शिकायत नहीं होगी, क्योंकि प्रदर्शन में शामिल लोगों को बलात्कार पसंद है और ऐसी भी महिलाएं हैं, जिन्हें बलात्कार पसंद होता है।’’ उसी वीडियो में उन्होंने कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर वह जिम्मेदारी संभाल रहे होते, तो कर्फ्यू लगा देते, भीड़ को हटने का आदेश देते और अगर प्रदर्शनकारी नहीं मानते तो गोली चलवा देते। मोहनदास वीडियो में कथित तौर पर यह कहते हुए भी सुनाई दे रहे हैं कि इस कार्रवाई में कुछ लोग मारे जाते या जीवन भर के लिए अपाहिज हो जाते, लेकिन स्थिति कुछ ही घंटों में नियंत्रण में आ जाती और वह शवों को अस्पतालों में भेजवा देते।
राज्य के पुलिस प्रमुख को दी गई अपनी शिकायत में एआईएसएफ ने आरोप लगाया था कि मोहनदास ने प्रदर्शनकारी छात्रों को ‘‘गोली मार देने’’ का आह्वान किया था, जो हिंसा और नरसंहार की अपील के समान है। शिकायत के मुताबिक, यह एक बेहद खतरनाक बयान है, जिसमें प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ सरकारी बल का इस्तेमाल करके गोली चलाने की सार्वजनिक रूप से वकालत की गई, जिससे लोगों की मौत होने तथा उन्हें गंभीर चोट पहुंचने की आशंका थी। शिकायत के अनुसार, मोहनदास की यह टिप्पणी हिंसा को बढ़ावा देने वाली, मानव जीवन की अहमियत को कम करने वाली और डर एवं सामाजिक अशांति पैदा करने वाली थी।
एआईएसएफ ने सभी लागू कानूनी प्रावधानों के तहत मोहनदास के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग की और उस यूट्यूब चैनल, वीडियो के स्रोत, डिजिटल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया मंच पर इसके प्रसार की जांच की मांग की, जिस पर ये टिप्पणियां की गई थीं। पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने भी मोहनदास की टिप्पणियों की निंदा की और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। ‘फेसबुक’ पर एक पोस्ट में विजयन ने आरोप लगाया कि ये बयान संघ परिवार की ‘‘असहमति को खत्म करने’’ वाली सोच को दिखाते हैं।
उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सरकार पर आरएसएस को खुश करने के लिए पुलिस और कानून व्यवस्था को मूक दर्शक बनाकर रखने का भी आरोप लगाया। इस बीच, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की वरिष्ठ नेता और ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष पीके श्रीमति ने मोहनदास की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की और उच्च न्यायालय से उनके खिलाफ इस मामले में खुद संज्ञान लेने का अनुरोध किया। श्रीमति ने कहा कि मुख्यमंत्री वीडी सतीशन को इस मामले में दखल देना चाहिए।
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