FIFA President Infantino की बढ़ी मुश्किल, निवेश प्रस्ताव वापसी के बावजूद UEFA का अविश्वास और Legal Action की तैयारी

फीफा और यूईएफए के बीच बढ़ता तनाव अब कानूनी मोर्चे तक पहुंच गया है, जहां साक्ष्य सुरक्षित रखने के नोटिस ने वैश्विक फुटबॉल प्रशासन में अविश्वास की गहरी खाई को उजागर किया है। निवेश प्रस्ताव वापस लेने के बावजूद यूईएफए का सख्त रुख और शीर्ष अधिकारियों की संलिप्तता फुटबॉल जगत में बड़े नीतिगत बदलावों और संभावित न्यायिक जांच का संकेत देती है। कीवर्ड: फीफा यूईएफए विवाद, फुटबॉल राजनीति, कानूनी कार्रवाई, जियानी इन्फेंटिनो।
विश्व फुटबॉल में इन दिनों फीफा और यूरोपीय फुटबॉल महासंघ के बीच बढ़ता विवाद चर्चा का विषय बना हुआ है। फीफा ने विश्व कप और अपनी अन्य प्रमुख प्रतियोगिताओं में निजी निवेश से जुड़ा प्रस्ताव वापस तो ले लिया है, लेकिन इसके बावजूद दोनों संगठनों के बीच तनाव कम होता नजर नहीं आ रहा है। अब मामला संभावित कानूनी कार्रवाई तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यूरोपीय फुटबॉल महासंघ यानी यूईएफए ने फीफा को साक्ष्य सुरक्षित रखने से जुड़ा कानूनी पत्र भेजा है। इस तरह का पत्र किसी संभावित कानूनी विवाद से पहले भेजा जाता है, ताकि संबंधित संस्था किसी भी दस्तावेज, अभिलेख, संदेश या अन्य साक्ष्य को नष्ट, हटाए या उसमें बदलाव न करे। आमतौर पर यह कदम तब उठाया जाता है जब भविष्य में कानूनी प्रक्रिया शुरू होने की संभावना हो।
बता दें कि फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने हाल ही में विश्व कप और अन्य प्रतियोगिताओं में अल्पांश हिस्सेदारी बेचने से जुड़ा प्रस्ताव रखा था। इस योजना का सबसे कड़ा विरोध यूईएफए ने किया। यूरोप के 55 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाला यह संगठन वैश्विक फुटबॉल में सबसे प्रभावशाली महासंघों में माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, यूईएफए ने साफ कर दिया था कि यदि प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो वह फीफा के बहिष्कार सहित अन्य विकल्पों पर विचार करेगा।
गौरतलब है कि प्रस्ताव वापस लेने के बाद भी यूईएफए ने अपने रुख में नरमी नहीं दिखाई है। संगठन ने हाल ही में जारी बयान में कहा कि फीफा नेतृत्व पर उसका भरोसा कमजोर हुआ है और केवल प्रस्ताव वापस लेने से मामला समाप्त नहीं माना जा सकता। यूईएफए का कहना है कि अब फीफा में विश्वास दोबारा स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।
मौजूद जानकारी के अनुसार, समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कानूनी पत्र में फीफा के 18 वरिष्ठ अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। इन सभी को अपने दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक संदेश और अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए कहा गया है। इनमें फीफा के वैश्विक फुटबॉल विकास प्रमुख और पूर्व फ्रांसीसी फुटबॉल खिलाड़ी आर्सेन वेंगर का नाम भी बताया गया है। हालांकि आर्सेन वेंगर ने कहा है कि उन्हें जियानी इन्फेंटिनो की इस योजना की जानकारी नहीं थी।
फिलहाल यूईएफए ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह निश्चित रूप से अदालत का दरवाजा खटखटाएगा। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि साक्ष्य सुरक्षित रखने का नोटिस इस बात का संकेत है कि संगठन सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है। दूसरी ओर फीफा के महासचिव मैटियास ग्राफस्ट्रॉम ने कर्मचारियों को भेजे गए संदेश में कहा कि व्यक्ति और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन संस्थाएं आगे बढ़ती रहती हैं।
बता दें कि अन्य महाद्वीपीय फुटबॉल संगठनों की राय भी इस विवाद में अहम मानी जा रही है। उत्तरी और मध्य अमेरिकी फुटबॉल महासंघ कोंकाकाफ ने भी फीफा की योजना का विरोध किया था, हालांकि उसने बहिष्कार का समर्थन नहीं किया। वहीं एशियाई फुटबॉल महासंघ ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह अस्वीकार्य बताते हुए यूईएफए और कोंकाकाफ के साथ एकजुटता जताई थी।
उधर अफ्रीकी फुटबॉल महासंघ की बैठक जल्द होने वाली है। माना जा रहा है कि जियानी इन्फेंटिनो को सबसे अधिक समर्थन इसी महासंघ से मिलने की उम्मीद है। ऐसे में इस बैठक पर भी सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
गौरतलब है कि फिलहाल फीफा के बहिष्कार का तत्काल खतरा टलता दिखाई दे रहा है, क्योंकि विवादित निवेश प्रस्ताव वापस ले लिया गया है। अब अगली बड़ी परीक्षा सितंबर में पोलैंड में होने वाले अंडर-20 महिला विश्व कप के दौरान होगी। फिलहाल पोलैंड फुटबॉल संघ ने कहा है कि किसी भी टीम की ओर से प्रतियोगिता से हटने की कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। ऐसे में आने वाले दिनों में फीफा और यूईएफए के बीच रिश्ते किस दिशा में जाते हैं, इस पर वैश्विक फुटबॉल जगत की नजर बनी हुई हैं।
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