Vinesh Phogat मामले में WFI को Delhi High Court का निर्देश, 2 हफ्ते में लें फैसला

Vinesh Phogat
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Oct 30 2026 8:42PM

दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय कुश्ती महासंघ को पहलवान विनेश फोगाट के खिलाफ जारी दो कारण बताओ नोटिस पर दो सप्ताह के भीतर फैसला लेने का निर्देश दिया है। हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि महासंघ का यह फैसला 20 जनवरी 2027 तक लागू नहीं किया जाएगा।

भारतीय पहलवान विनेश फोगाट की आगामी प्रतियोगिताओं में भागीदारी को लेकर चल रहे विवाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। अदालत ने भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) को विनेश को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस पर 2 सप्ताह के भीतर फैसला लेने को कहा है। हालांकि, अदालत ने यह भी साफ किया है कि महासंघ के फैसले पर अगली सुनवाई तक अमल नहीं किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 20 जनवरी 2027 को होगी।

न्यायमूर्ति अमित महाजन ने 29 अक्टूबर को दिए आदेश में कहा कि किसी भी खिलाड़ी को प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए मानसिक रूप से शांत और पूरी तरह तैयार रहना जरूरी है। अदालत ने माना कि विनेश के खिलाफ जारी नोटिस और उन पर लंबित कार्रवाई का असर उनकी आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी पर पड़ सकता है। इसी वजह से अदालत ने मामले को जल्द निपटाने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान विनेश के वकील ने अदालत को बताया कि वह दिसंबर के मध्य में होने वाली राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेना चाहती हैं। लेकिन महासंघ की ओर से जारी नोटिस पर अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उनके वकील ने कहा कि यह अनिश्चितता विनेश के लिए तलवार की तरह लटक रही है। उन्हें आशंका है कि भविष्य की प्रतियोगिताओं से ठीक पहले अगर उनके खिलाफ कोई फैसला आता है, तो उनके पास राहत पाने के लिए पर्याप्त समय नहीं बचेगा।

अदालत ने विनेश की इस चिंता को जायज माना। उसने महासंघ को 9 मई और 17 जून को जारी दोनों कारण बताओ नोटिस पर 2 सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि इस अवधि में या इसके बाद जो भी फैसला लिया जाएगा, वह 20 जनवरी 2027 को होने वाली अगली सुनवाई तक लागू नहीं होगा। अदालत ने विनेश की याचिका पर केंद्र सरकार और कुश्ती महासंघ को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है।

दरअसल, विनेश ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दोनों नोटिस रद्द करने और उनके खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई खत्म करने की मांग की है। उनका आरोप है कि महासंघ लगातार मनमाने और दुर्भावना से भरे फैसले ले रहा है। विनेश का कहना है कि इन कदमों का मकसद मां बनने के बाद प्रतिस्पर्धी कुश्ती में उनकी वापसी को मुश्किल बनाना है।

याचिका में विनेश ने यह भी कहा है कि अंतरराष्ट्रीय डोपिंग जांच एजेंसी ने उन्हें 1 जनवरी 2026 से प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने की मंजूरी दे दी थी। इसके बावजूद कुश्ती महासंघ ने बाद में खिलाड़ियों की पात्रता को लेकर ऐसा नियम बनाया, जिससे वह चयन प्रक्रिया से बाहर हो गईं। इसके बाद महासंघ ने उन्हें डोपिंग नियमों और अपनी उपलब्धता से जुड़ी जानकारी देने में कथित चूक के आरोप में पहला कारण बताओ नोटिस जारी किया।

विनेश के मुताबिक, इन नोटिस और उनके खिलाफ चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई से आगामी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी पात्रता, चयन और भागीदारी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने अदालत से मांग की है कि महासंघ की कार्रवाई को रद्द किया जाए, ताकि उनकी खेल में वापसी का रास्ता बाधित न हो।

बता दें कि डोपिंग रोधी नियमों के तहत खिलाड़ियों को जांच के लिए अपनी उपलब्धता और ठिकाने से जुड़ी जानकारी तय समय पर देनी होती है। इसमें चूक होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, विनेश ने अपनी याचिका में महासंघ के आरोपों और कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। फिलहाल हाईकोर्ट के निर्देश से महासंघ को नोटिस पर फैसला लेना होगा, लेकिन उस फैसले का असर अगली सुनवाई से पहले विनेश की प्रतियोगिताओं में भागीदारी पर नहीं पड़ेगा। ऐसे में अब सभी की नजर 20 जनवरी 2027 को होने वाली सुनवाई और महासंघ के जवाब पर टिकी हुई हैं।

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