• राजस्थान आकर शेखावाटी क्षेत्र की हवेलियां नहीं देखीं तो समझिये कुछ नहीं देखा

प्रीटी Oct 12, 2021 16:05

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में हवेली शिल्प और भित्ति चित्रकला पर्यटकों के लिए अद्भुत आकर्षण है। यहां की हवेलियां, मंदिर और छतरियां अपनी स्थापत्य शिल्पकला तथा दीवारों की रंगीन चित्रकारी से अत्यंत लुभावनी लगती हैं।

राजस्थान का शेखावाटी क्षेत्र सीकर, झुंझुनूं और चुरू जिलों को अपने में समेटे हुए है। राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर विशेष स्थान रखने वाला यह क्षेत्र अपनी हवेलियों की वास्तुकला के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। यहां की विभिन्न रंगों की हवेलियां आर्ट गैलरी जैसी लगती हैं। यहां स्थित कई हवेलियां अपनी विशालता और भित्ति चित्रकारी के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध हैं। इसके अलावा पहाड़ों में सुरम्य जगहों पर बने जीण माता मंदिर, शाकम्बरीदेवी का मंदिर, खाटू में बाबा खाटूश्यामजी का मंदिर, सालासर में हनुमान जी का मंदिर, कंकङेऊ कलां में बाबा माननाथ की मेङी आदि स्थानों पर बड़ी संख्या में सालभर विभिन्न पर्वों और अन्य अवसरों पर श्रद्धालु उमड़ते हैं। शेखावाटी क्षेत्र जहाँ देश के लिए अपने प्राणों को बलिदान करने वाले फौजियों के लिए प्रसिद्ध है वहीं इस क्षेत्र ने देश को कई बड़े उद्योगपति भी दिये हैं।

इसे भी पढ़ें: हैदराबाद के इन बाजारों में खरीद सकते हैं अपनी पसंद का हर सामान, एक बार जरूर जाएँ

शेखावाटी क्षेत्र की विशेषताएं

राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में हवेली शिल्प और भित्ति चित्रकला पर्यटकों के लिए अद्भुत आकर्षण है। यहां की हवेलियां, मंदिर और छतरियां अपनी स्थापत्य शिल्पकला तथा दीवारों की रंगीन चित्रकारी से अत्यंत लुभावनी लगती हैं। ये हवेलियां और छतरियां दशकों पूर्व इस इलाके के व्यवसायी वर्ग द्वारा बनवाई गई थीं। चुरू, सीकर, झुंझुनूं जिलों का इलाका शेखावाटी कहलाता है। 15वीं शताब्दी के आसपास यह इलाका राव शेखाजी के शासन में था इसलिए बाद में चलकर इलाके का नाम शेखावाटी हो गया। शेखावाटी में उत्कृष्ट दर्शनीय हवेलियों वाले कस्बों में प्रमुख झुंझुनु, मंडावा, नवलगढ़, महनसर, मुकुंदगढ़, डूंडलोद, चिड़ावा, बगड़, पिलानी, सूरजगढ़ आदि हैं। यह सभी झुंझुनुं जिले में हैं। 

हवेलियों की खासियत

सीकर जिले में सीकर शहर के अलावा फतेहपुर, लक्ष्मणगढ़, रायगढ़ की हवेलियां काफी विख्यात हैं। इसके अलावा चुरू जिले में चुरू के अलावा निकटवर्ती रतन नगर, सरदार शहर, दुधवखारा, रतनगढ़ की हवेलियां आदि दर्शनीय हैं। हवेलियों के नक्काशीदार, अलंकृत विशाल दरवाजे और खिड़कियां लोहे, तांबे और लकड़ी के बने हुए हैं। इनकी कलात्मकता देखते ही बनती है। खुले आसमान के नीचे निर्मित इन हवेलियों की कलात्मक निर्माण शैली कला प्रेमी सैलानियों को अभिभूत कर देती है। इसे शेखावाटी क्षेत्र की खुली कला दीर्घा भी कहा जा सकता है। हवेलियों की स्थापत्य कला में इनकी दीवारों के ऊपर की गई चित्रकारी हवेलियों की खूबसूरती में चार चांद लगा देती है। बाहर और अंदर वानस्पतिक, धार्मिक, ऐतिहासिक और पुराने अंग्रेजी राज के असर वाली चित्रकारी अंकित है। इस भित्ति चित्रकला के संरक्षण के प्रयास भी किए जा रहे हैं। कई व्यावासायिक घरानों ने इन हवेली शिल्प और भित्ति चित्रकला को संजो कर रखने की कोशिशें की हैं।

इसे भी पढ़ें: जैसलमेर की कला, किला, हवेलियों, संस्कृति और सोने जैसी माटी की बात ही अलग है

हवेलियां देखने की शुरुआत कहां से करें

हवेलियां देखने पर्यटक यदि दिल्ली से आते हैं तो उन्हें झुंझुनुं से शुरुआत करनी चाहिए। 15वीं शताब्दी में नवाबों द्वारा बनाया गया इस शहर में नरसिंह दास टिफरीबाल, ईश्वरदास, मोहनदास, मोदी व खेतानों की हवेलियां देखी जा सकती हैं। झुंझुनुं के बाद नवलगढ़ की खूबसूरत हवेलियां देखी जा सकती हैं। यहां ठहरने व खानपान के लिए लगभग हर कस्बे में अच्छी व्यवस्था है। शेखावाटी सितंबर से नवंबर तथा फरवरी से अप्रैल माह के बीच जाना ठीक रहता है।

- प्रीटी