जन्मदिन विशेषः रविशंकर प्रसाद का ऐसा रहा छात्रनेता से लेकर कैबिनेट मंत्री बनने तक का सफर

जन्मदिन विशेषः रविशंकर प्रसाद का ऐसा रहा छात्रनेता से लेकर कैबिनेट मंत्री बनने तक का सफर

रविशंकर प्रसाद के पिता ठाकुर प्रसाद पटना उच्च न्यायालय के वकील के रूप में कार्यरत रहे। रविशंकर प्रसाद की माता का नाम विमला प्रसाद है। इनकी पत्नी डॉ. माया प्रसाद इतिहास की प्रोफेसर के रूप में पटना विश्वविद्यालय में सेवारत हैं।

वरिष्ठ वकील, राजनीतिज्ञ, भारतीय जनता पार्टी के प्रखर नेतृत्वकर्ता, प्रमुख प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री रविशंकर प्रसाद का आज जन्मदिन है। पटना की गलियों से गुजरते हुए और भी नेताओं ने केंद्र की सरकार में शामिल होने का गौरव हासिल किया है लेकिन रविशंकर प्रसाद की छवि अन्य नेताओं से अलग व अद्वितीय है। 30 अगस्त 1954 को पटना के उच्च न्यायालय के वकील ठाकुर प्रसाद के घर जिस बच्चे का जन्म हुआ वो रविशंकर प्रसाद थे जिनकी मां का नाम विमला प्रसाद है। ठाकुर प्रसाद और विमला प्रसाद के सुपुत्र रविशंकर प्रसाद ने राजनीति की गलियों में जीत के परचम को लहराते हुए कई चुनाव जीते कई पदों से विभूषित हुए, चाहे वो अटल की सरकार में राज्यमंत्री से सीधे कैबिनेट मंत्री की छलांग हो या भारतीय जनता पार्टी में लगातार मिलती रही बड़ी जिम्मेदारियों की बात हो। 

रविशंकर प्रसाद के प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

पटना की सरजमीं से ताल्लुक रखने वाले रविशंकर प्रसाद ने पटना के मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर केंद्रीय सत्ता की सुगंध का लुत्फ आसानी से नहीं पाया बल्कि इसके पीछे का असली संघर्ष भी जानना आवश्यक है। रविशंकर प्रसाद ने पटना से शुरुआती शिक्षा के बाद पटना विश्वविद्यालय से B.A. ऑनर्स और M.A.(राजनीति विज्ञान) और L.L.B की डिग्रियां हासिल की हैं।

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रविशंकर प्रसाद का परिवार

रविशंकर प्रसाद के पिता ठाकुर प्रसाद पटना उच्च न्यायालय के वकील के रूप में कार्यरत रहे। रविशंकर प्रसाद की माता का नाम विमला प्रसाद है। इनकी पत्नी डॉ. माया प्रसाद इतिहास की प्रोफेसर के रूप में पटना विश्वविद्यालय में सेवारत हैं। रविशंकर प्रसाद को एक बेटा और बेटी हैं, बेटे आदित्य शंकर भी पेशे से वकील हैं, जबकि बेटी अदिति शंकर के हाथ रविशंकर प्रसाद ने पीले कर दिये हैं। रविशंकर प्रसाद अपने सात भाई बहनों में सबसे सफल और पिता ठाकुर प्रसाद की विरासत को संभालने वाले इकलौते शख्स हैं। वहीं रविशंकर की बहन अनुराधा प्रसाद समाचार जगत की जानी मानी पत्रकार और न्यूज 24 चैनल की एडिटर-इन-चीफ हैं। रविशंकर प्रसाद के जीजा राजीव शुक्ला जाने-माने दिग्गज कांग्रेस नेता और बीसीसीआई के महत्वपूर्ण क्रिकेट लीग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 

रविशंकर प्रसाद का राजनीतिक सफरनामा

पिता ठाकुर प्रसाद का झुकाव तत्कालीन जनसंघ (अब भाजपा) की विचारधारा के घोर समर्थकों में से एक और भागीदार के रूप में रहे। अपने पिता के नक्शे कदम पर रविशंकर ने मोर्चा संभाला और पटना विश्वविद्यालय से छात्र राजनीति में सक्रियता के साथ जुटे रहे। जनसंघ के संस्थापकों में रविशंकर की अहम भूमिका रही। 1974-75 में इंदिरा सरकार की इमरजेंसी के दौरान जेपी आन्दोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन रविशंकर प्रसाद ने भी किया। इसी दौरान रविशंकर प्रसाद को भी सरकार के विरोध के कारण जेपी आन्दोलन के प्रमुख नेताओं के संग जेल जाना पड़ा। छात्र राजनीति के दौरान पटना में कांग्रेसी विचारधारा के धुरविरोधी के रूप में लगातार धरना प्रदर्शनों में नजर आए। पटना विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के सहायक महासचिव के रूप में रविशंकर प्रसाद ने काफी समय तक काम किया। लगातार शिक्षारत रहते हुए छात्र राजनीति के दौरान रविशंकर ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साथ लम्बे समय तक जुड़े रहने का काम किया। 

रविशंकर प्रसाद ने साल 1980 में कानून की पढ़ाई पूरी कर पटना के उच्च न्यायालय में वकालत की प्रैक्टिस शुरू की तत्पश्चात दो दशकों की कड़ी मेहनत के बाद 1999 में पटना उच्च न्यायालय के अधिवक्ता के रूप में मान्यता प्राप्त की। साल 2000 में सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख अधिवक्ताओं में रविशंकर को भी चुन लिया गया जिसके बाद रविशंकर प्रसाद की छवि सीनियर एडवोकेट के रूप में फलने-फूलने लगी।

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राजनीतिज्ञ के रूप में भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की भूमिका में करीब पांच साल से अधिक समय तक रहे। 1995 में रविशंकर का सितारा चमकना चालू हुआ जब बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में नियुक्त किये गये। 

साल 2000 में अपनी कार्यक्षमताओं के अनुसार राज्यसभा सासंद बनाए गये और साल 2001 के सितम्बर माह में अटल सरकार में केंद्रीय कोयला एवं खनन राज्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी मिली। 2002 में कानून एवं न्याय मामलों के राज्यमंत्री के रूप में अतिरिक्त प्रभार के कार्यभार संभाला। 2003 में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री बने रविशंकर प्रसाद ने राजनीति के कद्दावर नेताओं के रूप में अपना कद बड़ा करने में सफल रहे। इसके बाद लगातार भारतीय जनता पार्टी सत्ता से दूर रही लेकिन रविशंकर प्रसाद ने विपक्षी नेता के रूप में लगातार प्रभावी काम किया। जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कई तरह के सियासी और गैर-राजनीतिक लाभ भी हुए।

रविशंकर प्रसाद ने विश्वस्तरीय मंचों पर भारत की तरफ से प्रतिनिधित्व करते हुए महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को निभाने का कठिन कार्य किया, सन् 2000 में भारतीय मंडल के प्रमुख नेता के तौर पर साऊथ अफ्रीका के डरबन जाने का सौभाग्य भी रविशंकर प्रसाद को ही मिला था। साल 2006 में भारत की तरफ से अमेरिका में सम्पन्न हुई संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्यक्रम में भाग लिया। 2006 में पुनः राज्यसभा के चुने गये इसी वर्ष इन्हें भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया। 2012 में तीसरी बार राज्यसभा के सदस्य बने और भाजपा के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे। 2014 में नरेन्द्र मोदी की सरकार में कैबिनेट मंत्री बने और कानून और न्याय मंत्री के साथ ही आईटी और दूरसंचार मंत्री भी बनाए गये। 2019 के लोकसभा चुनाव में अपने गृहजिले और बिहार की राजधानी पटना से कांग्रेस के कद्दावर नेता शत्रघ्न सिन्हा के खिलाफ भाजपा का सियासी किला फतह करने में सफल रहे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय कैबिनेट में कानून एवं न्याय मंत्री के रूप में शामिल हैं।   

रविशंकर प्रसाद वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में 

पेशेवर वकील के रूप में भी रविशंकर ने महती भूमिका निभाई है, मशहूर चारा घोटाले के आरोपी लालू यादव के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के वकील की तरफ से रविशंकर प्रसाद ने केस लड़ा था। भाजपा के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी के वकील के रहे। अयोध्या केस के प्रमुख अधिवक्ताओं में से एक रविशंकर प्रसाद भी थे।

उपलब्धियां

- साल 1991 से 1995 तक लगातार भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में कार्यरत।

- 1995 भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया।

- साल 2000 में बिहार से राज्यसभा सदस्य के रूप में चुने गए।

- 2001 में कोयला एवं खनन केंद्रीय राज्य मंत्री बनाए गए।

- 2002 में विधि एवं न्याय मामलों के (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री बनाए गए।

- 2003-04 में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री बने।

- 2006 में उन्हें राज्यसभा सांसद के रूप में चुने गए।

 - 2006 में भारतीय जनता पार्टी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में चुना।

- 2012 में तीसरी बार राज्यसभा सांसद बने और भाजपा के मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते रहे।

- 2014 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट मंत्री बनाए गए।

- 2014 में विधि एवं न्याय मामलों के मंत्री के रूप में पदभार संभाला।

- 2016 में इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एवं दूरसंचार मंत्रालय स्वतंत्र प्रभार के रूप में कार्य किया।

- 2019 के लोकसभा चुनाव में पटना से कांग्रेस के दिग्गज नेता शत्रुघ्न सिन्हा को हराकर संसद पहुंचे।

- 2019 में नरेंद्र मोदी की सरकार में कानून एवं न्याय मंत्री भारत सरकार बनाए गए।

- शुभम यादव