दिल्ली की राजनीति में अहम है नंबर 3, क्या शाहीन बाग फेरेगा पानी ?

दिल्ली की राजनीति में अहम है नंबर 3, क्या शाहीन बाग फेरेगा पानी ?

दिल्ली चुनाव का सबसे हॉट-टॉपिक आज के समय में शाहीन बाग है और ऐसा कोई भी नेता नहीं बचा हैजो इसमें कूदा न हो...अब तो शाहीनबाग के नाम पर राजनीतिक दल अपनी सरकार बनाने की जुगत में लगे हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख करीब आ रही है ठीक वैसे ही नेताओं के तेवरों के साथ ही मुद्दे भी बदल गए।

दिल्ली चुनाव का सबसे हॉट-टॉपिक आज के समय में शाहीन बाग है। और ऐसा कोई भी नेता नहीं बचा है जो इसमें कूदा न हो...अब तो शाहीन बाग के नाम पर राजनीतिक दल अपनी सरकार बनाने की जुगत में लगे हैं। जैसे-जैसे चुनाव की तारीख करीब आ रही है ठीक वैसे ही नेताओं के तेवरों के साथ ही मुद्दे भी बदल गए। पहले बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधाएं और विकास की बात हो रही थी लेकिन अब सिर्फ शाहीन बाग की। 

एक दल कह रहा है कि दूसरा दल चुनाव तक शाहीन बाग को खाली नहीं कराना चाहता वर्ना अभी तक वह खाली हो चुका हो जाता। तो दूसरा दल आरोप लगा रहा है कि मौजूदा सरकार शाहीन बाग के लोगों की हितौशी है वो टुकड़े-टुकड़े गैंग वालों के साथ खड़ी है।

इन बयानों से यह तो पता चलता है कि शाहीन बाग वह मुद्दा है जो दिल्ली में सरकार बनाएगा। अब विकास, बिजली, पानी, सस्ती शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं वाले मुद्दे पर चर्चा करके समय बर्बाद नहीं करना हैं। मोटे-मोटे शब्दों में कहें तो शाहीन बाग को लेकर भाजपा बेहद आक्रामक नजर आ रही है जबकि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने नरम रुख अपनाया है। 

इसे भी पढ़ें: दिल्ली का सुपर संडे, राजनीति के दो धुरंधर 2 फरवरी को करेंगे साझा रैली

क्या भाजपा शाहीन बाग को अहम मुद्दा मान रही है ?

हां, शाहीन बाग भाजपा के लिए सबसे अहम मुद्दा है। तभी तो भाजपा की बड़ी लीडरशिप इस मामले को बार-बार उठा रही है और यह बताना चाह रही है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी इसके लिए जिम्मेदार है। लेकिन इस चुनावों में जो सबसे रोचक दृश्य दिखाई दिया वह था कि देश के गृह मंत्री दिल्ली की तंग गलियों में अपनी पार्टी के लिए वोट मांग रहे हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि गृह मंत्री द्वारा ऐसा किए जाने से नुकसान सीधेतौर पर आम आदमी पार्टी को होगा। क्योंकि 2015 में 70 में से 67 सीट जीतकर विधानसभा पहुंचने वाली आम आदमी पार्टी की सीटों में जो भी कमी आएगी उसे भाजपा पाटती हुई दिखाई देगी। लेकिन चुनावों को अपनी तरफ मोड़ने की कोशिशों पर कुछ भाजपा के नेता पानी फेरते हुए दिखाई दे रहे हैं।

भाजपा के कुछ नेता कैसे फेर रहे हैं पानी ?

सोमवार को चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने नारे लगवाए, जो आपत्तिजनक थे... उन्होंने नारा लगवाते हुए कहा कि आवाज इतनी तेज गूंजनी चाहिए कि यहां पर बैठे गिरिराज सिंह को सुनाई दे। दरअसल, नारा था कि देश के गद्दारों को गोली मारो *** को... हम यह बयान आपको पूरा नहीं सुना सकते हैं क्योंकि यह बेहद आपत्तिजनक है तभी तो चुनाव आयोग ने इस पर संज्ञान लिया है। 

इसे भी पढ़ें: विवादित बयान पर घिरे अनुराग ठाकुर को चुनाव आयोग ने किया तलब

दिल्ली के निर्वाचन अधिकारी ने रिठाला विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर से इस मामले में रिपोर्ट मांगी है। देखने लायक बात यह होगी कि चुनाव आयोग इस नारे को लेकर क्या कार्रवाई करता है। लेकिन आप लोगों ने कभी सोचा है कि गद्दारों को गोली मारने का हक किसे होता है। देश के भीतर या बाहर कथित तौर पर कोई घटना घटती है तब सुरक्षाकर्मियों द्वारा कार्रवाई की जाती है। जबकि दूसरे तौर पर इसके लिए अदालतें हैं जो मामले की सुनवाई करती हैं गद्दार पाए जाने पर सजा देती हैं। ऐसे में जनता के समक्ष इस तरह के नारे लगवाना बेहद शर्मनाक है। अगर कोई गद्दार है तो उसे कानूनन सजा मिलनी चाहिए और यही हमारे यहा की कानून व्यवस्था भी कहती है।

वैसे जब बयानबाजी होती है तो उसकी आवाज दूर तलक तक जाती है। तभी तो कपिल सिब्बल ने चुटकी लेते हुए एक ट्वीट कर दिया और इंदिरा गांधी के जमाने को याद किया। नारे का जिक्र करते हुए सिब्बल ने कहा कि एक तरफ वो हैं जो शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। दूसरी तरफ वो हैं जो उनकी अवाज बंद करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। हम असली गद्दारों को आसानी से पहचान सकते हैं...

इसे भी पढ़ें: दिल्ली में 672 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे 1.47 करोड़ मतदाता

तो क्या किसी और ने भी कुछ कहा ?

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहेब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा जो पश्चिमी दिल्ली से सांसद हैं... उन्होंने भी विवादित टिप्पणी की है। इतनी ज्यादा की आप सोच भी नहीं सकते हैं। प्रवेश वर्मा ने सीधेतौर पर शाहीन बाग का जिक्र करते हुए कहा कि शाहीन बाग में लाखों लोग जमा हैं। दिल्ली की जनता को सोच-विचारकर ही फैसला लेना चाहिए। वे आपके घरों में घुस जाएंगे, आपकी मांओं-बहनों से दुष्कर्म करेंगे और उन्हें मार देंगे। आज जो दौर है, उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह आपको भविष्य में बचाने नहीं आएंगे। इसके लिए दिल्ली की जनता को जागना होगा।

इस बयान के बाद कई तरह के सवाल खड़े होते हैं कि क्या शाहीन बाग में बैठे लोग अपराधी हैं ? क्या वो संविधान की बात सिर्फ दिखावे के लिए करते हैं जबकि उनका असल राज तो प्रवेश वर्मा ने खोला ? और क्या शाहीन बाग में बैठे प्रदर्शनकारियों ने अपनी रणनीति बनाते समय प्रवेश वर्मा को इसकी जानकारी दी थी ? अगर नहीं तो फिर जनाब ऐसी विवादित टिप्पणियां क्यों की जाती हैं...

इसे भी पढ़ें: अनुराग ठाकुर के बयान पर बोले चिदंबरम, चुनाव आयोग नींद से कब जागेगा ?

अभी क्या चल रहा है दिल्ली में ?

शाहीन बाग को मुद्दा बनता देख दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को भी इस मामले में बोलना पड़ा। क्योंकि अभी तक वह इस मामले पर कुछ बोलने से कतरा रहे थे। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसा उन्होंने वोट बैंक को साधने के प्रयास में किया था क्योंकि वह शाहीन बाग मामले से जिनता दूर होंगे उतना ही ज्यादा समर्थन शाहीन बाग जाम द्वारा परेशान लोगों का उन्हें मिलेगा। लेकिन सीधे-तौर पर आरोप लगता देख केजरीवाल को भी अपनी चुप्पी तोड़नी पड़ी। हालांकि सच कौन बोल रहा है यह पता लगाना बेहद मुश्किल है इसके लिए तो चुनाव नतीजों का ही इंतजार करना पड़ेगा जब यह पता चलेगा कि क्या सच में चुनाव के बाद शाहीन बाग में बैठे प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया गया या फिर बैठे हैं ?

वैसे क्या कहता है दिल्ली का गणित ? 

दिल्ली का गणित तो तीन नंबर को महत्वपूर्ण मानता है। अब आप इतिहास के पन्नों को ही पलट लो। दिल्ली में जब पहली बार भाजपा की सरकार बनी थी मने 1993 में उस वक्त तीन मुख्यमंत्री बने थे। मदनलाल खुराना, साहिब सिंह वर्मा और सुषमा स्वराज। फिर 1998 में कांग्रेस जीती थी उस वक्त मुख्यमंत्री तो शीला दीक्षित ही थी और कांग्रेस के पास उनकी बराबरी का या फिर शीला दीक्षित से ज्यादा कद वाला नेता नहीं था तभी तो 3 बार वह मुख्यमंत्री बनी। फिर 2013 में चुनाव हुए पहली बार आम आदमी पार्टी की सरकार बनी। हालांकि यह सरकार 49 दिन ही चली थी। फिर 2015 में चुनाव हुए और आम आदमी पार्टी ने सरकार बनाई और केजरीवाल दूसरी बार मुख्यमंत्री बने। अब देखना यह है कि क्या इतिहास दोहराता है यानी कि नंबर तीन का चलन एक बार फिर से दिखाई देता है। हालांकि यह तो 11 फरवरी को ही स्पष्ट हो पाएगा कि 3 बार अरविंद केजरीवाल दिल्ली के मुख्यमंत्री बनते हैं या नहीं।