America में 'पालक पनीर' की कीमत 1.8 करोड़! Indian Students ने University से जीती भेदभाव की जंग

Palak Paneer Row
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एकता । Jan 14 2026 5:32PM

अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी में पालक पनीर गर्म करने पर हुए विवाद के बाद, दो भारतीय छात्रों को भेदभाव के खिलाफ कानूनी लड़ाई में जीत मिली है। यूनिवर्सिटी ने आरोपों से इनकार करते हुए भी छात्रों को 1.8 करोड़ रुपये का मुआवजा और मास्टर डिग्री देने पर सहमति जताई है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो बोल्डर दो भारतीय छात्रों को करीब 1.8 करोड़ रुपये ($200,000) का हर्जाना देगी। यह विवाद तब शुरू हुआ जब इन छात्रों को यूनिवर्सिटी के माइक्रोवेव में अपना खाना (पालक पनीर) गर्म करने से रोका गया था।

क्या था पूरा मामला?

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना सितंबर 2023 की है। भारतीय पीएचडी छात्र आदित्य प्रकाश अपना लंच गर्म कर रहे थे, तभी एक स्टाफ मेंबर ने खाने की 'तेज गंध' की शिकायत की और उन्हें वहां खाना गर्म करने से मना कर दिया। आदित्य ने जवाब दिया, 'यह सिर्फ खाना है, मैं इसे गर्म करके चला जाऊंगा।'

इसके बाद विवाद बढ़ गया। आदित्य और उनकी साथी उर्मी भट्टाचार्य ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ भेदभाव का केस दर्ज कराया। उनके मुख्य आरोप थे कि डिपार्टमेंट के नियम सिर्फ दक्षिण एशियाई छात्रों के लिए बनाए गए थे, ताकि वे अपना खाना न खोल सकें।

जब आदित्य ने आवाज उठाई, तो उन पर स्टाफ को 'असुरक्षित महसूस कराने' का आरोप लगाया गया। उर्मी को बिना किसी ठोस कारण के उनकी टीचिंग असिस्टेंट की नौकरी से निकाल दिया गया। छात्रों का कहना है कि दो दिन तक भारतीय खाना खाने पर उन पर 'दंगा भड़काने' जैसा गंभीर आरोप तक लगाया गया।

समझौता

दो साल की कानूनी लड़ाई के बाद, सितंबर 2025 में यूनिवर्सिटी समझौता करने पर राजी हो गई। समझौते की शर्तें के अनुसार, दोनों छात्रों को कुल 1.8 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। उन्हें उनकी मास्टर डिग्री प्रदान की जाएगी। हालांकि, वे भविष्य में इस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई या नौकरी नहीं कर पाएंगे।

उर्मी ने कहा, मैं अन्याय के आगे नहीं झुकूंगी

भारत लौटने के बाद उर्मी भट्टाचार्य ने अपनी आपबीती साझा की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अपनी पसंद का खाना खाने और अपनी पहचान के साथ जीने की आज़ादी के लिए थी। उन्होंने बताया कि इस तनाव की वजह से उनकी सेहत और आत्मविश्वास पर बहुत बुरा असर पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

दूसरी ओर, यूनिवर्सिटी ने पैसे देने की बात तो मानी है, लेकिन किसी भी तरह के भेदभाव की जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने नियमों के मुताबिक ही काम किया था।

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