भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल विवाद की क्या है असली कहानी जानिए यहां?

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल विवाद की क्या है असली कहानी जानिए यहां?

पश्चिम बंगाल के करीब 25 फ़ीसदी आबादी तीस्ता नदी के जल का उपभोग करती है वहीं सिक्किम कि करीब 2 फ़ीसदी आबादी तीस्ता नदी के जल पर निर्भर है लेकिन बांग्लादेश का एक बड़ा हिस्सा तीस्ता नदी के जल का घरेलू और कृषि सिंचाई में तीस्ता नदी के जल का इस्तेमाल करता है।

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी का जल विवाद काफी समय से चल रहा है लेकिन इसकी असली वजह और इसका इतिहास क्या कहता है यह जानना बेहद जरूरी है आपको बता दें कि साउथ एशिया की सबसे बड़ी नदियों में से एक तीस्ता नदी की करीबन 413 किलोमीटर लम्बाई है।  

तीस्ता नदी भारत में लगभग 295 किलोमीटर के दायरे में बहती है, जिसमें 142 किलोमीटर पश्चिम बंगाल में वहीं 150 किलोमीटर के क्षेत्र में सिक्किम राज्य में बहती है। बांग्लादेश में तीस्ता नदी करीब 120 किलोमीटर के क्षेत्र में बहती है, जबकि तीस्ता नदी का प्रवाह भारत से बांग्लादेश की ओर है। तीस्ता नदी बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र नदी में जाकर मिल जाती है।

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तीस्ता नदी जल विवाद की क्या वजह है? 

क्योंकि तीस्ता नदी सिक्किम के ग्लेशियर से बनने वाले तालाब से निकलकर पश्चिम बंगाल के इलाकों से होते हुए बांग्लादेश पहुंचती है, ऐसे में विवाद की असली वजह है पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति का नहीं होना है। 

दोनों देशों के बीच यह जल विवाद तब और अधिक बढ़ जाता है जब कम बारिश होती है या ऐसे मौसमों में जब बारिश बिल्कुल नहीं होती है। तीस्ता और उसकी सहायक नदियां हमेशा बारिश पर निर्भर रहती हैं, ऐसे में जब भी बरसात बंद होती है तो पानी की मात्रा में घट-बढ़ होती रहती है। मानसून के दिनों में अच्छी बारिश होने पर तीस्ता नदी में बाढ़ के हालात भी बन जाते हैं।

बांग्लादेश तीस्ता नदी पर विवाद क्यों खड़ा करता है?

आंखों के जरिए समझें तो भारत और पश्चिम बंगाल के वह लोग जो तीस्ता नदी पर निर्भर करते हैं और घरेलू और कृषि संबंधी कार्यों के लिए तीस्ता नदी के जल का इस्तेमाल करते हैं, उनकी संख्या करोड़ों में है।

पश्चिम बंगाल के करीब 25 फ़ीसदी आबादी तीस्ता नदी के जल का उपभोग करती है वहीं सिक्किम कि करीब 2 फ़ीसदी आबादी तीस्ता नदी के जल पर निर्भर है लेकिन बांग्लादेश का एक बड़ा हिस्सा तीस्ता नदी के जल का घरेलू और कृषि सिंचाई में तीस्ता नदी के जल का इस्तेमाल करता है। बांग्लादेशी करीब 20 फ़ीसदी से अधिक आबादी तीस्ता नदी पर निर्भर है।

बांग्लादेश की आजादी के 12 साल बाद साल 1983 में भारत और बांग्लादेश के बीच एक समझौता हुआ जिसमें इस समझौते में यह करार किया गया कि तीस्ता नदी के जल का 36 प्रतिशत हिस्सा बांग्लादेश अपने इस्तेमाल लाएगा, जबकि बाकी 64 फीसदी जल का उपयोग भारत करेगा। लेकिन इस समझौते से बांग्लादेश पिछले 20 सालों से खुश नहीं है और पिछले समझौते पर पुनर्विचार को लेकर अड़ा हुआ है।

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कांग्रेस सरकार में तीस्ता नदी विवाद पर समझौता क्यों नहीं हुआ?

लगातार तीस्ता नदी के विवाद पर बांग्लादेश खड़ा हुआ था ऐसे में एक वक्त कांग्रेस की सरकार में आया जब यह समझौता हो सकता था वह वक्त था साल 2011 का जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ढाका गए थे लेकिन यह विवाद पश्चिम बंगाल कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की वजह से अधर में लटक गया। पश्चिम बंगाल सरकार का तीस्ता नदी जल विवाद को लेकर अपना पक्ष था, जिसमें कहा गया कि बरसात के मौसम से इधर दिसंबर से लेकर मार्च तक नदी में इतना पर्याप्त पानी नहीं होता कि बांग्लादेश को 25 फ़ीसदी से अधिक पानी दिया जा सके।

2015 में प्रधानमंत्री मोदी के बांग्लादेश दौरे पर क्यों नहीं सुलझा तीस्ता नदी विवाद?

साल 2015 में जून महीने में प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश की राजधानी ढाका का दो दिवसीय दौरा किया लेकिन तीस्ता नदी का विवाद इस बार भी इसलिए नहीं सुलझ सका, क्योंकि पश्चिम बंगाल की सरकार का रुख इस विवाद को सुलझाने का नहीं रहा। जिसकी वजह से प्रधानमंत्री मोदी के एजेंडे में इस समझौते से लेकर किसी भी तरह की बात शामिल नहीं की गई। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मोदी से मुलाकात के बाद इस बात की पुष्टि की थी कि जितनी बातें हुई सभी सार्थक रहीं। लेकिन तीस्ता नदी के पानी को लेकर बंटवारे की बात और समझौता ना हो पाने से झटका जरूर लगा है। प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के बाद बांग्लादेशी लोगों में इस समझौते के न हो पाने से खासा गुस्सा रहा। 

2019 में तीस्ता जल विवाद में समझौता न होने का कारण?

अक्टूबर 2019 में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जब चार दिवसीय दौरे पर भारत आए और 5 अक्टूबर को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की तब यह कयास लगाए जा रहे थे कि इस बार तीस्ता नदी के जल विवाद को लेकर भी समझौता हो सकता है लेकिन एक बार फिर इस मुद्दे पर दोनों देशों के मुखिया के बीच कोई बातचीत नहीं हुई।

भारत और बांग्लादेश 54 नदियों के जल को समझौते के हिसाब से आदान प्रदान करते हैं जिसके लिए बाकायदा संयुक्त नदी आयोग भारत और बांग्लादेश की सरकार द्वारा बनाया गया है। 1972 में संयुक्त नदी आयोग की स्थापना किस उद्देश्य से की गई थी ताकि दोनों देशों के मध्य बहने वाली नदियों के जल के बंटवारे को लेकर आपसी सहमत से समझौते किए जा सकें। जब भी भारत और बांग्लादेश के बीच नदियों को लेकर समझौते होते हैं, उसमें संयुक्त नदी आयोग में दोनों देशों के जल संसाधन मंत्री शामिल होते हैं और समझौते को अंजाम दिया जाता है।

बरसात के मौसम में तीस्ता नदी से होने वाली समस्या

तीस्ता नदी पर समझौते के अनुसार फिलहाल जो पानी दिया जा रहा है उस पर बात नहीं बन रही है यह एक अलग पहलू है। लेकिन बरसात के मौसम में यह समझौता भी काम नहीं आता और बरसात के मौसम में पश्चिम बंगाल की तरफ से बांग्लादेश की ओर मजबूरन पश्चिम बंगाल के इलाकों को बाढ़ से बचाने के लिए तीस्ता नदी का पानी छोड़ना पड़ता है।

- शुभम यादव