सोचिये तिरंगे पर हो रही राजनीति से देशभक्तों के दिल पर क्या गुजर रही होगी?

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ANI
भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर मनाए जा रहे ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम के तहत केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने सभी दलों के सांसदों के लिए लाल किले से विजय चौक तक तिरंगा बाइक रैली का आयोजन किया।

तिरंगे में 135 करोड़ से ज्यादा की आबादी को एकजुट रखने की अपार शक्ति है लेकिन जब तिरंगे को लेकर ही राजनीति होने लगे तो यह दुखद है। सरकार की ओर से आयोजित सामूहिक तिरंगा यात्रा का बहिष्कार क्या तिरंगे का अपमान नहीं है? और तो और यदि किसी पार्टी का सांसद यह मांग कर दे कि तिरंगा फहराना अनिवार्य नहीं होना चाहिए तो सोचिये देशभक्तों के दिल पर क्या गुजरती होगी। लेकिन राजनीति है जो हर चीज में होती है। पहले देश और फिर पार्टी होनी चाहिए लेकिन लगता है कि कुछ लोगों के लिए पहले पार्टी और फिर देश है।

भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर मनाए जा रहे ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम के तहत केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने सभी दलों के सांसदों के लिए लाल किले से विजय चौक तक तिरंगा बाइक रैली का आयोजन किया। सरकार की ओर से इस संबंध में सभी दलों को निमंत्रण भी दिया गया। उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने बुधवार सुबह 'हर घर तिरंगा' बाइक रैली को झंडी दिखाकर रवाना किया। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम किसी पार्टी का आयोजन नहीं था लेकिन फिर भी इसमें विपक्ष के सांसदों ने हिस्सा नहीं लिया। विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों और भाजपा तथा एनडीए के सांसदों की ही इस तिरंगा बाइक यात्रा में भागीदारी दिखी।

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सरकार का कहना है कि तिरंगा रैली में हमने सभी को बुलाया था लेकिन फिर भी विपक्ष नहीं आए तो हम कुछ नहीं कह सकते तो वहीं विपक्ष का कहना है कि हम अपना कार्यक्रम करेंगे, हम भाजपा के पॉलिटिकल एजेंडा में कैसे शामिल हों। वहीं इस बाइक रैली में भाग लेने वाले सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों का जोश देखने लायक रहा। हाथ में तिरंगा लिये और भारत माता की जय का नारा बुलंद करते हुए कई केंद्रीय मंत्री बाइक के पीछे बैठे नजर आये तो वहीं कई केंद्रीय मंत्री बाइक या स्कूटी चलाते नजर आये।

यह तो हुई तिरंगा फहराने को लेकर हो रही राजनीति की बात। सोशल मीडिया पर भी तिरंगे की डीपी लगाने को लेकर राजनीति जोरों पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में लोगों से अपने सोशल मीडिया अकाउंट की प्रोफाइल तस्वीर के रूप में ‘तिरंगा’ लगाने का आह्वान किया था। जिसके बाद भाजपा नेताओं और आम जनता ने अपनी डीपी तिरंगे वाली लगा ली। कांग्रेस के लोगों ने ऐसा नहीं किया तो उनसे सवाल पूछे गये। अब कांग्रेस नेताओं ने बीच का रास्ता निकालते हुए अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल पर देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की हाथ में तिरंगा लिए तस्वीर डीपी के तौर पर लगाई है। इसके साथ ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आरएसएस पर निशाना साधते हुए यह सवाल भी किया है कि जिन्होंने अपने मुख्यालय पर आजादी के बाद 52 साल तक तिरंगा नहीं फहराया, क्या वे प्रधानमंत्री की बात मानेंगे?

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाथ में तिरंगा लिए नेहरू की तस्वीर वाली डीपी लगाने के बाद ट्वीट किया, ‘‘देश की शान है हमारा तिरंगा, हर हिंदुस्तानी के दिल में है, हमारा तिरंगा।’’ पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने इसी तस्वीर की डीपी लगाई और कहा, ‘‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा।’’ कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी डीपी के तौर पर यही तस्वीर लगाई गई है। पार्टी ने कहा, ‘‘तिरंगा हमारे दिल में है, लहू बनकर हमारी रगों में है। 31 दिसंबर, 1929 को पंडित नेहरू ने रावी नदी के तट पर तिरंगा फहराते हुए कहा था, ‘अब तिरंगा फहरा दिया है, ये झुकना नहीं चाहिए। आइए हम सब देश की अखंड एकता का संदेश देने वाले इस तिरंगे को अपनी पहचान बनाएं। जय हिंद।’’ कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार प्रमुख पवन खेड़ा ने आरएसएस और इसके प्रमुख मोहन भागवत के ट्विटर प्रोफाइल के स्क्रीन शॉट साझा करते हुए कहा, ‘‘संघ वालों, अब तो तिरंगे को अपना लो।’’ 

वहीं विवादित बयान देने के लिए मशहूर समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्ररहमान की बात करें तो उन्होंने एक तो सरकार की ओर से आयोजित तिरंगा यात्रा में भाग नहीं लिया। दूसरा इससे संबंधित सवाल पूछे जाने पर मांग कर डाली कि तिरंगा लहराना अनिवार्य नहीं होना चाहिए।

-नीरज कुमार दुबे

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