• सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने का पर्व है मकर संक्रांति

खुशियों का यह त्योहार हर राज्य में अलग तरह से मानते हैं कहीं पर तिल गुड़ के लड्डुओं से पूजा करके तो कहीं उड़द की दाल की खिचड़ी बनाकर और दान देकर मनाते हैं। साउथ में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में मानते हैं।

दान-पुण्य का महापर्व मकर संक्रांति इस साल 15 जनवरी को मनाया जाएगा वैसे तो हर साल लोहड़ी 13 जनवरी को मनाई जाती है और मकर संक्रांति 14 जनवरी को लेकिन इसबार सूर्यदेव मकर राशी में 15 जनवरी को प्रवेश करेंगे इसलिए सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण होने का पर्व संक्रांति 15 जनवरी को मनाया जायेगा। और इसके साथ ही धनु मलमास ख़त्म हो जायेगा और मांगलिक कार्यों जैसे मुंडन, विवाह तथा गृह प्रवेश जैसे कार्यों का प्रयोजन शुरू हो जायेगा।

मकर संक्रांति का राशि पर प्रभाव-

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का सभी राशियों पर कुछ न कुछ असर जरुर पड़ेगा, यानी किसी राशि पर अच्छा प्रभाव तो किसी राशि पर बुरा प्रभाव, मेष राशि को धन लाभ होगा, वृषभ राशि के जातकों का मान सम्मान बढ़ेगा, मिथुन राशि को विजय मिलेगी, कर्क राशि के जातकों का खर्चा बढेगा, सिंह राशि वालों का भाग्य उदय होगा, कन्या राशि को प्रॉपर्टी लाभ है, तुला को धन लाभ होगा, वृश्चिक राशि के जातकों को विवाद का सामना करना पड़ सकता है, धनु राशि के जातकों के प्रमोशन के चांसेस हैं, मकर और कुम्भ राशि वालों को यश कीर्ति मिलेगी, मीन राशि के जातकों को रोग पीड़ा का सामना करना पड़ सकता है।

इसे भी पढ़ें: संतान की सलामती के लिए करें सकट चौथ व्रत, इस तरह पूजन से सब कष्ट दूर होंगे

मकर संक्रांति का पुण्यकाल-

इस बार मकर संक्रांति का शुभ मुहूर्त यानी महापुण्य काल सुबह 07:19 से 09:03 बजे तक और पुण्यकाल सुबह 07:19 से लेकर दोपहर 12:31 तक है। ज्योतिष के अनुसार मकर संक्रांति के दिन दिए गये दान का करोड़ों गुना फल मिलता है। इस दिन शनि देव की प्रिय चीजें जैसे तिल या तिल से बनीं चीजों का दान करना चाहिए, ऐसा करने से सूर्यदेव की कृपा आप पर अवश्य बरसेगी साथ ही शनिदेव जी भी आप पर अपनी दृष्टि बनाये रखेंगे।

मकर संक्रांति पर आपने देखा होगा की पूरा आसमान रंग बिरंगी पतंगों से भर जाता है खासकर उत्तर भारत में लेकिन क्या आपने सोचा है ऐसा क्यों किया जाता है, दरअसल इसके पीछे एक वैज्ञानिक कारण होता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं जिसकी वजह से सूर्य से निकलने वाली किरणें इस सर्दी के मौसम में खांसी तथा जुखाम से बचाने के लिए रामबाण होती हैं। यही वजह है की इसदिन पतंग उड़ाने की परंपरा है जिससे इन्सान थोड़ी डेर तक सीधे सूर्य के संपर्क में रहता है।

इसे भी पढ़ें: Lohri 2020: लोहड़ी क्या है, लोहड़ी कैसे मनायी जाती है, लोहड़ी के गीत का अर्थ क्या है

मकर संक्रांति की पूजा विधि-

अब जानते हैं मकर संक्रांति की पूजा विधि के बारे में, सुबह पुण्य काल मुहूर्त में ये पूजा घर की महिला करती है। सबसे पहले एक थाली में कुछ पैसे और सफ़ेद तथा काले तिल के लड्डू रखे जाते हैं। साथ ही थाली में अक्षत और रोली भी रख लें, अब आपकी थाली तैयार है जिसे हम बयाना कहते हैं। अब पूजा करने वाली महिला अपने माथे पर तिलक लगा ले और अपनी साड़ी या दुपट्टा से उसे चार बार बयाना की थाली के चारों तरफ घुमाएं। इसके बाद भगवान सूर्य देव की प्रार्थना करें और बायना की थाली अपनी सास को दे दें और अगर सास नहीं हैं तो पूजा घर में रख दें।

खुशियों का यह त्योहार हर राज्य में अलग तरह से मानते हैं कहीं पर तिल गुड़ के लड्डुओं से पूजा करके तो कहीं उड़द की दाल की खिचड़ी बनाकर और दान देकर मनाते हैं। साउथ में मकर संक्रांति को पोंगल के रूप में मानते हैं वहीँ पश्चिम बंगाल में इसे हार्वेस्ट त्योहार के रूप में मानते हैं। त्योहार कोई भी हो और कैसे भी मनाया जाये लेकिन त्योहार का एकमात्र उद्देश्य सबकी जिंदगी में खुशियाँ लाना होता है।

- अर्चना द्विवेदी