क्या है शरद पूर्णिमा के दिन अमृत बरसने का मतलब? जानें माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय

क्या है शरद पूर्णिमा के दिन अमृत बरसने का मतलब? जानें माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के उपाय

शरद पूर्णिमा के दिन चाँद 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर रातभर अमृत बरसाता है इसलिए शरद पूर्णिमा को रात में खीर बनाकर रातभर चाँदनी में रखने का रिवाज है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन धन की देवी माँ लक्ष्मी का धरती पर आगमन होता है। इस दिन माँ लक्ष्मी घर-घर जाती हैं और भक्तों को धन-वैभव का वरदान देती हैं।

हिन्दू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है।  हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाई जाती है। इस बार शरद पूर्णिमा 19 अक्टूबर को 7 बजे से शुरू होकर 20 अक्टूबर को 8 बजकर 20 मिनट पर समाप्त होगी। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन चाँद 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर रातभर अमृत बरसाता है इसलिए शरद पूर्णिमा को रात में खीर बनाकर रातभर चाँदनी में रखने का रिवाज है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन धन की देवी माँ लक्ष्मी का धरती पर आगमन होता है।  ऐसा माना जाता है कि इस दिन माँ लक्ष्मी घर-घर जाती हैं और भक्तों को धन-वैभव का वरदान देती हैं। शरद पूर्णिमा के दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं।

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क्या है शरद पूर्णिमा को रात में अमृत बरसने का मतलब?  

ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा को रात में आसमान से अमृत की वर्षा होती है। शरद पूर्णिमा को अमृत बरसने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा के प्रकाश में औषधिय गुण मौजूद रहते हैं जिनमें कई असाध्‍य रोगों को दूर करने की शक्ति होती है।वहीं, शरद पूर्णिमा को रात में छत पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने के पीछे वैज्ञानिक तथ्य यह है कि दूध में मौजूद लैक्टिक नाम का तत्व चन्द्रमा की किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। वहीं खीर में चावल होने के कारण यह प्रक्रिया आसान हो जाती है इसलिए चाँदनी में रखी दूध और चावल से बनी खीर का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा की रोशनी में रखी खीर खाने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और कई रोगों का नाश होता है।

शरद पूर्णिमा के दिन माँ लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए करें ये उपाय 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन माँ लक्ष्मी का जन्म हुआ था।  इस दिन रातभर जागरण करने के बाद सोने से पहले भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का नाम अवश्य लेना चाहिए।  शरद पूर्णिमा की रात को जागरण किया जाता है इसलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है। शरद पूर्णिमा की रात को खुले आसमान के नीचे खीर को रातभर चाँदनी में रखने के बाद प्रसाद में जरूर ग्रहण करना चाहिए।

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शरद पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से माँ लक्ष्मी का पूजन किया जाता है।  धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन लक्ष्मी पूजन करने से सभी कर्जों से मुक्ति मिलती हैं इसीलिए इसे कर्जमुक्ति पूर्णिमा भी कहते हैं। शरद पूर्णिमा की रात्रि को श्रीसूक्त का पाठ,कनकधारा स्तोत्र ,विष्णु सहस्त्र नाम का जाप और भगवान कृष्ण का मधुराष्टकं का पाठ करने से विशेष लाभ होता है।  

शरद पूर्णिमा को माता लक्ष्मी के स्वागत करने के लिए सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने के बाद माँ लक्ष्मी का पूजन करें।  पूजा में तुलसी को भोग, दीपक और जल अवश्य चढ़ाएं, ऐसा करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती है और आशीर्वाद देती हैं।  इसके अलावा शरद पूर्णिमा पर माता लक्ष्मी के मंत्र का जाप करने से माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।  

शरद पूर्णिमा की रात जब चन्द्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है, उस समय माँ लक्ष्मी का पूजन करने से धन लाभ होता है। शरद पूर्णिमा की रात में हनुमानजी के सामने चौमुखा दीपक जलाने से बजरंगबली की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

- प्रिया मिश्रा