Bangladesh Shakti Peeths: India ही नहीं, Bangladesh में भी हैं आस्था के 7 Divine Center, जानें इन शक्तिपीठों का पूरा रहस्य

Bangladesh Shakti Peeths
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क्या आप जानते हैं कि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी 7 शक्तिपीठ हैं। जोकि अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए दुनियाभर में फेमस हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बांग्लादेश में स्थित 7 शक्तिपीठों के बारे में बताने जा रहे हैं।

शुक्रवार का दिन मां दुर्गा को समर्पित है। इस दिन मां दुर्गा और उनके रूपों की भक्तिभाव से पूजा की जाती है। मां दुर्गा की पूजा करने से जातक को जीवन में सभी तरह के भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। वहीं जीवन में व्याप्त सभी तरह के संकटों से मुक्ति मिलती है। वहीं मां दुर्गा की पूजा से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। सनातन शास्त्रों में मां दुर्गा की महिमा का विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में भी 7 शक्तिपीठ हैं। जोकि अपनी धार्मिक मान्यताओं के लिए दुनियाभर में फेमस हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बांग्लादेश में स्थित 7 शक्तिपीठों के बारे में बताने जा रहे हैं।

जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ

यह शक्तिपीठ मां काली को समर्पित है। माना जाता है कि इस मंदिर का वास्तुकला 13वीं शताब्दी के समय की है। इस मंदिर की वास्तुकला में 13वीं सदी की झलक देखने को मिलती है। जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ बांग्लादेश के सतखिरा जिले में स्थित है। इस स्थान पर मां सती की हथेलियां गिरी थीं। देश के पीएम नरेंद्र मोदी ने जेसोरेश्वरी शक्तिपीठ मंदिर की यात्रा की थी।

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सुगंधा शक्तिपीठ

सुगंधा शक्तिपीठ मां तारा को समर्पित है। यह मंदिर सुगंधा नदी के तट पर स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि यहां पर मां सती की नाक गिरी थी। यह शक्तिपीठ बांग्लादेश के शिकारपुर में है और मंदिर के रक्षक भैरव हैं। बांग्लादेश के शिकारपुर में स्थिय यह शक्तिपीठ हिंदुओं के लिए प्रमुख तीर्थ स्थल है। इस मंदिर में स्थित प्रतिमाओं की कई बार चोरी हुई है।

चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ

चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ बांग्लादेश के चटगांव जिले में स्थित चट्टल मां भवानी शक्तिपीठ चंद्रनाथ पर्वत के शिखर पर स्थित है। यहां पर मां सती के ठुड्डी का अंश गिरा था। इस शक्तिपीठ को भवानी शक्तिपीठ भी कहा जाता है।

जयंती शक्तिपीठ

बांग्लादेश के सिलहट जिले में जयंती शक्तिपीठ है। यह शक्तिपीठ सिलहट जिले के बौरबाग गांव में है। धार्मिक मान्यता है कि चिर काल में जब सती के शव को भगवान विष्णु ने क्षत-विक्षित कर दिया था, तो मां सती की बाईं जांघ जयंती शक्तिपीठ में गिरी थी। भारत के मेघालय में भी नर्तियांग दुर्गा मंदिर मां सती को समर्पित है। जयंती मंदिर करीब 6 एकड़ में फैला है।

महालक्ष्मी शक्तिपीठ

बांग्लादेश के 7 शक्तिपीठ में से एक महालक्ष्मी शक्तिपीठ है। यह मंदिर बांग्लादेश सिलहट जिले में है और मंदिर का केंद्र स्थान जोड्नपुर गांव है। जोकि गोटाटिकर के पास है। यह मंदिर सुख और सौभाग्य की देवी महालक्ष्मी को समर्पित है। माना जाता है कि यहां पर मां सती की गर्दन यानी की ग्रावी गिरी थी। शुक्रवार के दिन महालक्ष्मी शक्तिपीठ में भक्तों की भारी भीड़ लगती है।

श्रावणी शक्तिपीठ

बांग्लादेश के चटगांव जिले में देवी मां सती को समर्पित श्रावणी शक्तिपीठ स्थित है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर मां सती की रीढ़ की हड्डी गिरी थी। यह मंदिर सत्या देवी को समर्पित है। श्रावणी मंदिर में भैरव देव भी विराजते हैं। जोकि निमिषवैभव के नाम से जाने जाते हैं। यह नाम कुमारी रेलवे स्टेशन का नाम कुमारी लिया गया है। यह मंदिर सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं बल्कि भारत के लिए आस्था का केंद्र है। 

अपर्णा शक्ति पीठ

बता दें कि बांग्लादेश के 7 शक्तिपीठ का अंतिम प्रमुख मंदिर अपर्णा शक्ति पीठ है। यह बांग्लादेश के शेरपुर जिले में स्थित है। अपर्णा शक्तिपीठ का प्रमुख केंद्र स्थल करतोया नदी के तट पर भवानीपुर गांव में है। यह मंदिर मां भवानी को समर्पित है। जिसको स्थानीय भाषा में अपर्णा कहा जाता है। श्रद्धालुजन मां अपर्णा की भक्तिभाव से पूजा करते हैं। शेरपुर से यह मंदिर 28 किमी दूर है। प्राकृतिक दृष्टिकोण से देखा जाएष तो अपर्णा शक्तिपीठ करतोया, यमुनेश्वरी और बूढ़ी तीस्ता के संगम स्थल पर है। यहां पर मां सती का बायां पैर गिरा था।

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