बंगाली फिल्म में सीता और हनुमान के लिए प्रयोग किए गए शब्दों पर CBFC सख्त, म्यूट करने का दिया आदेश

बंगाली फिल्म में सीता और हनुमान के लिए प्रयोग किए गए शब्दों पर CBFC सख्त, म्यूट करने का दिया आदेश
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फिल्म में सीता और हनुमान को निरूपित करने के लिए प्रयोग किए गए 'साइटी' और 'होनू' जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने आपत्ति जताई है। सीबीएफसी ने फिल्म 'आशारे गोप्पो' में इन शब्दों को म्यूट करने के लिए कहा है।

धार्मिक भावनाओं को लेकर फिल्मों पर आपत्ति का इतिहास बहुत पुराना है। अब क्रिएटिविटी के नाम पर कभी भगवान शिव का मजाक बनाया जाता है तो कभी भगवान को बबलगम (च्विंगम) खाते हुए दिखाया जाता है। लेकिन अब इसी क्रम में एक बंगाली फिल्म भी विवादों में आ गई है। राज्य सरकार के अधिकारी द्वारा निर्देशित और रुद्रनील घोष, पायल सरकार और अबीर चटर्जी द्वारा अभिनीत फिल्म विवाद विवादों में है। फिल्म में सीता और हनुमान को निरूपित करने के लिए प्रयोग किए गए 'साइटी' और 'होनू' जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय ने आपत्ति जताई है। सीबीएफसी ने फिल्म 'आशारे गोप्पो' में इन शब्दों को म्यूट करने के लिए कहा है।

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मौखिक सुनवाई का हिस्सा रहे सीबीएफसी सलाहकार पैनल के सदस्य पार्थ सारथी चौधरी के अनुसार फिल्म यू/ए प्रमाणन के लिए सिफारिशें की गई थीं। शब्दों का इस्तेमाल “अपमानजनक” संदर्भ में किया गया था। लेकिन फिल्म के सीन पर कैंची चलने को लेकर निर्देशक अरिंदम चक्रवर्ती ने नाराजगी जताते हुए सीबीएफसी को "हास्यास्पद" करार दिया। इसके साथ ही फिल्म के अभिनेता रुद्रनिल ने कहा  कि सीबीएफसी के लोग फिल्म को प्रमाणित करते समय हमेशा अपने व्यक्तिगत विचार थोपते है। रुद्रनिल और पायल दोनों ने भाजपा के टिकट पर 2021 का बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ा था लेकिन जीतने में सफलता नहीं हासिल कर पाए थे।  

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चौधरी ने कहा कि सीबीएफसी ने 'होनू' और 'एमी साइटी' शब्दों को म्यूट करने की सिफारिश की क्योंकि वे दिशानिर्देश 2 (XII) का उल्लंघन करते हुए पाए गए। सिफारिश में कहा गया है कि बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि नस्लीय, धार्मिक या अन्य समूहों की अवमानना ​​​​करने वाले दृश्य या शब्द प्रस्तुत नहीं किए जा सकते। हमें यह दृश्य हिंदू देवी सीता और भगवान हनुमान के प्रति बेहद अपमानजनक लगा। जिम्मेदार पैनल सदस्यों के रूप में, हमने सिनेमैटोग्राफ अधिनियम को ध्यान में रखते हुए काम किया।