BIS ने Gold और Silver Jewellery के लिए Hallmarking Fee बदली, प्रति गहना नई दरें लागू

Gold Price
प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Sep 16 2026 7:30PM

भारतीय मानक ब्यूरो ने त्योहारों से पहले सोने और चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग फीस में संशोधन किया है। नई व्यवस्था के तहत सोने पर 75 रुपये और चांदी पर 35 रुपये प्रति गहना शुल्क तय हुआ है। इसके अलावा प्रति खेप न्यूनतम शुल्क और कर अलग से देय होगा।

त्योहारों का सीजन करीब आते ही सोने-चांदी की खरीदारी बढ़ने लगती है। इसी बीच भारतीय मानक ब्यूरो ने सोने और चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग से जुड़ी फीस में बदलाव किया है। नई व्यवस्था 14 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना के साथ लागू हो गई है। इसका असर ज्वेलर्स के खर्च और आने वाले दिनों में गहनों की कीमतों पर दिख सकता है।

त्योहारों का मौसम शुरू होने वाला है और इसी समय सोने-चांदी की खरीदारी भी बढ़ जाती है। ऐसे में भारतीय मानक ब्यूरो यानी बीआईएस ने सोने और चांदी के गहनों की हॉलमार्किंग फीस में बदलाव किया है। नई दरें 14 सितंबर 2026 को सरकारी राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने के साथ लागू हो गई हैं। इसका सीधा संबंध ज्वेलर्स के खर्च और गहनों की अंतिम कीमत से है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, संशोधित भारतीय मानक ब्यूरो हॉलमार्किंग नियम, 2026 के तहत मान्यता प्राप्त जांच और हॉलमार्क केंद्रों में सोने के गहने जमा कराने वाले ज्वेलर्स को अब हर गहने के लिए 75 रुपये हॉलमार्किंग फीस देनी होगी। हालांकि, एक बार में जमा किए जाने वाले सामान पर कम से कम 200 रुपये का शुल्क तय किया गया है। यानी कम संख्या में गहने जमा कराने पर भी न्यूनतम शुल्क देना होगा।

चांदी के गहनों के लिए फीस 35 रुपये प्रति गहना रखी गई है। चांदी के सामान की एक खेप के लिए न्यूनतम शुल्क 150 रुपये होगा। इसके अलावा जांच और हॉलमार्क केंद्र बीआईएस की ओर से अलग से कुछ शुल्क वसूलेंगे। सोने के गहनों के लिए यह रकम 7.50 रुपये प्रति गहना होगी, जबकि एक खेप पर कम से कम 20 रुपये लिए जाएंगे।

चांदी के गहनों के मामले में बीआईएस की ओर से लिया जाने वाला शुल्क 3.50 रुपये प्रति गहना तय किया गया है। एक खेप पर इसका न्यूनतम शुल्क 15 रुपये होगा। इन सभी शुल्कों पर लागू कर अलग से देना होगा।

गौरतलब है कि हॉलमार्किंग का इस्तेमाल सोने और चांदी की शुद्धता की पहचान के लिए किया जाता है। हॉलमार्क वाले गहने पर आम तौर पर बीआईएस का निशान, सोने की शुद्धता या कैरेट की जानकारी और छह अंकों का विशिष्ट पहचान नंबर दर्ज होता है। इसे एचयूआईडी नंबर कहा जाता है। इससे ग्राहक खरीदे जा रहे गहने की शुद्धता को लेकर ज्यादा जानकारी हासिल कर सकता है।

सोने की शुद्धता के हिसाब से गहने 22 कैरेट, 24 कैरेट और दूसरी श्रेणियों में मिलते हैं। हॉलमार्किंग का मकसद गहने में इस्तेमाल धातु की शुद्धता के बारे में एक तय मानक उपलब्ध कराना है। इसलिए गहना खरीदते समय हॉलमार्क और विशिष्ट पहचान नंबर की जांच करना ग्राहकों के लिए उपयोगी रहता है।

इस बदलाव का समय भी खास है। सितंबर का महीना आमतौर पर त्योहारों से पहले खरीदारी की तैयारी का समय माना जाता है। इसके बाद नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आते हैं। त्योहारों के बाद शादी का मौसम शुरू होता है, जिसमें सोने और चांदी के गहनों की मांग बढ़ती है।

बता दें कि गहनों की कीमत सिर्फ सोने या चांदी के बाजार भाव से तय नहीं होती है। इसमें बनाने का खर्च, हॉलमार्किंग, कर और दूसरी लागत भी शामिल हो सकती हैं। इसलिए नई हॉलमार्किंग फीस लागू होने के बाद ग्राहकों के लिए अंतिम बिल को समझना और अलग-अलग दुकानों की कीमत की तुलना करना जरूरी होगा।

इस बीच इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन यानी आईबीजेए के अनुसार, 16 सितंबर की सुबह सोने की कीमत 24 कैरेट शुद्ध सोने के लिए 1,51,894 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। बाजार भाव लगातार बदलता रहता है, इसलिए खरीदारी के समय ताजा दर की जानकारी लेना जरूरी है।

सोने और चांदी की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए हॉलमार्किंग फीस अकेली लागत नहीं है। गहने की कीमत तय करते समय बाजार भाव, शुद्धता, बनाने का खर्च और कर समेत पूरी कीमत देखना ज्यादा जरूरी है। आने वाले त्योहारों और शादी के मौसम में ज्वेलर्स और खरीदार दोनों के लिए नई फीस व्यवस्था को समझना अहम रहने वाला है।

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