Delhi की electricity subsidy में बिना खपत बांटे 42.26 करोड़ रुपये, CAG report में उजागर हुई खामी

Cag Report
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दिल्ली विधानसभा में पेश की गई कैग रिपोर्ट में वर्ष 2019-20 से 2022-23 के बीच दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना में कई खामियां उजागर की गई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शून्य बिजली खपत वाले कनेक्शनों को भी 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई, जबकि अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिला। इसके अलावा, कैग ने बापोरोला में 81.42 एकड़ जमीन का 17 वर्षों तक उपयोग न होने पर भी सवाल खड़े किए हैं।

नयी दिल्ली, सात अगस्त नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने 2019-20 से 2022-23 के बीच दिल्ली सरकार की बिजली सब्सिडी योजना में कई खामियां उजागर करते हुए कहा है कि बिना बिजली खपत वाले कनेक्शनों को भी 42.26 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को विधानसभा में कैग रिपोर्ट पेश किया। इसके मुताबिक, कम बिजली खपत वाले उपभोक्ताओं को कम सब्सिडी मिली, जबकि अधिक खपत करने वालों को कहीं ज्यादा सब्सिडी दी गई।

कैग रिपोर्ट कहती है कि शून्य से 200 यूनिट तक खपत वाले 30 लाख से अधिक उपभोक्ताओं को औसतन 6,000 रुपये सालाना सब्सिडी मिली जबकि 201-400 यूनिट खपत वाले 16.6 लाख उपभोक्ताओं को 10,000 रुपये से अधिक यानी करीब 70 प्रतिशत ज्यादा सब्सिडी दी गई। इस तरह उच्च खपत वालों को अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिला। इसके अलावा, बिजली पर दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ जरूरतमंदों एवं वंचितों तक ही सीमित नहीं रहा और लगभग पूरे घरेलू उपभोक्ता वर्ग को इसका लाभ मिला।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कई उपभोक्ताओं ने लगातार कई बिलिंग चक्रों तक शून्य खपत के बावजूद सब्सिडी का लाभ लिया। दिल्ली सरकार ने अगस्त 2019 में यह योजना शुरू की थी, जिसमें 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त और 201-400 यूनिट पर 50 प्रतिशत सब्सिडी (अधिकतम 800 रुपये) दी जाती है। सब्सिडी खर्च 2019-20 के 2,405.59 करोड़ रुपये से बढ़कर 2022-23 में 3,161 करोड़ रुपये हो गया।

कैग ने अपनी रिपोर्ट में पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने और उपभोक्ता डेटा की नियमित जांच की सिफारिश की है, ताकि सब्सिडी सही लोगों तक पहुंचे और दुरुपयोग रोका जा सके। इसके साथ ही कैग ने दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (डीएसआईआईडीसी) की बापरोला में मौजूद 81.42 एकड़ जमीन 17 साल तक उपयोग में नहीं लाए जाने पर भी सवाल उठाए हैं। कैग रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2006 में जेम्स एंड ज्वेलरी पार्क के लिए ली गई जमीन पर बार-बार योजना बदलने से 29.45 करोड़ रुपये का खर्च बेकार गया।

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