CAG के संजय मूर्ति बोले, Kolkata सम्मेलन में जन अपेक्षाओं से SAIs की जिम्मेदारी बढ़ी

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भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) संजय मूर्ति ने कोलकाता में अनुवर्ती लेखापरीक्षा पर इनटोसाई कार्य समूह के दो दिवसीय सम्मेलन का संबोधन किया। उन्होंने कहा कि डिजिटल और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में नागरिकों की बढ़ती पारदर्शिता की अपेक्षाओं के कारण सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थानों की भूमिका बढ़ी है। इस बैठक में वर्ष 2026 की कार्य योजना की समीक्षा और ऑडिट के वास्तविक प्रभाव को मापने पर चर्चा हो रही है।

नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) के संजय मूर्ति ने सोमवार को कहा कि सरकारें तेजी से जटिल होते माहौल में काम कर रही हैं और नागरिक अधिक पारदर्शिता की अपेक्षा कर रहे हैं, ऐसे में सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थानों (एसएआई) की भूमिका भी बढ़ गई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) यहां शुरू हुए अनुवर्ती लेखापरीक्षा पर इनटोसाई कार्य समूह के दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। वर्ष 2025 में पेनांग (मलेशिया) में हुई पहली बैठक की प्रगति को आगे बढ़ाते हुए इस दूसरी बैठक में 2026 की कार्य योजना की समीक्षा करने और मौद्रिक तथा पर्यावरणीय परिणामों से लेकर डिजिटल तथा भ्रष्टाचार विरोधी परिणामों तक वास्तविक ऑडिट प्रभाव को मापने पर चर्चा हो रही है।

मूर्ति ने कहा कि आज सरकारें डिजिटल परिवर्तन, जलवायु परिवर्तन, कृत्रिम मेधा (एआई) और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति से आकार लेने वाले एक तेजी से जटिल होते माहौल में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि साथ ही, नागरिक अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक सेवाओं के प्रभावी वितरण की अपेक्षा करते हैं। कैग ने कहा, ‘‘इस बदलते परिदृश्य में, सर्वोच्च लेखापरीक्षा संस्थानों (एसएआई) की भूमिका का भी विस्तार हुआ है।

जहां अनुपालन और वित्तीय जवाबदेही बुनियादी बात बनी हुई है, वहीं विधायिका और नागरिक तेजी से इस बात का भरोसा चाहते हैं कि सार्वजनिक व्यय इच्छित परिणाम दे और ऑडिट सिफारिशों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

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