China Economy संकट: 3 साल के निचले स्तर पर पहुंची GDP Growth, कमजोर Domestic Demand ने बढ़ाई बीजिंग की टेंशन

चीन की जीडीपी वृद्धि दर अप्रैल-जून 2026 तिमाही में गिरकर 4.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है जो पिछले तीन वर्षों का सबसे निचला स्तर है। हालांकि निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन घरेलू मांग में निरंतर कमी और रियल एस्टेट क्षेत्र की मंदी ने आर्थिक संतुलन बिगाड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात पर अत्यधिक निर्भरता और उपभोक्ताओं की घटती खर्च शक्ति दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर ढांचागत चुनौती बन गई है।
चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ती दिखाई दे रही है। ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 4.3 प्रतिशत रह गई, जो पिछले तीन साल से अधिक समय का सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले जनवरी से मार्च तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था 5 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। ऐसे में नई रिपोर्ट ने दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की मजबूती को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
बता दें कि हाल के महीनों में चीन के निर्यात में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े उत्पादों, चिप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और बिजली से चलने वाले वाहनों की वैश्विक मांग बढ़ने से चीन को बड़ा फायदा मिला है। सरकारी सीमा शुल्क आंकड़ों के अनुसार वर्ष की पहली छमाही में निर्यात में लगभग 17.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि केवल जून महीने में यह बढ़ोतरी 27 प्रतिशत रही है।
हालांकि मजबूत निर्यात के बावजूद घरेलू बाजार अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। मौजूद जानकारी के अनुसार उपभोक्ताओं का खर्च सीमित बना हुआ है और निवेश गतिविधियों में भी कमी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के दौरान लंबे समय तक लगे प्रतिबंधों के बाद चीन की अर्थव्यवस्था अभी तक पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी है। रोजगार, आय और आवास बाजार को लेकर बनी अनिश्चितताओं के कारण लोग बड़े खर्च करने से बच रहे है।
गौरतलब है कि आईएनजी बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री लिन सोंग ने इसे वर्ष 2022 की अंतिम तिमाही के बाद सबसे कमजोर आर्थिक प्रदर्शन बताया है। वहीं कॉर्नेल विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र और व्यापार नीति विशेषज्ञ ईश्वर प्रसाद का मानना है कि चीन का आर्थिक मॉडल अब निर्यात पर जरूरत से ज्यादा निर्भर होता जा रहा है। उनके अनुसार जब तक घरेलू मांग मजबूत नहीं होगी, तब तक संतुलित आर्थिक विकास हासिल करना आसान नहीं होगा।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि चीन में सरकारी सहायता का बड़ा हिस्सा कृत्रिम बुद्धिमत्ता, चिप निर्माण, रोबोट और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में लगाया जा रहा है। इससे उच्च तकनीक उद्योगों को फायदा मिल रहा है, लेकिन पारंपरिक विनिर्माण और रोजगार देने वाले सेवा क्षेत्रों की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के उप प्रमुख माओ शेंगयोंग ने स्वीकार किया कि देश में उत्पादन और मांग के बीच असंतुलन अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार घरेलू बाजार को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने और उच्च गुणवत्ता वाले आर्थिक विकास पर लगातार काम कर रही है।
मौजूद आंकड़ों के अनुसार वर्ष की पहली छमाही में स्थायी परिसंपत्तियों में निवेश 5.7 प्रतिशत घट गया, जबकि खुदरा बिक्री में केवल 1.3 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज हुई। इसके साथ ही आवास क्षेत्र में कीमतों में गिरावट का सिलसिला भी जारी रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने हाल ही में चीन की वर्ष 2026 की आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 4.6 प्रतिशत किया है। हालांकि वर्ष 2027 के लिए संस्था ने केवल 4.1 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। वहीं चीन सरकार ने पूरे वर्ष के लिए 4.5 से 5 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य तय किया है। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में घरेलू मांग बढ़ाना और निवेश को गति देना चीन के लिए सबसे बड़ी आर्थिक चुनौती मानी जा रही हैं।
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