प्रवर्तन निदेशालय का अदालत में दावा, धन शोधन में शामिल है वीवो

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ईडी ने एक हलफनामे में कहा, ‘‘यह केवल आर्थिक अपराध का मामला नहीं है। इसे देश की वित्तीय प्रणाली को अस्थिर करने और राष्ट्र की अखंडता तथा संप्रभुता को भी खतरा पैदा करने के प्रयास के रूप में अंजाम दिया गया है।’’

नयी दिल्ली|  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दावा किया है कि चीन की स्मार्टफोन कंपनी वीवो के कुर्क बैंक खातों से पता चलता है कि कंपनी धन शोधन (मनी लांड्रिंग) में शामिल है। ईडी ने कहा कि वीवो ने धन शोधन को देश की वित्तीय प्रणाली को अस्थिर करने के प्रयास के रूप में अंजाम दिया है

एजेंसी ने न्यायालय में तर्क दिया कि कंपनी द्वारा कथित रूप से किया गया अपराध ‘धन शोधन’ का मामला है......जो एक जघन्य आर्थिक अपराध है।

न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के निर्देशों के अनुसरण में दायर एक हलफनामे में ईडी की तरफ से यह तर्क दिया गया है। न्यायालय ने वीवो की एक याचिका पर ईडी से इस संबंध में जवाब मांगा था। इस याचिका में धन शोधन जांच के संबंध में कंपनी के विभिन्न बैंक खातों को कुर्क करने के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी।

इस मामले में अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। जांच एजेंसी ने कहा, ‘‘वीवो के जब्त किए गए बैंक खाते स्पष्ट रूप से दर्शाते है कि कंपनी धन शोधन में शामिल है।’’

ईडी ने एक हलफनामे में कहा, ‘‘यह केवल आर्थिक अपराध का मामला नहीं है। इसे देश की वित्तीय प्रणाली को अस्थिर करने और राष्ट्र की अखंडता तथा संप्रभुता को भी खतरा पैदा करने के प्रयास के रूप में अंजाम दिया गया है।’’

जांच एजेंसी ने कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 17 के तहत बैंक खातों की तलाशी और जब्ती या कुर्क करने से पहले कोई नोटिस या सूचना देने की आवश्यकता नहीं है।

गौरतलब है कि ईडी ने पांच जुलाई को वीवो और उससे संबंधित कंपनियों के खिलाफ धन शोधन जांच के सिलसिले में देशभर में कई स्थानों पर छापेमारी की थी।

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