Meta पर European Union का शिकंजा, Facebook-Instagram पर बच्चों की Safety से खिलवाड़ का आरोप

Meta
प्रतिरूप फोटो
Unsplash
Ankit Jaiswal । Apr 29 2026 10:24PM

सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर यूरोपीय संघ ने मेटा के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, जिसमें कंपनी पर नाबालिग उपयोगकर्ताओं की पहचान करने और उन्हें हटाने में नाकाम रहने का आरोप है। यह कार्रवाई डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसका असर अन्य तकनीकी कंपनियों पर भी पड़ सकता है।

आज के समय में बच्चों का सोशल मीडिया की ओर तेजी से झुकाव बढ़ा है, लेकिन इसी के साथ उनकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच यूरोप से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां सोशल मीडिया कंपनियों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्ती बढ़ाई जा रही है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, यूरोपीय संघ ने सोशल मीडिया कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स पर आरोप लगाया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर कम उम्र के बच्चों की पहुंच को रोकने में नाकाम रही है। बता दें कि कंपनी के ही नियमों के मुताबिक 13 साल से कम उम्र के बच्चों को फेसबुक और इंस्टाग्राम पर खाता बनाने की अनुमति नहीं है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में नाबालिग इन मंचों तक पहुंच बना रहे हैं।

गौरतलब है कि यूरोपीय आयोग ने अपनी जांच में पाया है कि कंपनी के पास ऐसे प्रभावी उपाय नहीं हैं जो 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को खाता बनाने से रोक सकें। इतना ही नहीं, जिन बच्चों ने खाते बना भी लिए हैं, उन्हें पहचान कर हटाने की प्रक्रिया भी कमजोर बताई गई है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि कंपनी यह आकलन करने में भी पीछे है कि बच्चों को इन मंचों पर उनकी उम्र के अनुसार सुरक्षित अनुभव मिल रहा है या नहीं हैं।

इस मामले में यूरोपीय संघ ने डिजिटल सेवा अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की है। बता दें कि यह कानून तकनीकी कंपनियों को अपने मंचों पर उपयोगकर्ताओं, खासकर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त दिशा-निर्देश देता है।

हालांकि कंपनी ने इन आरोपों से असहमति जताई है। कंपनी का कहना है कि वह कम उम्र के उपयोगकर्ताओं की पहचान करने और उनके खातों को हटाने के लिए कई कदम उठा रही है। कंपनी ने यह भी माना कि उम्र की सही पहचान करना पूरे उद्योग के लिए एक चुनौती है और इसके समाधान के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अब कंपनी को इन शुरुआती निष्कर्षों पर जवाब देने का मौका दिया गया है, जिसके बाद यूरोपीय आयोग अंतिम फैसला सुनाएगा। बता दें कि अगर नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो कंपनी पर उसके वैश्विक सालाना कारोबार का छह प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा संदेश है और आने वाले समय में अन्य तकनीकी कंपनियों पर भी इसी तरह की सख्ती देखने को मिल सकती है। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि कंपनी आगे क्या कदम उठाती है और क्या वह इन नियमों के अनुसार खुद को ढाल पाती है।

All the updates here:

अन्य न्यूज़