Income Tax अलर्ट: REIT-InvIT से होने वाली कमाई पर बदल गए नियम, ITR फाइलिंग में रखें खास ध्यान

भारतीय रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्टों के लिए प्रस्तावित कर बदलाव लाभांश कराधान की जटिलताओं को सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम है जिससे निवेशकों को रिटर्न दाखिल करने में आसानी होगी। हालांकि आय के विभिन्न घटकों जैसे ब्याज और किराये की आय पर अलग-अलग कर देयताएं होने के कारण निवेशकों को फॉर्म 64बी के आधार पर सटीक कर गणना और आय के वर्गीकरण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट में पैसा लगाने वाले लोगों के लिए कर से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। कराधान और अन्य कानून संशोधन विधेयक, 2026 में लाभांश पर कर व्यवस्था को बदलने का प्रस्ताव रखा गया है। लोकसभा से पारित इस प्रस्ताव के बाद पात्र निवेशकों को न्यास से मिलने वाले लाभांश पर कर की पुरानी उलझन से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट से मिलने वाली पूरी रकम कर मुक्त हो जाएगी।
बता दें कि ऐसे न्यासों से निवेशकों को मिलने वाली रकम कई हिस्सों में हो सकती है। इसमें ब्याज, लाभांश, किराये से होने वाली आय और मूलधन की वापसी शामिल हो सकती है। इन सभी पर आयकर कानून के तहत अलग-अलग नियम लागू होते हैं। इसलिए पूरी रकम को एक साथ कर योग्य या कर मुक्त मानना निवेशकों के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है।
कर विशेषज्ञ हिमांक सिंगला के मुताबिक, कई निवेशक अपनी पूरी प्राप्त रकम को आयकर रिटर्न में एक ही मद के तौर पर दिखा देते हैं, जो सही तरीका नहीं है। उनके अनुसार ब्याज वाली रकम पर निवेशक की कर श्रेणी के हिसाब से कर लगता है और आम तौर पर दस प्रतिशत स्रोत पर कर कटौती होती है। वहीं योग्य निवेशकों के लिए नए बदलाव के तहत लाभांश पर टैक्स से राहत मिलेगी।
मौजूद जानकारी के अनुसार, पहले लाभांश की कर व्यवस्था इस बात पर भी निर्भर करती थी कि संबंधित विशेष प्रयोजन वाली कंपनी ने रियायती कंपनी कर व्यवस्था को चुना है या नहीं। यदि कंपनी ने आयकर कानून की धारा 115बीएए के तहत रियायती व्यवस्था अपनाई थी, तो निवेशक को मिलने वाले लाभांश की टैक्स छूट प्रभावित हो सकती थी। प्रस्तावित बदलाव इस अंतर को खत्म करने की कोशिश करता है।
एक अप्रैल 2026 से पात्र रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट निवेशकों के लिए लाभांश पर छूट कंपनी की कर व्यवस्था से अलग हो जाएगी। एम्बेसी रियल एस्टेट निवेश न्यास के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित शेट्टी ने इसे कर व्यवस्था में समानता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। हालांकि, रियायती कर व्यवस्था अपनाने वाली पात्र कंपनियों पर अधिभार दस प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी है।
गौरतलब है कि किराये से मिलने वाली आय आम तौर पर निवेशकों के लिए तय पारगमन व्यवस्था के तहत कर मुक्त रहती है। वहीं कर्ज की वापसी या मूलधन लौटाए जाने को प्राप्ति के समय आय नहीं माना जाता, लेकिन इससे इकाइयों की खरीद लागत घट जाती है। भविष्य में इकाइयां बेचने पर इससे पूंजीगत लाभ बढ़ सकता है।
निवेशकों को पूंजीगत लाभ के नियम भी समझने जरूरी हैं। एक साल से अधिक समय तक रखी गई इकाइयों की बिक्री पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 12.5 प्रतिशत की दर से कर लगता है, जबकि कम अवधि में बिक्री पर 20 प्रतिशत की दर लागू होती है। वित्त वर्ष 2025-26 में 1.25 लाख रुपये तक की दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ छूट इन इकाइयों पर उपलब्ध नहीं है। वित्त अधिनियम, 2025 के बदलाव के बाद यह सुविधा वित्त वर्ष 2026-27 से मिलने की बात कही गई है।
भारत में ऐसे निवेश का बाजार भी तेजी से बढ़ रहा है। मार्च 2026 तक देश में रियल एस्टेट निवेश न्यासों की कुल संपत्ति 2.72 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गई थी। पांच सूचीबद्ध न्यासों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 8,900 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया। मई 2026 में बागमाने रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट के सूचीबद्ध होने के बाद बाजार में एक और प्रमुख नाम जुड़ा है।
इसलिए निवेशकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि नई व्यवस्था को पूरी रकम पर कर छूट के तौर पर न देखा जाए। आयकर रिटर्न दाखिल करते समय वितरण विवरण, यानी प्रपत्र 64बी, देखकर रकम के हर हिस्से की अलग पहचान करना जरूरी है। सही जानकारी के आधार पर कर की गणना करने से भविष्य में गलत विवरण या अतिरिक्त कर भुगतान जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।
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