RBI के कदमों से US Dollar के मुकाबले Rupee 1 Percent मजबूत होकर 95.76 पर पहुंचा

भारतीय रिजर्व बैंक के नए कदमों के बाद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 1 प्रतिशत मजबूत होकर 95.76 पर पहुंच गया। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, कंपनियों की डॉलर मांग और विदेशी निवेश की स्थिति के दबाव से इस साल रुपये में 6.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
सोमवार को रुपये में बढ़त देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 1% मजबूत होकर 95.76 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि शुक्रवार को यह 96.73 पर बंद हुआ था। भारतीय रिजर्व बैंक के नए कदमों से रुपये पर पड़ रहा दबाव कुछ कम हुआ है। हालांकि, इस तेजी के बावजूद रुपये की मुश्किलें अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, इस साल अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में करीब 6.6% की गिरावट आ चुकी है। सोमवार को रुपये का प्रदर्शन एशिया की दूसरी प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले बेहतर रहा। इसकी बड़ी वजह आरबीआई की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव कम करने के लिए उठाए गए कदम हैं। लेकिन रुपये की कीमत आगे किस दिशा में जाएगी, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मजबूती पर निर्भर करेगा।
दरअसल, शनिवार को आरबीआई ने रुपये को संभालने के लिए कई उपायों का ऐलान किया था। इनका मुख्य उद्देश्य तेल कंपनियों की डॉलर की मांग और भविष्य में रुपये की कीमत गिरने की आशंका के चलते कारोबारियों की बढ़ती खरीदारी को नियंत्रित करना है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण तेल कंपनियों को आयात के भुगतान के लिए बड़ी मात्रा में डॉलर खरीदने पड़ रहे हैं। इससे बाजार में डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव पड़ता है।
इसके अलावा, रुपये में आगे और गिरावट की आशंका से कई कंपनियां भविष्य में डॉलर महंगा होने से बचने के लिए पहले से ही डॉलर खरीदने के सौदे कर रही थीं। ऐसे सौदों को वायदा कारोबार कहा जाता है। जब बहुत सी कंपनियां एक साथ ऐसा करती हैं, तो डॉलर की मांग और बढ़ जाती है। इससे रुपये की कीमत पर और दबाव पड़ सकता है।
इसी स्थिति को देखते हुए आरबीआई ने कुछ अहम नियम लागू किए हैं। अब कंपनियां रुपये से जुड़े उन सौदों को दोबारा नहीं कर सकेंगी, जिन्हें पहले रद्द कर दिया गया था। इसके साथ ही, वास्तविक कारोबारी जरूरत के बिना किए जाने वाले कुछ विदेशी मुद्रा सौदों की सीमा कम की गई है। कुछ विदेशी मुद्रा अनुबंधों के लिए बैंकों को 20% नकद राशि अलग रखने का नियम भी लागू किया गया है। इन कदमों से रुपये में गिरावट का फायदा उठाने वाले सौदे महंगे हो सकते हैं।
सिटी बैंक के मुताबिक, आरबीआई के इन कदमों से रुपये में गिरावट का फायदा उठाने वाले सौदों की शुरुआती लागत बढ़ेगी। वहीं, सोसाइटी जनरल का मानना है कि रुपये की आगे की चाल कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों के पैसे निकालने या लगाने और अमेरिकी डॉलर की दिशा पर निर्भर करेगी।
बता दें कि विदेशी मुद्रा भंडार का रिकॉर्ड स्तर पर होना देश के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, लेकिन इससे रुपये की कीमत अपने आप नहीं बढ़ती है। तेल आयात के लिए डॉलर की लगातार मांग, विदेशी निवेश की स्थिति और वैश्विक बाजार में अनिश्चितता रुपये को कमजोर कर सकती है। इसलिए आरबीआई के ताजा कदमों से मिली राहत कितने समय तक बनी रहती है, यह आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर की मांग में होने वाले बदलाव पर निर्भर करेगा।
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