Industrial Growth ने पकड़ी रॉकेट की रफ्तार, IIP Data 7.8% बढ़ा, दो साल का टूटा रिकॉर्ड

औद्योगिक विकास दर में दिसंबर 2025 के दौरान 7.8% का उछाल दर्ज किया गया, जिसे विनिर्माण क्षेत्र की 8.1% की तेज वृद्धि ने गति दी। कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में दोहरे अंकों की वृद्धि निवेश चक्र और उपभोक्ता मांग दोनों में एक साथ मजबूती की ओर इशारा करती है।
दिसंबर के महीने में देश के औद्योगिक मोर्चे से राहत और मजबूती के संकेत सामने आए हैं। बता दें कि सरकार की ओर से जारी ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक यानी IIP में सालाना आधार पर 7.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो पिछले दो वर्षों में सबसे तेज रफ्तार मानी जा रही हैं। गौरतलब है कि नवंबर में भी IIP को संशोधित करते हुए 7.2 प्रतिशत बताया गया था, जिससे साफ है कि साल के अंत तक औद्योगिक गतिविधियों में व्यापक तेजी देखने को मिली।
मौजूद जानकारी के अनुसार इस मजबूती की सबसे बड़ी वजह मैन्युफैक्चरिंग, खनन और बिजली उत्पादन तीनों क्षेत्रों का बेहतर प्रदर्शन रहा हैं। दिसंबर में विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन 8.1 प्रतिशत बढ़ा, वहीं खनन क्षेत्र में 6.8 प्रतिशत और बिजली उत्पादन में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई हैं। यह आंकड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर, कैपिटल गुड्स और उपभोक्ता मांग से जुड़े क्षेत्रों में स्थिर मांग की ओर इशारा करते हैं।
अगर विनिर्माण क्षेत्र को विस्तार से देखें तो 23 में से 16 उद्योग समूहों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई हैं। कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पादों के उत्पादन में सबसे तेज उछाल देखने को मिला, जहां वृद्धि दर 34.9 प्रतिशत रही हैं। इसके अलावा मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर का उत्पादन 33.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि अन्य परिवहन उपकरणों में 25 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।
बेसिक मेटल्स सेक्टर भी पीछे नहीं रहा और इसमें 12.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जिसमें अलॉय स्टील, एमएस स्लैब और स्टील पाइप्स का योगदान अहम रहा हैं। वहीं फार्मास्यूटिकल उद्योग में भी 10 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसे वैक्सीन, पाचन से जुड़ी दवाओं और विटामिन उत्पादों की मजबूत मांग का समर्थन मिला हैं।
उपयोग आधारित वर्गीकरण की बात करें तो दिसंबर में इन्फ्रास्ट्रक्चर और कंस्ट्रक्शन गुड्स में 12.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई, जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 12.3 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली हैं। यह संकेत देता है कि पूंजीगत खर्च के साथ-साथ उपभोक्ता मांग भी मजबूत बनी हुई हैं। कैपिटल गुड्स में 8.1 प्रतिशत और इंटरमीडिएट गुड्स में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो निवेश गतिविधियों के मजबूत होने की ओर इशारा करती हैं।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के अप्रैल से दिसंबर की अवधि की बात करें तो इस दौरान औद्योगिक उत्पादन में कुल 3.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई हैं। सरकार द्वारा नवंबर के आंकड़ों में किए गए अंतिम संशोधन के बाद यह साफ होता है कि साल के आखिरी महीनों में औद्योगिक विकास की रफ्तार तेज हुई हैं।
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