Iran-US तनाव से दुनिया भर में तेल का संकट गहराया, Crude Oil Market में हड़कंप

पश्चिम एशिया में लंबे संघर्ष की आशंका के कारण तेल बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है, जिससे ईरानी तेल की आपूर्ति बाधित होने और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने की चिंता गहरा गई है।
वैश्विक तेल बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है, जहां पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। बता दें कि अमेरिकी कांग्रेस ने ईरान से सैन्य वापसी से जुड़े प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसके बाद बाजार में युद्ध से जुड़े जोखिमों को फिर से शामिल किया जाने लगा है।
मौजूद जानकारी के अनुसार यह प्रस्ताव बेहद मामूली अंतर से गिरा, जिसके बाद संकेत मिले कि अमेरिका फिलहाल ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य मौजूदगी जारी रखेगा। इस फैसले के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट कच्चा तेल फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी तेल में भी शुरुआती तेजी दर्ज की गई।
गौरतलब है कि बाजार में यह तेजी केवल आपूर्ति की चिंता के कारण नहीं, बल्कि संभावित लंबे संघर्ष की आशंका के कारण आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचता है, तो वैश्विक बाजार से ईरान का बड़ा हिस्सा बाहर हो सकता है, जिससे आपूर्ति और कीमतों पर दबाव बनेगा।
वित्तीय संस्थानों के विश्लेषण के मुताबिक अमेरिकी प्रतिबंधों और समुद्री रोकथाम के चलते रोजाना लाखों बैरल ईरानी तेल बाजार से हट सकता है, जिसका सीधा असर खासकर एशियाई देशों पर पड़ेगा। बता दें कि चीन जैसे बड़े खरीदार इस आपूर्ति पर काफी हद तक निर्भर रहते हैं।
तेल बाजार की संरचना भी इस समय असामान्य स्थिति में दिखाई दे रही है। तात्कालिक आपूर्ति के लिए कीमतें ज्यादा हैं, जबकि भविष्य की कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई हैं। इसका मतलब यह है कि बाजार फिलहाल तत्काल आपूर्ति की कमी को ज्यादा गंभीर मान रहा है, जबकि लंबी अवधि में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद कर रहा है।
इसी बीच समुद्री मार्गों को लेकर भी जोखिम बढ़ गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर के रास्तों पर सैन्य गतिविधियों में बढ़ोतरी से किसी बड़े टकराव की आशंका बनी हुई है। अगर इन मार्गों पर बाधा आती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि युद्ध के चलते जहाजों के बीमा और माल ढुलाई लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार जोखिम बीमा प्रीमियम कई गुना तक बढ़ चुका है, जिससे तेल की कुल लागत और अधिक बढ़ सकती है।
हालांकि प्राकृतिक गैस के बाजार में स्थिति अपेक्षाकृत संतुलित बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और अन्य देशों से बढ़ती आपूर्ति ने मध्य पूर्व से आने वाली कमी को काफी हद तक संतुलित कर दिया है। यही कारण है कि गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीमित रहा है।
आगे की स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि यूरोप और एशिया के बीच गैस आपूर्ति को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, खासकर गर्मियों के महीनों में जब भंडारण को भरने की जरूरत होगी।
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