US-Iran Peace Deal: India की भूमिका नदारद, Supriya Shrinate का Modi सरकार पर हमला

Supriya Shrinate
ANI
अंकित सिंह । Jun 15 2026 7:50PM

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने अमेरिका-ईरान शांति समझौते का समर्थन करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने भारत की इस अहम शांति प्रक्रिया में कोई भूमिका न होने और भारतीय नाविकों की मौत पर प्रधानमंत्री मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए, जबकि पाकिस्तान जैसे देश इसमें शामिल हैं।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने रविवार को घोषित अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन के शांति समझौते और पश्चिम एशिया संकट को सुलझाने की कोशिशों का समर्थन किया। हालांकि, उन्होंने शांति प्रक्रिया में शामिल न होने और भारतीय नाविकों की मौत पर प्रतिक्रिया को लेकर भारत सरकार की आलोचना की। ANI से बात करते हुए श्रीनाते ने कहा कि हम शांति की किसी भी पहल का स्वागत करते हैं, क्योंकि दुनिया में जहां भी युद्ध होता है, उसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। हमारे तीन नाविक शहीद हुए, और क्यों? क्योंकि अमेरिका ने बेरहमी से उनकी हत्या कर दी। यह जानते हुए भी कि उस जहाज पर भारतीय क्रू था, हमारे प्रधानमंत्री ने एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने न तो शोक जताया, न ही कोई सहानुभूति दिखाई और न ही कोई शोक संदेश भेजा। अमेरिका के सामने आपत्ति जताना तो बहुत दूर की बात है।

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श्रीनेत ने आगे कहा कि हम शांति का स्वागत करते हैं, लेकिन हम यह भी पूछना चाहते हैं कि इसमें भारत की कोई भूमिका क्यों नहीं रही? शांति का इतना बड़ा समझौता हो रहा है और इसमें पाकिस्तान—जो एक बेचारा आतंकी देश है—भूमिका निभा रहा है। वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हुई इस अहम कामयाबी में एक ऐसा समझौता शामिल है, जिससे पश्चिम एशिया में "शांति और सुरक्षा" आने और रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के फिर से खुलने की उम्मीद है। ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप-विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने इस समझौते की पुष्टि की और भविष्य की बातचीत के लिए ईरान की शर्तें बताईं।

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ईरान के सरकारी प्रेस टीवी के अनुसार, ग़रीबाबादी ने कहा कि आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह शुक्रवार को स्विट्ज़रलैंड में होगा, जिसके बाद आपसी सहमति पत्र (MoU) का टेक्स्ट सार्वजनिक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान अंतिम समझौते के लिए प्रस्तावित 60 दिनों की बातचीत की प्रक्रिया में तभी शामिल होगा, जब यह पुष्टि हो जाएगी कि अमेरिका ने दुश्मनी खत्म करने, नाकेबंदी हटाने और ईरान की संपत्ति जारी करने से जुड़े अपने वादे पूरे कर लिए हैं।

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