‘किसान और सैनिक देश की जीवनरेखा’, प्राकृतिक खेती और कृषि विविधीकरण से बढ़ेगी आमदनी, लोकसभा अध्यक्ष Om Birla का संकल्प

Om Birla
ANI
रेनू तिवारी । Jun 30 2026 8:48AM

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को किसानों और सैनिकों को ‘देश की जीवनरेखा’ करार देते हुए प्राकृतिक खेती, खेती में विविधता तथा बाज़ार तक बेहतर पहुंच के जरिए कृषि को एक मुनाफ़े वाला उपक्रम बनाने के अपने संकल्प को दोहराया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने देश के किसानों और जवानों के योगदान को सर्वोपरि बताते हुए उन्हें ‘देश की जीवनरेखा’ (Lifeline of the Nation) करार दिया है। सोमवार को 'स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर मैनेजमेंट' (SIAM) में प्राकृतिक खेती पर आयोजित एक क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने कृषि को एक टिकाऊ और मुनाफे का सौदा बनाने का अपना संकल्प दोहराया। इस कार्यशाला में लगभग 1,000 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया, जहां उन्हें कम लागत में बेहतर मुनाफे और आधुनिक कृषि पद्धतियों की जानकारी दी गई।

बिरला यहां ‘स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर मैनेजमेंट’ में प्राकृतिक खेती पर आयोजित एक क्षेत्रीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, ‘‘प्राकृतिक खेती अपनाकर हम न केवल टिकाऊ और उपजाऊ जमीन सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की सेहत और भविष्य को भी सुरक्षित कर रहे हैं।’’ इस कार्यशाला में लगभग 1,000 किसान शामिल हुए। उन्हें खेती से होने वाली आय बढ़ाने के तरीकों के तौर पर प्राकृतिक खेती, कम लागत और अच्छी गुणवत्ता वाली खेती, कृषि उत्पादों के विपणन, पशुपालन और बागवानी के बारे में जानकारी दी गई।

कोटा के सांसद बिरला ने कहा कि हाड़ौती इलाके में उपजाऊ ज़मीन, अनुकूल मौसम और पानी की पर्याप्त उपलब्धता इसे देश में प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए सबसे उपयुक्त इलाकों में से एक बनाती है। उन्होंने किसानों से पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अपनी आय बढ़ाने के लिए बागवानी, फलों की खेती, मधुमक्खी पालन और पशुपालन को शामिल करते हुए खेती में विविधता अपनाने का आह्वान किया।

इन 4 क्षेत्रों को अपनाने से बढ़ेगी किसानों की आय

बिरला ने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ निम्नलिखित क्षेत्रों को भी अपनी आजीविका का हिस्सा बनाने का सुझाव दिया:

बागवानी व फलों की खेती: नकदी फसलों और फलों के उत्पादन से कम समय में बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।

मधुमक्खी पालन: कम लागत में शहद उत्पादन के जरिए अतिरिक्त आय का एक बड़ा जरिया खड़ा किया जा सकता है।

पशुपालन व डेयरी: कृषि के साथ जुड़ा यह पारंपरिक व्यवसाय संकट के समय किसानों को वित्तीय सुरक्षा देता है।

बाजार तक सीधी पहुंच: बिचौलियों पर निर्भरता कम कर सीधे कोऑपरेटिव या डिजिटल मंडियों के जरिए उत्पादों को बेचना।

लोकसभा अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि किसानों की मेहनत को सही मूल्य दिलाने और कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है। 

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