Micron अगले साल भारत में Semiconductor Assembly और परीक्षण क्षमता कई गुना बढ़ाएगी

Micron अगले साल भारत में Semiconductor Assembly और परीक्षण क्षमता कई गुना बढ़ाएगी
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माइक्रोन के सीईओ संजय मेहरोत्रा ने सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम में बताया कि कंपनी अगले साल भारत में अपनी चिप असेंबली और टेस्टिंग क्षमता में भारी विस्तार करेगी। गुजरात के साणंद प्लांट में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो चुका है जहां से डीआरएएम और एनएएनडी मेमोरी उत्पाद वैश्विक बाजारों को भेजे जा रहे हैं। कंपनी इस साल करोड़ों और अगले साल सैकड़ों अरब चिप्स की असेंबली का लक्ष्य लेकर चल रही है।

माइक्रोन के सीईओ संजय मेहरोत्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत की सेमीकंडक्टर नीति को बढ़ावा देने के प्रयासों ने उद्योग को वह मजबूत आधार दिया है, जो उसके पास पहले नहीं था और देश अब परिकल्पना से आगे बढ़कर उसे अमल में ला रहा है। उन्होंने साथ ही अगले साल भारत में कंपनी की चिप ‘असेंबली’ और परीक्षण सुविधा का काम कई गुना बढ़ाने की योजना की घोषणा की। ‘सेमीकॉन इंडिया 2026’ के उद्घाटन समारोह में मेहरोत्रा ने कहा, ‘‘दशकों से लोग भारत की सेमीकंडक्टर क्षमता की बात करते रहे हैं।

मैं भी ऐसी कई चर्चाओं का हिस्सा रहा हूं। केवल क्षमता से उत्पाद बाजार में नहीं पहुंचते। आज भारत में मैं जिस चीज को देख रहा हूं, वह काम को अमल में लाना है।’’ उन्होंने कहा कि माइक्रोन पिछले सात साल से भारत में है।

कंपनी भारत में सीधे तौर पर 7,000 से अधिक लोगों को रोजगार देती है और उसके काम से पूरी मूल्य श्रृंखला में हजारों अन्य रोजगार को भी समर्थन मिलता है। मेहरोत्रा ने कहा, ‘‘इस साल की शुरुआत में हमने गुजरात के साणंद में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया। यह भारत में पहली सेमीकंडक्टर ‘असेंबली’ और परीक्षण सुविधा है और भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत पहली परियोजना है... तैयार डीआरएएम और एनएएनडी उत्पाद अब गुजरात से दुनियाभर के ग्राहकों के लिए भेजे जा रहे हैं।

इन पर वह ‘मेड इन इंडिया’ लेबल लगा है, जिसे यह देश लंबे समय से किसी मेमोरी चिप पर लगाने का इंतजार कर रहा था।’’ माइक्रोन के सीईओ ने कहा कि मौजूदा उत्पादन क्षमता भारत के पूरे लैपटॉप बाजार की मेमोरी की जरूरत से भी अधिक है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत सेमीकंडक्टर मिशन और अब आईएसएम 2.0 ने इस उद्योग को वह आधार दिया है, जो उसके पास पहले नहीं था।’’ मेहरोत्रा ने कहा कि माइक्रोन बेंगलुरु तथा हैदराबाद में मेमोरी चिप का डिजाइन करती है, गुजरात में उनकी असेंबली करती है और उन्हें हर महाद्वीप के ग्राहकों तक भेजती है। उन्होंने कहा, ‘‘इस साल हम साणंद में करोड़ों चिप की ‘असेंबली’ और परीक्षण करेंगे।

अगले साल सैकड़ों अरब चिप की।’’ माइक्रोन के सीईओ ने कहा, ‘‘भारत में हमारा इंजीनियरिंग काम कारखाने से बहुत पहले शुरू हो गया था। हैदराबाद और बेंगलुरु में हमारे केंद्र अब माइक्रोन के वैश्विक प्रौद्योगिकी नेटवर्क का अहम हिस्सा हैं। भारत में हमारे दलों ने 3,700 से अधिक पेटेंट, आविष्कारों में योगदान दिया है।’’ कृत्रिम मेधा (एआई) के कारण मेमोरी चिप की बढ़ती मांग के चलते माइक्रोन के कारोबार में करीब 1,400 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मेहरोत्रा ने कहा कि एआई हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी है। एआई की शुरुआत डेटा से होती है। डेटा के बिना कोई मॉडल नहीं हो सकता।

जब भी कोई मॉडल बड़ा होता है, मेमोरी की मांग और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया को ऐसी मेमोरी की जरूरत होगी, जो अधिक तेज, अधिक क्षमता वाली और बिजली के लिहाज से कहीं अधिक कुशल हो। माइक्रोन ऐसी ही मेमोरी बनाती है।

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