संसदीय समिति ने बंद पड़े यूरिया संयंत्रों को फिर से शुरू करने की संभावना तलाशने को कहा

रसायन और उर्वरक पर संसद की स्थायी समिति ने सरकार से दुर्गापुर, हल्दिया और कोरबा में बंद पड़े यूरिया उर्वरक संयंत्रों को फिर से शुरू करने की संभावना तलाशने को कहा है। इसका उद्देश्य घरेलू मांग को पूरा करना और आयात पर निर्भरता कम करना है। समिति के अनुसार, देश में यूरिया की मांग वर्ष 2035-36 तक बढ़कर 444 लाख टन होने का अनुमान है।
नयी दिल्ली, 27 जुलाई संसद की एक समिति ने सरकार से घरेलू मांग को पूरा करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दुर्गापुर, हल्दिया और कोरबा में यूरिया उर्वरक संयंत्र को फिर से शुरू करने की संभावना तलाशने को कहा है। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 100 लाख टन से ज्यादा यूरिया का आयात किया। सोमवार को लोकसभा में, रसायन और उर्वरक पर स्थायी समिति ने उर्वरक के आयात को रोकने के मकसद से उत्पादन में आत्मनिर्भरता — इससे जुड़ी बाधाओं की समीक्षा पर एक रिपोर्ट पेश की।
यह रिपोर्ट रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय (उर्वरक विभाग) से संबंधित है। समिति ने बताया कि वर्ष 2024-25 में घरेलू यूरिया उत्पादन 307 लाख टन था, जबकि खपत 388 लाख टन थी। अनुमान है कि वर्ष 2035-36 तक मांग बढ़कर 444 लाख टन हो जाएगी।
बढ़ती मांग को देखते हुए, समिति का मानना है कि घरेलू क्षमता बढ़ाने की कुल रणनीति में मौजूदा बेकार पड़े बुनियादी ढांचे पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘समिति ने गौर किया कि विभाग का जवाब एचएफसीएल (हिंदुस्तान फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड) की दुर्गापुर और हल्दिया इकाइयों और एफसीआईएल (फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया) की कोरबा इकाई को फिर से शुरू करने के फैसले को भविष्य के लिए नजरअंदाज करने वाला है। रिपोर्ट में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में जगह का फायदा होने के बावजूद, एफसीआईएल की कोरबा इकाई के बारे में सरकार के जवाब में कोई खास बात नहीं कही गई है।
इसलिए, समिति ने सिफारिश की कि ‘‘सरकार मांग और आपूर्ति की बदलती स्थिति के अनुसार, एक तय समय-सीमा में दुर्गापुर, हल्दिया और कोरबा इकाइयों को फिर से शुरू करने की संभावना पर विचार कर सकती है।
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