Iran-Israel War की आग में झुलसा Qatar, हमलों के बाद LNG प्रोडक्शन बंद, Europe-Asia में बढ़ी टेंशन

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Ankit Jaiswal । Mar 3 2026 12:50PM

मध्य पूर्व में ईरान-इज़राइल तनाव के बीच सैन्य हमलों के बाद क़तर एनर्जी ने एलएनजी उत्पादन रोक दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में आपूर्ति संकट और तेल-गैस की कीमतों में भारी उछाल की चिंता बढ़ गई है।

मध्य पूर्व में जारी तनाव अब ऊर्जा बाज़ार तक गहराता दिख रहा है। ताज़ा घटनाक्रम में क़तर की सरकारी ऊर्जा कंपनी कतर एनर्जी ने घोषणा की है कि वह फिलहाल तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का उत्पादन रोक रही है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र पहले से ही सैन्य टकराव और जवाबी हमलों की आग में झुलस रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार कंपनी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि रास लाफ़ान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी स्थित उसके प्रतिष्ठानों को सैन्य हमलों का निशाना बनाया गया। हालांकि उत्पादन दोबारा कब शुरू होगा, इसकी कोई समयसीमा घोषित नहीं की गई है। गौरतलब है कि क़तर दुनिया के सबसे बड़े LNG निर्यातकों में गिना जाता है, ऐसे में इस कदम का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।

बता दें कि संकट का यह तीसरा दिन है। हालिया टकराव तब और बढ़ गया जब अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई वरिष्ठ सैन्य और राजनीतिक नेताओं के मारे जाने की खबर सामने आई। इसके बाद ईरान ने व्यापक जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने तेहरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिकी या इज़राइली हितों पर आगे कोई हमला हुआ तो उसके “अभूतपूर्व” परिणाम होंगे। वहीं ईरान ने सैकड़ों मिसाइलें और ड्रोन दागकर जवाब दिया। अमेरिकी प्रशासन ने पुष्टि की कि इस पूरे अभियान में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है।

इसी बीच इज़राइल ने भी ईरान के ठिकानों पर नए हमले किए। दूसरी ओर, दुबई और दोहा के आसमान में लगातार दूसरे दिन धमाकों की आवाज़ें सुनी गईं। माना जा रहा है कि ईरान ने खाड़ी के कुछ पड़ोसी देशों की ओर भी हवाई हमले किए। जो शहर अब तक सुरक्षित व्यावसायिक केंद्र माने जाते थे, वे भी इस टकराव की जद में आ गए हैं।

हवाई अड्डों पर भारी अव्यवस्था की स्थिति बन गई है। हजारों उड़ानें प्रभावित हुईं और लाखों यात्री अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं। तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है क्योंकि आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।

गौरतलब है कि वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पहले से ही रूस-यूक्रेन युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में क़तर जैसे बड़े निर्यातक का अस्थायी रूप से बाज़ार से बाहर होना एशिया और यूरोप जैसे बड़े आयातकों के लिए चिंता का कारण बन सकता है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति लंबी खिंचती है तो गैस और तेल दोनों की कीमतों में और अस्थिरता देखने को मिल सकती है।

मौजूदा हालात में पूरी दुनिया की निगाहें खाड़ी क्षेत्र पर टिकी हुई हैं और आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है।

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