Raghuram Rajan का बड़ा बयान: AI के इस्तेमाल पर लगे Tax, कर्मचारियों के लिए Training देने वाली कंपनियों को मिले राहत

Raghuram Rajan
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ANI
Ankit Jaiswal । Aug 20 2026 11:10PM

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रोजगार पर पड़ने वाले दबाव को देखते हुए रघुराम राजन ने एआई सेवाओं पर कर लगाने और कर्मचारी प्रशिक्षण में निवेश करने वाली कंपनियों को छूट देने का सुझाव दिया है। यह रणनीति न केवल नई तकनीक को अपनाने की गति को विनियमित करेगी बल्कि कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाकर उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगी। एआई टोकन पर आधारित यह कर प्रणाली कॉर्पोरेट जगत में तकनीकी बदलाव और मानव पूंजी के प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की एक गंभीर कोशिश है।

एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है और इसके साथ रोजगार पर असर को लेकर बहस भी तेज हो रही है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने कर व्यवस्था में बदलाव का एक सुझाव दिया है। उनका कहना है कि कंपनियों द्वारा एआई के इस्तेमाल पर कर लगाया जा सकता है और कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षण देने वाली कंपनियों को कर में राहत दी जानी चाहिए।

रघुराम राजन ने 14 अगस्त को प्रकाशित प्रोजेक्ट सिंडिकेट के एक लेख में कहा कि एआई के कारण कुछ नौकरियों पर असर पड़ना तय है, हालांकि इसका समय, पैमाना और अलग-अलग क्षेत्रों पर प्रभाव अभी पूरी तरह साफ नहीं है। उन्होंने इसे भारत के लिए किसी प्रस्तावित सरकारी योजना के तौर पर नहीं रखा है, बल्कि व्यापक नीति विचार के रूप में सामने रखा है।

राजन का तर्क है कि मौजूदा कर व्यवस्था कई बार कंपनियों के लिए कर्मचारियों की तुलना में मशीनों को अपनाना आर्थिक रूप से ज्यादा फायदेमंद बना देती है। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि कंपनियां कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा से जुड़े योगदान करती हैं, जबकि एआई के इस्तेमाल पर इस तरह का कोई समान बोझ नहीं है।

इसी असंतुलन को कम करने के लिए राजन ने कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एआई टोकन पर कर लगाने का सुझाव दिया है। एआई टोकन उन छोटी इकाइयों को कहा जाता है, जिन्हें एआई आधारित प्रणालियां जानकारी को समझने और संसाधित करने के दौरान इस्तेमाल करती हैं। कंपनियों के लिए इन टोकन की संख्या एआई सेवाओं के इस्तेमाल और भुगतान का एक आधार भी होती है।

राजन ने सुझाव दिया कि शुरुआत में इस कर की दर कम रखी जा सकती है और सरकारों के अनुभव बढ़ने के साथ इसमें धीरे-धीरे बदलाव किया जा सकता है। उनका मानना है कि कर इतना अधिक नहीं होना चाहिए कि कंपनियां एआई अपनाने से ही पीछे हट जाएं। घरेलू कंपनियों को किए जाने वाले भुगतान पर नजर रखना अपेक्षाकृत आसान होगा, लेकिन विदेशी एआई सेवा प्रदाताओं को भी इस व्यवस्था में शामिल करना जरूरी होगा।

इसके साथ राजन ने कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षण देने वाली कंपनियों के लिए कर छूट की बात कही है। उनका सुझाव है कि प्रशिक्षण के बाद कर्मचारी जितने समय तक रोजगार में बना रहता है, उसके आधार पर कंपनी को धीरे-धीरे इस छूट का लाभ दिया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर प्रशिक्षण संबंधी छूट का एक-तिहाई हिस्सा हर साल उपलब्ध कराया जा सकता है।

गौरतलब है कि एआई के इस्तेमाल की रफ्तार फिलहाल कुछ अनुमानों से धीमी दिखाई दे रही है। राजन के मुताबिक कंपनियों को मौजूदा कामकाज में एआई को शामिल करने में कठिनाई हो रही है और लागत को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका के जनगणना ब्यूरो के दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच जुटाए आंकड़ों के अनुसार, वहां कुल कारोबारों में एआई का इस्तेमाल 17 से 20 प्रतिशत के बीच था। 250 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों में यह आंकड़ा करीब 37 प्रतिशत था।

हालांकि राजन ने चेतावनी दी है कि प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर कंपनियां एआई को तेजी से अपनाने लग सकती हैं, जिससे रोजगार पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि एआई का प्रभाव केवल नकारात्मक नहीं होगा। इससे कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ सकती है, एआई के संचालन से जुड़ी नई नौकरियां बन सकती हैं और प्रोग्रामिंग तथा लेखा जैसे काम आसान होने से नए कारोबार शुरू करने की लागत घट सकती है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, राजन का जोर इस बात पर है कि एआई से होने वाले बदलाव का पूरा बोझ कर्मचारियों पर न पड़े। कंपनियों को कर्मचारियों को नए कौशल सिखाने, उन्हें लंबे समय तक रोजगार में बनाए रखने और बदलती जरूरतों के लिए तैयार करने में भूमिका निभानी होगी। उनका मानना है कि जो कंपनियां अपने कर्मचारियों के साथ बेहतर तरीके से बदलाव का प्रबंधन करेंगी, वे भविष्य में ज्यादा कुशल लोगों को आकर्षित करने में भी सफल रहेंगी।

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