RBI Rules for Banks: कर्ज वसूली में बदसलूकी पर कार्रवाई, बैंक की गलती पर ग्राहक को मिलेगा ₹250 प्रति घंटा Compensation

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Ankit Jaiswal । Aug 7 2026 10:50PM

भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज वसूली प्रक्रिया में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं जो 1 जनवरी 2027 से बैंकिंग परिचालन का अनिवार्य हिस्सा बनेंगे। ये नियम रिकवरी एजेंटों के संपर्क समय को सीमित करते हुए ग्राहकों की निजता की सुरक्षा के लिए वित्तीय संस्थानों पर कड़ा अनुपालन भार डालते हैं। आरबीआई कर्ज वसूली नियम, बैंक रिकवरी एजेंट, वित्तीय सुधार, ऋणदाता जवाबदेही।

भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज की वसूली को लेकर नए और सख्त नियम जारी किए हैं ताकि उधार लेने वालों के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित किया जा सके। मौजूद जानकारी के अनुसार ये नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू होंगे और इनका पालन सभी बैंकों तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं को करना होगा।

भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी संशोधित निर्देशों के अनुसार अब बैंक या उनकी ओर से नियुक्त वसूली एजेंसियां किसी भी कर्जदार या गारंटर से केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही संपर्क कर सकेंगी। इसके अलावा परिवार में किसी की मृत्यु, गंभीर बीमारी या अन्य आपात स्थिति जैसे संवेदनशील समय पर फोन करना या घर पहुंचकर दबाव बनाना पूरी तरह अनुचित माना जाएगा। बता दें कि लंबे समय से वसूली एजेंसियों के व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं, जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने यह कदम उठाया है।

नए नियमों में साफ कहा गया है कि बैंक के कर्मचारी या वसूली एजेंट किसी भी कर्जदार के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। साथ ही किसी व्यक्ति की तस्वीर, वीडियो, ऑडियो या निजी जानकारी को सामाजिक माध्यमों पर साझा करके उसे बदनाम करने की भी अनुमति नहीं होगी। भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे ग्राहक की जानकारी के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त व्यवस्था और दंड का प्रावधान भी लागू करें।

गौरतलब है कि अब बैंकों को कर्ज वसूली से जुड़ी हर फोन बातचीत का समय, संख्या और बातचीत का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना होगा। इसके साथ ही कर्ज वसूली की पूरी प्रक्रिया के लिए लिखित नीति बनानी होगी, जिसमें वसूली शुरू करने की परिस्थितियां, चरणबद्ध कार्रवाई, कर्मचारियों और वसूली एजेंटों के लिए आचार संहिता तथा आर्थिक संकट से जूझ रहे ग्राहकों की मदद के उपाय भी शामिल होंगे। यदि कर्जदार की मृत्यु हो जाती है तो ऐसे मामलों को संभालने के लिए भी अलग व्यवस्था तैयार करनी होगी।

भारतीय रिजर्व बैंक ने मोबाइल उपकरण पर दिए जाने वाले कर्ज को लेकर भी महत्वपूर्ण नियम बनाए हैं। यदि किसी व्यक्ति ने कर्ज लेकर मोबाइल खरीदा है तो बैंक उसकी कुछ सुविधाओं पर रोक लगा सकता है, लेकिन यह कार्रवाई तभी होगी जब कर्ज की किस्त 30 दिन से अधिक समय तक बकाया रहे और पहले नोटिस भेजा जा चुका हो। वहीं पूरी तरह से निर्धारित रोक तभी लगाई जा सकेगी जब भुगतान 60 दिन से अधिक समय तक लंबित रहेगा। हालांकि आने वाली कॉल, संदेश और आपातकालीन सहायता जैसी जरूरी सुविधाओं को बंद नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा 60 दिन पूरे होने से पहले जाने वाली कॉल पर भी रोक नहीं लगाई जाएगी।

मौजूद जानकारी के अनुसार यदि बैंक गलती से किसी ग्राहक के मोबाइल की सुविधाएं बंद कर देता है या भुगतान होने के बाद समय पर उन्हें दोबारा चालू नहीं करता है, तो उसे हर घंटे 250 रुपये के हिसाब से मुआवजा देना होगा। हालांकि यह कुल मुआवजा दिए गए कर्ज की राशि से अधिक नहीं होगा। भारतीय रिजर्व बैंक का मानना है कि इन नए नियमों से कर्ज वसूली की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, जिम्मेदार और ग्राहकों के सम्मान की रक्षा करने वाली बन सकेगी।

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