कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से विमानन कंपनियों के शेयर गिरे, बाजार में बढ़ी चिंता

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प्रतिरूप फोटो
ANI
Ankit Jaiswal । Mar 9 2026 10:02PM

मध्य पूर्व में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल से इंडिगो और स्पाइसजेट जैसी विमानन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई है, जिससे ईंधन लागत और परिचालन चुनौतियों को लेकर बाजार में चिंता बढ़ गई है।

शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव आम बात है, लेकिन सोमवार को विमानन क्षेत्र के शेयरों में आई तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेजी का सीधा असर विमानन कंपनियों पर पड़ता दिखाई दे रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार भारत की प्रमुख विमानन कंपनी इंडिगो का संचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में लगभग साढ़े सात प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं बजट विमानन कंपनी स्पाइसजेट के शेयर भी करीब पांच प्रतिशत से ज्यादा टूटे हैं।

बता दें कि कच्चे तेल की कीमतों में सोमवार को लगभग 20 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली है, जो पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ी उछाल में से एक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, जिसका असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ रहा है।

गौरतलब है कि विमानन कंपनियों के लिए ईंधन खर्च सबसे बड़े खर्चों में शामिल होता है। मौजूद आंकड़ों के अनुसार कुल संचालन लागत का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर खर्च होता है। ऐसे में तेल की कीमतों में अचानक बढ़ोतरी कंपनियों के मुनाफे पर सीधा दबाव डाल सकती है।

इसके अलावा भारत की मुद्रा भी तेल कीमतों में बदलाव के प्रति काफी संवेदनशील मानी जाती है। ऐसे में जब तेल महंगा होता है तो कंपनियों को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ता है। एक तरफ ईंधन लागत बढ़ती है और दूसरी तरफ विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का असर भी दिखाई देता है।

जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के साथ विमान ईंधन की कीमत अक्सर उससे भी ज्यादा तेजी से बढ़ती है। इसकी वजह यह है कि विमान ईंधन की आपूर्ति सीमित होती है और मांग अधिक होने पर कीमतों में तेज उछाल आ सकता है।

मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर केवल ईंधन लागत तक सीमित नहीं है। कई देशों के हवाई क्षेत्र बंद होने या असुरक्षित होने की वजह से विमान कंपनियों को अपने मार्ग बदलने पड़ रहे हैं। ऐसे में उड़ानों की दूरी बढ़ रही है और अतिरिक्त ईंधन की जरूरत भी पड़ रही है।

गौरतलब है कि एशिया और यूरोप के बीच यात्रा करने वाली कई उड़ानों को अब वैकल्पिक मार्गों से गुजरना पड़ रहा है। इससे समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं। कई प्रमुख खाड़ी देशों के हवाई केंद्रों पर भी दबाव बढ़ गया है, जहां से बड़ी संख्या में यात्रियों की आवाजाही होती है।

मौजूद आंकड़ों के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद से मध्य पूर्व क्षेत्र से आने-जाने वाली हजारों उड़ानें रद्द हो चुकी हैं। इससे यात्रियों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और विमानन नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया है।

इस बीच कुछ भारतीय विमानन कंपनियों ने स्थिति का फायदा उठाते हुए सीधे अंतरराष्ट्रीय मार्गों की संख्या बढ़ाने की कोशिश की है, ताकि उन यात्रियों को सुविधा मिल सके जो खाड़ी देशों के रास्ते यात्रा नहीं करना चाहते हैं।

दरअसल मौजूदा हालात का असर केवल भारत तक सीमित नहीं है। एशिया के कई देशों की विमानन कंपनियां भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऑस्ट्रेलिया, जापान, चीन और हांगकांग की कई बड़ी विमानन कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखी गई है।

जानकारों का मानना है कि अगर मध्य पूर्व में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो विमानन उद्योग के सामने लागत और संचालन दोनों से जुड़ी चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। फिलहाल निवेशक स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और बाजार में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।

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