Festival Season से पहले Sugar Price में भारी उछाल, सरकार ने Import Duty हटाने और स्टॉक लिमिट पर शुरू किया विचार

भारत में चीनी की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से सरकार अब 100 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने और एथनॉल नीति की समीक्षा करने पर विचार कर रही है। एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के डायवर्जन और फसल रोगों के कारण घरेलू आपूर्ति में आई कमी ने त्योहारी सीजन से पहले महंगाई का संकट खड़ा कर दिया है। सरकार के सामने अब ऊर्जा सुरक्षा के लक्ष्यों और आम जनता के लिए खाद्य उपलब्धता के बीच संतुलन बनाने की कड़ी चुनौती है।
चीनी की कीमतों ने इस समय सरकार और आम लोगों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। देश में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ा है, चीनी मिलों के पास उत्पादन की क्षमता भी मौजूद है, लेकिन बाजार में चीनी की उपलब्धता कम पड़ रही है। इसी वजह से कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और अब केंद्र सरकार आयात शुल्क हटाकर विदेश से चीनी मंगाने के विकल्प पर विचार कर रही है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, भारत में चीनी के आयात पर फिलहाल 100 प्रतिशत शुल्क लागू है। सरकार इसे हटाने पर विचार कर रही है, ताकि घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है जब गणेश चतुर्थी, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार नजदीक हैं और मिठाइयों तथा अन्य खाद्य उत्पादों में चीनी की मांग बढ़ने वाली है।
महाराष्ट्र के प्रमुख चीनी बाजार कोल्हापुर में अगस्त की शुरुआत से चीनी की थोक कीमत करीब 20 प्रतिशत बढ़कर 5,350 रुपये प्रति 100 किलोग्राम तक पहुंच गई है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 52.30 रुपये प्रति किलोग्राम थी। पंजाब में कुछ जगहों पर यही कीमत 65 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि मुंबई और भोपाल समेत कुछ बाजारों में कीमत 58 से 63 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच है।
विशेषज्ञों के मुताबिक इस स्थिति के पीछे सबसे बड़ी वजह गन्ने का एक हिस्सा चीनी बनाने के बजाय एथनॉल उत्पादन में जाना है। भारत पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इसके लिए पिछले कुछ वर्षों में एथनॉल उत्पादन की क्षमता तेजी से बढ़ाई गई है। अखिल भारतीय आसवनी संघ के अनुसार, 2025 के मध्य तक देश में 499 स्थानों पर एथनॉल उत्पादन की कुल क्षमता करीब 1,822 करोड़ लीटर सालाना हो चुकी थी।
कृषि विशेषज्ञ और लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर सुधीर पंवार का कहना है कि एथनॉल के लिए गन्ने का इस्तेमाल बढ़ने से चीनी की उपलब्धता प्रभावित हुई है। उनका यह भी कहना है कि उत्तर प्रदेश में 2025-26 के दौरान फसल में बीमारी के कारण गन्ने की उत्पादकता और चीनी की रिकवरी में कमी आई है। उनके मुताबिक बाजार में जमाखोरी और गलत अनुमान भी कीमत बढ़ने की वजह हो सकते हैं।
गौरतलब है कि भारत कभी दुनिया के बड़े चीनी निर्यातकों में रहा है। 2021-22 में देश ने 1.2 करोड़ टन से ज्यादा चीनी का निर्यात किया था। लेकिन घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार ने धीरे-धीरे निर्यात पर पाबंदियां बढ़ाईं। 2025-26 के लिए करीब 20 लाख टन निर्यात की अनुमति दी गई और मई 2026 में 13 मई से 30 सितंबर तक चीनी निर्यात पर रोक लगा दी गई।
इसके बावजूद घरेलू कीमतों में कमी नहीं आई है। अब सरकार आयात शुल्क हटाने के साथ थोक कारोबारियों के पास चीनी के भंडारण की सीमा तय करने और एथनॉल के लिए गन्ने के इस्तेमाल को सीमित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रही है।
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने भी खाद्य जरूरत और ईंधन नीति के बीच संतुलन की जरूरत बताई है। उन्होंने सुझाव दिया है कि भारत को 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण के स्तर पर रुककर खाद्य और ईंधन के बीच होने वाले असर का पूरी तरह आकलन करना चाहिए।
चीनी की बढ़ती कीमत अब राजनीतिक मुद्दा भी बन रही है। टीम भारत के संस्थापक तहसीन पूनावाला ने एथनॉल नीति को कीमतों में बढ़ोतरी से जोड़ते हुए 22 और 23 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और भूख हड़ताल का ऐलान किया है। सरकार के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती त्योहारों के दौरान चीनी की पर्याप्त आपूर्ति और कीमतों को काबू में रखना है। इसके साथ ही उसे यह भी तय करना होगा कि ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू खाद्य कीमतों के बीच सही संतुलन कैसे बनाया जाए।
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