Stock Market Manipulation: सेबी ने सेंसेक्स में कृत्रिम तेजी लाने वाली दो फर्मों पर की बड़ी कार्रवाई, Profit पर लगाई रोक

सेबी ने सेंसेक्स के क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में संदिग्ध ट्रेडिंग गतिविधियों के जरिए बाजार में हेरफेर करने वाली दो संस्थाओं के 3.68 करोड़ रुपये के लाभ पर रोक लगा दी है। नियामक का विश्लेषणात्मक निष्कर्ष है कि इन संस्थाओं ने बड़े ऑर्डर और रद्दीकरण के माध्यम से एक्सपायरी के दिन सूचकांक को कृत्रिम रूप से प्रभावित किया। शेयर बाजार, सेबी कार्रवाई, मार्केट मैनिपुलेशन और सेंसेक्स ट्रेडिंग इस विश्लेषण के मुख्य कीवर्ड हैं।
शेयर बाजार में कारोबार खत्म होने से कुछ मिनट पहले सेंसेक्स में आई असामान्य तेजी ने अब बाजार नियामक का ध्यान खींच लिया है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने 13 अगस्त को हुए कारोबार में कॉप्थॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग पर कथित तौर पर बाजार में हेरफेर करने का आरोप लगाया है। दोनों संस्थाओं से कुल 3.68 करोड़ रुपये का कथित अनुचित लाभ रोकने का आदेश दिया गया है।
मामला सेंसेक्स के नए समापन नीलामी सत्र से जुड़ा है। गौरतलब है कि यह व्यवस्था अगस्त की शुरुआत में शुरू की गई थी और इसका मकसद कारोबार खत्म होने पर शेयरों की अंतिम कीमत तय करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाना है। 13 अगस्त को साप्ताहिक विकल्प सौदों की समाप्ति का दिन था। इसी दौरान सेंसेक्स में कुछ ही मिनटों के भीतर तीन बार अचानक तेज उछाल देखने को मिला।
मौजूद जानकारी के अनुसार, सेंसेक्स एक समय 77,661 से बढ़कर 78,023 अंक तक पहुंच गया। इसके बाद 77,708 से 77,841 और फिर 77,788 से 78,193 अंक तक उछाल आया। सेबी के मुताबिक ये बदलाव सामान्य बाजार गतिविधि के मुकाबले असामान्य थे और बड़े आदेशों के साथ इनका सीधा संबंध दिखाई दिया।
सेबी की जांच में सामने आया कि कॉप्थॉल ने सेंसेक्स में शामिल कंपनियों के शेयरों के लिए ऊंची कीमतों पर बड़े खरीद आदेश लगाए। उसने 32 आदेशों के जरिये करीब 3.17 करोड़ शेयर खरीदने की पेशकश की, जिनकी कुल कीमत लगभग 66.57 करोड़ रुपये थी। इनमें से करीब 1.04 करोड़ शेयरों के आदेश बाद में रद्द कर दिए गए। ये आदेश तय संदर्भ कीमत से करीब तीन प्रतिशत ऊपर रखे गए थे।
इसके बाद कॉप्थॉल ने कुछ ही सेकंड में दोबारा बड़े खरीद आदेश लगाए। सेबी के अनुसार, 12 सेकंड के भीतर उसके आदेशों का कुल मूल्य 126.59 करोड़ रुपये रहा। तीसरे उछाल के दौरान भी उसने बड़े पैमाने पर खरीद आदेश दिए और थोड़े समय बाद उन्हें वापस ले लिया।
दूसरी ओर, मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग ने रिलायंस, भारतीय स्टेट बैंक, एटरनल, आईसीआईसीआई बैंक, एल एंड टी और इन्फोसिस जैसे शेयरों में संदर्भ कीमत से 1.5 से 3 प्रतिशत नीचे बिक्री आदेश लगाए। इन आदेशों की कुल कीमत 145.65 करोड़ रुपये थी, जबकि बाद में 99 प्रतिशत से अधिक आदेश रद्द कर दिए गए।
सेबी के मुताबिक, दोनों संस्थाओं के पास उसी दिन समाप्त होने वाले सेंसेक्स विकल्प सौदों में ऐसी स्थितियां थीं, जिनसे सूचकांक के ऊपर जाने पर फायदा हो सकता था। कॉप्थॉल के पास 77,500, 78,000 और 78,500 के स्तर पर खरीद विकल्प और बिक्री विकल्प की स्थिति थी, जबकि मानसी के पास 77,800 के खरीद विकल्प तथा 77,800, 77,900 और 78,000 के स्तर पर बिक्री विकल्प की स्थिति थी।
नियामक का कहना है कि इन गतिविधियों के कारण सेंसेक्स 13 अगस्त को 77,840 के बजाय करीब 78,080 अंक पर बंद हुआ। सेबी ने दोनों संस्थाओं को शेयर बाजार और समापन नीलामी सत्र में कारोबार से रोक दिया है। उनके खातों से बिना अनुमति राशि निकालने पर भी रोक लगाई गई है। साथ ही, दोनों को अपने नाम पर सावधि जमा बनाकर संबंधित रकम पर सेबी के पक्ष में अधिकार दर्ज कराने को कहा गया है।
बता दें कि सेबी ने इसी समापन नीलामी सत्र में सेंसेक्स में करीब 451 अंकों की तेज गिरावट की भी अलग से जांच शुरू की है। फिलहाल यह कार्रवाई अंतरिम आदेश के आधार पर है और मामले की आगे की जांच जारी है।
अन्य न्यूज़













