Global Oil Crisis: अमेरिका ने भारत को दी रूसी तेल खरीदने की 'विशेष छूट', कहा- 'समुद्र में फंसे स्टॉक को जल्द बाज़ार में लाएं'

ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी दी कि तेल की कीमतों को कम रखने के लिए यह अल्पकालिक उपाय किया गया है। ऊर्जा मंत्री ने कहा, ‘‘हमने ऐसे छोटे अवधि के कदम उठाए हैं ताकि तेल की कीमतें कम बनी रहें।
दुनिया भर में तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति की बाधाओं के बीच अमेरिका ने एक बड़ा व्यावहारिक कदम उठाया है। अमेरिकी प्रशासन ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि वह अपने मित्र देश भारत को दक्षिण एशिया के समुद्री क्षेत्रों में जहाजों पर मौजूद रूसी तेल को खरीदने, उसका शोधन (Refining) करने और उसे जल्द से जल्द बाजार में उतारने की अनुमति दे रहा है।
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ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी दी कि तेल की कीमतों को कम रखने के लिए यह अल्पकालिक उपाय किया गया है। ऊर्जा मंत्री ने कहा, ‘‘हमने ऐसे छोटे अवधि के कदम उठाए हैं ताकि तेल की कीमतें कम बनी रहें। हम भारत को समुद्र में पहले से मौजूद तेल लेने, उसका शोधन करने और बाज़ार में जल्दी बेचने की अनुमति दे रहे हैं। यह आपूर्ति बनाए रखने और दबाव कम करने का व्यावहारिक तरीका है। एबीसी न्यूज़ लाइव को दिए साक्षात्कार में राइट ने बताया कि लंबी अवधि के लिए तेल की आपूर्ति पर्याप्त है और इसमें कोई चिंता नहीं है। लेकिन अल्पकालिक रूप से तेल को बाज़ार में लाना जरूरी है।
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उन्होंने कहा, “ होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाली आपूर्ति में थोड़ी बाधा के कारण तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। दक्षिण एशिया के आसपास बहुत सारा रूस का तेल समुद्र में फंसा हुआ है, खासकर चीन के पास। चीन अपने आपूर्तिकर्ताओं के साथ अच्छा व्यवहार नहीं करता, इसलिए कई बैरल बस वहीं रुके हैं। हमने भारत से कहा, ‘इस तेल को खरीदें और अपनी रिफाइनरी में लाएं’। इससे तुरंत तेल भारतीय रिफाइनरी में पहुंचेगा और दुनिया के अन्य रिफाइनरी कंपनियों पर दबाव कम होगा।
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