AI तकनीक पर US और China में टकराव, Anthropic प्रमुख के बयान से विवाद गहराया

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Ankit Jaiswal । Sep 14 2026 8:28PM

अमेरिकी कंपनी Anthropic के प्रमुख डारियो अमोदेई द्वारा चीन पर AI चिप पाबंदियां जारी रखने की मांग के बाद दोनों देशों में तकरार बढ़ गई है। चीन ने इसे शीत युद्ध की रणनीति बताते हुए अमेरिका पर तकनीक के एकाधिकार का आरोप लगाया है। वहीं 24 सितंबर को डोनाल्ड ट्रंप और शी चिनफिंग की बैठक में AI नियमन पर चर्चा की संभावना है।

एआई को लेकर अमेरिका और चीन के बीच चल रही प्रतिस्पर्धा अब खुलकर राजनीतिक और कूटनीतिक बयानबाजी में बदलती दिख रही है। चीन के विदेश मंत्रालय ने सोमवार को अमेरिकी कंपनी एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोदेई की उस अपील की आलोचना की, जिसमें उन्होंने अमेरिका से चीन की एआई क्षमताओं को सीमित करने और दुनिया में इसके विकास की रफ्तार धीमी करने की मांग की है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, डारियो अमोदेई ने शनिवार को प्रकाशित अपने विस्तृत लेख में चीन के एआई क्षेत्र में अमेरिका से आगे निकलने की स्थिति को अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका को अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए चीन को अत्याधुनिक एआई चिप और उन्हें बनाने वाले उपकरणों की बिक्री पर लगी पाबंदियां जारी रखनी चाहिए।

अमोदेई के इस रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि सभी देशों को मिलकर एआई  के विकास को आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि डर का माहौल पैदा करना, टकराव बढ़ाना और एक-दूसरे के खिलाफ आक्रामक प्रतिस्पर्धा करना वैश्विक एआई शासन की प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाएगा।

चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने भी अमोदेई के लेख को चीन को रोकने की एक अप्रत्यक्ष कोशिश बताया। अखबार के अनुसार लेख ऊपर से भले ही वैश्विक एआई सुरक्षा पर केंद्रित दिखाई देता हो, लेकिन इसमें चीन को निशाना बनाने वाले कई प्रस्ताव शामिल हैं। अखबार ने इसे एआई  के क्षेत्र में शीत युद्ध की रणनीति जैसा कदम बताया।

गौरतलब है कि एआई  के क्षेत्र में अमेरिका और चीन के बीच मुकाबला पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। अमेरिका अत्याधुनिक चिप और उन्हें बनाने की तकनीक तक चीन की पहुंच सीमित करने की कोशिश करता रहा है। दूसरी ओर चीन अपनी घरेलू कंपनियों और रिसर्च संस्थानों के जरिए इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने भी अमेरिका की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को आधारहीन बताया है। मंत्रालय ने कहा कि एआई मॉडल से जानकारी निकालकर दूसरे मॉडल को प्रशिक्षित करने की तकनीक कई कंपनियां इस्तेमाल करती हैं। चीन ने अमेरिका पर एआई  उद्योग पर एकाधिकार कायम करने की कोशिश करने का आरोप भी लगाया है।

बता दें कि चीनी कंपनियों ने हाल के वर्षों में कई शक्तिशाली एआई मॉडल विकसित किए हैं। इन मॉडलों की लागत कई अमेरिकी प्रणालियों की तुलना में कम बताई जाती है और कुछ आकलनों में उनकी क्षमता भी अमेरिकी मॉडलों के बराबर मानी गई है। इससे वैश्विक एआई  बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज हुई है।

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की 24 सितंबर को प्रस्तावित बैठक पर भी दुनिया की नजर है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच अन्य मुद्दों के साथ एआई के नियमन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा हो सकती है। यदि दोनों देश इस क्षेत्र में किसी साझा व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ते हैं तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग पहले ही विकासशील देशों के बीच एआई के लिए वैश्विक शासन व्यवस्था बनाने की वकालत कर चुके हैं। चीन खुद को खुले स्रोत वाली एआई व्यवस्था विकसित करने में अग्रणी के रूप में पेश कर रहा है।

वहीं चीन के राज्य सुरक्षा मंत्रालय के प्रमुख ने भी एआई से जुड़े सुरक्षा जोखिमों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए व्यवस्था जल्द विकसित करने की जरूरत बताई है। ऐसे में एक तरफ अमेरिका तकनीकी बढ़त और सुरक्षा को लेकर चीन पर नियंत्रण चाहता है, वहीं चीन वैश्विक सहयोग और अपने वैकल्पिक तकनीकी ढांचे की पैरवी कर रहा है। आने वाले समय में यह प्रतिस्पर्धा तकनीक के साथ वैश्विक राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को भी प्रभावित करने वाली बड़ी चुनौतियां हैं।

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