Semicon 2.0: भारत के चिप विनिर्माण में अमेरिका, जापान और यूरोप की कंपनियां उत्सुक

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अमितेश कुमार सिन्हा ने बताया कि भारत के सेमीकंडक्टर विनिर्माण कार्यक्रम 'सेमिकॉन 2.0' को लेकर अमेरिका, यूरोप, जापान, मलेशिया और सिंगापुर की कंपनियों ने गहरी रुचि दिखाई है। सितंबर में आयोजित होने वाले सेमिकॉन इंडिया सम्मेलन में दुनिया भर की कंपनियां भारत में निवेश और साझेदारी के अवसर तलाशेंगी। सरकार ने घरेलू चिप डिजाइन और विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के इस कार्यक्रम को मंजूरी दी है।
भारत के सेमीकंडक्टर विनिर्माण कार्यक्रम ‘सेमिकॉन 2.0’ को लेकर अमेरिका, यूरोप, जापान, मलेशिया और सिंगापुर की कंपनियों ने खासी दिलचस्पी दिखाई है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) अमितेश कुमार सिन्हा ने बताया कि सितंबर में होने वाले सेमिकॉन इंडिया सम्मेलन में दुनिया भर की कंपनियां हिस्सा लेंगी और भारत में साझेदारी एवं निवेश के अवसर तलाशेंगी।
सिन्हा ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम से इतर कहा कि जापान, अमेरिका, जर्मनी, नीदरलैंड, मलेशिया और सिंगापुर की कई कंपनियां इस कार्यक्रम में रुचि दिखा रही हैं। सरकार ने घरेलू स्तर पर सेमीकंडक्टर चिप की डिजाइन एवं विनिर्माण क्षमता को बढ़ाने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के ‘सेमिकॉन 2.0’ कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसके दिशा-निर्देश अगले दो हफ्तों में जारी होने की उम्मीद है। सिन्हा ने कहा कि सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम कंपनियों के लिए प्रौद्योगिकी सहयोग और साझेदारी का बड़ा मंच बनेगा, जहां वे एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने के अवसर तलाशेंगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का चिप डिजाइन पर विशेष ध्यान है, जो कि समूची सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा है। भारत के पास इस क्षेत्र में बड़ी प्रतिभा है, जिसे प्रोत्साहन देकर फैबलेस उत्पाद कंपनियां विकसित की जा सकती हैं। फैबलेस कंपनी अपना चिप खुद डिजाइन करती है, लेकिन उस चिप के उत्पादन का काम किसी तीसरे पक्ष के चिप विनिर्माता को सौंप देती है।
सिन्हा ने यह भी कहा कि कई वैश्विक कंपनियां भारत आएंगी और कुछ कंपनियां इस दौर से दूर रह जाने के डर की वजह से भी निवेश करना चाहेंगी। मेमोरी चिप की वैश्विक किल्लत के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार की कोरियाई कंपनी एसके हाइनिक्स समेत कई प्रमुख कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि भारत में चिप विनिर्माण लागत कम हो सकती है और मौजूदा समय में मेमोरी चिप की कीमतें ऊंचे स्तर पर हैं, जिससे निवेश की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
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