US vs China: ड्रैगन को तगड़ा झटका, Cyber Attack के डर से चीनी रोबोट और इन्वर्टर पर लगाया कड़ा बैन

अमेरिकी संघीय संचार आयोग का यह प्रतिबंध चीनी कंपनियों के तकनीकी प्रभुत्व को चुनौती देते हुए घरेलू विनिर्माण को सशक्त बनाने की एक गहन विश्लेषणात्मक रणनीति का हिस्सा है। राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य डेटा चोरी रोकना और भविष्य की एआई आधारित अर्थव्यवस्था में चीन की सैन्य व तकनीकी पहुंच को नियंत्रित करना है। यूनिट्री रोबोट, हुआवेई पावर इन्वर्टर, रणनीतिक प्रतिस्पर्धा, डेटा सुरक्षा, अमेरिकी विदेश नीति।
तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर अमेरिका और चीन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी प्रशासन ने चीन से आने वाले नए मानव जैसे रोबोट, चार पैरों वाले रोबोट और पावर इन्वर्टर के आयात पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यह फैसला अमेरिकी एआई आपूर्ति सीरीज को सुरक्षित रखने, साइबर हमलों के खतरे को कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है।
बता दें कि यह प्रतिबंध अमेरिकी संघीय संचार आयोग ने जारी किया है। आयोग के अनुसार, चीन से आने वाले ऐसे उपकरण आपूर्ति सीरीज में कमजोरी पैदा कर सकते हैं, जिससे देश की आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा इन उपकरणों के माध्यम से महत्वपूर्ण ढांचे पर साइबर हमले या आंकड़ों की चोरी का भी खतरा बना रह सकता है।
अमेरिकी संघीय संचार आयोग के अध्यक्ष ब्रेंडन कार ने कहा कि आयोग देश की महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित बनाने के लिए लगातार कदम उठाता रहेगा। उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक से जुड़े उपकरणों की सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
दूसरी ओर, वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास ने इस फैसले का विरोध किया है। चीन ने अमेरिका से व्यावसायिक समुदाय की राय का सम्मान करने और चीनी कंपनियों को निशाना बनाना बंद करने की अपील की है। चीनी दूतावास ने यह भी कहा कि यदि चीन के हितों को नुकसान पहुंचाया गया तो सरकार आवश्यक जवाबी कदम उठाएगी।
गौरतलब है कि अमेरिका लंबे समय से चीन पर बौद्धिक संपदा की चोरी, साइबर जासूसी और तकनीकी सुरक्षा से जुड़े आरोप लगाता रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट भी पहले कह चुके हैं कि यदि चीनी एआई कंपनियां अमेरिकी तकनीक का गलत इस्तेमाल करती हैं तो उन पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
मौजूद जानकारी के अनुसार, नए नियम फिलहाल केवल उन रोबोट और पावर इन्वर्टर मॉडलों पर लागू होंगे जिन्हें अभी तक अमेरिकी बाजार में मंजूरी नहीं मिली है। हालांकि अमेरिकी संघीय संचार आयोग के पास पहले से मंजूर उत्पादों की अनुमति वापस लेने का अधिकार भी है। बताया जा रहा है कि गैर चीनी कंपनियों को इन प्रतिबंधों से छूट मिलने की संभावना है।
इस फैसले का सबसे अधिक असर चीन की रोबोट निर्माता कंपनी यूनिट्री पर पड़ सकता है। यह कंपनी मानव जैसे रोबोट बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में शामिल है। हाल ही में अमेरिकी रक्षा विभाग ने यूनिट्री को उन कंपनियों की सूची में भी शामिल किया था, जिनके चीन की सेना से जुड़े होने की आशंका जताई गई है।
इसके अलावा चीन की हुआवेई और सन्ग्रो पावर सप्लाई जैसी कंपनियां भी पावर इन्वर्टर क्षेत्र की बड़ी कंपनियां हैं। अमेरिका को आशंका है कि ऐसे उपकरणों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण ढांचे की निगरानी, आंकड़े जुटाने या साइबर हमलों के लिए किया जा सकता है। इससे पहले भी वर्ष 2023 में सामने आए वोल्ट टाइफून नामक साइबर अभियान के बाद अमेरिका ने महत्वपूर्ण ढांचों की सुरक्षा को लेकर अपनी रणनीति और सख्त कर दी थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई, रोबोट और ऊर्जा क्षेत्र भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार बनने वाले हैं। ऐसे में अमेरिका का यह कदम केवल व्यापारिक फैसला नहीं बल्कि तकनीकी नेतृत्व, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।
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