पाकिस्तान में महंगाई का बड़ा विस्फोट: पेट्रोल ₹458 और डीजल ₹520 के पार, वैश्विक युद्ध का असर

Petrol and Diesel
ANI
रेनू तिवारी । Apr 3 2026 1:06PM

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल से पाकिस्तान ने पेट्रोल तथा हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की है। पाकिस्तान सरकार ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में घोषणा की।

पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध की लपटें अब पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह झुलसा रही हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल के कारण पाकिस्तान सरकार ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की घोषणा की है। ये नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं।

पाकिस्तान सरकार ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में घोषणा की। इसके अनुसार, पेट्रोल की कीमत 137.23 रुपये प्रति लीटर (करीब 42.7 प्रतिशत) बढ़ाकर 321.17 रुपये से 458.41 रुपये प्रति लीटर कर दी। वहीं एचएसडी की कीमत 184.49 रुपये प्रति लीटर (करीब 55 प्रतिशत) बढ़ाकर 335.86 रुपये से 520.35 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। ये नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

केरोसिन तेल की कीमत भी 34.08 रुपये प्रति लीटर बढ़ाकर 457.80 रुपये कर दी गई है। सरकार ने डीजल की कीमतों में वृद्धि को सीमित रखने के लिए पेट्रोलियम शुल्क दरों में भी बदलाव किया है। पेट्रोल पर शुल्क 105 रुपये से बढ़ाकर 160 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया जबकि डीजल पर 55 रुपये प्रति लीटर के शुल्क को शून्य कर दिया गया। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने इस फैसले को ‘‘कठिन निर्णय’’ करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सब्सिडी को केवल जरूरतमंद वर्गों तक सीमित रखना, वित्तीय अनुशासन बनाए रखना और आर्थिक स्थिरता को सुरक्षित रखना है।

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प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों के सलाहकार खुर्रम शहजाद ने ‘जियो न्यूज’ के साथ साक्षात्कार में कहा कि पिछले महीने पेट्रोल की खपत में आठ प्रतिशत और डीजल की खपत में 13 प्रतिशत वृद्धि दर्ज होने के बाद सरकार ने खपत नियंत्रित करने के लिए कीमतें बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि युद्ध शुरू होने के बाद सरकार ने पहले ही 55 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की थी। बाद में तीन सप्ताह तक और बढ़ोतरी को रोका गया। सरकार अब भी मोटरसाइकिल चालकों, अंतरनगरीय परिवहन, मालवाहक वाहनों और किसानों को सब्सिडी दे रही है।

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यह निर्णय ऐसे समय लिया गया जब सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया कि 129 अरब रुपये की सब्सिडी देने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों पर और सब्सिडी देना संभव नहीं है। इससे पहले सरकार ने जनता को सस्ता ईंधन उपलब्ध कराने के लिए कई मितव्ययिता उपाय लागू किए और विकास बजट में 100 अरब रुपये की कटौती भी की थी।

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