संसद के Special Session से पहले सियासी घमासान, Women's Reservation पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने

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अंकित सिंह । Apr 3 2026 12:46PM

संसद का विशेष सत्र 16 अप्रैल से महिला आरक्षण विधेयक पर केंद्रित होगा, जिसके लिए सरकार लोकसभा सीटें बढ़ाने की योजना बना रही है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए संविधान संशोधन से पहले सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है, जिससे राजनीतिक टकराव बढ़ गया है।

संसद का बजट सत्र 16 अप्रैल को थोड़े समय के विराम के बाद पुनः शुरू होगा और सभी की निगाहें महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर टिकी हैं। सरकार लोकसभा की सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना बना रही है ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण को जल्द से जल्द लागू किया जा सके। सूत्रों के अनुसार, सत्र लगभग तीन दिनों तक चल सकता है और प्रस्तावित विधेयकों को सबसे पहले लोकसभा में पेश किए जाने की संभावना है।

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यह योजना नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ी है, जिसका उद्देश्य संसद में महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करना है। सरकार का मानना ​​है कि कानून को लागू करने का समय आ गया है और प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए वह विपक्षी दलों के संपर्क में है। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र 16, 17 और 18 अप्रैल को निर्धारित है। 16 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर कांग्रेस पार्टी के साथ चर्चा करने की इच्छा व्यक्त की। वे महिला आरक्षण विधेयक, 2023 में कुछ संशोधन करना चाहते थे। किरेन रिजिजू का यह पत्र 16 मार्च को प्राप्त हुआ। 

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि खरगे जी ने उसी दिन किरेन रिजिजू को जवाब देते हुए कहा, "मुझे आपका पत्र प्राप्त हुआ है, लेकिन कृपया सर्वदलीय बैठक बुलाएं। सभी विपक्षी दलों को एक साथ बुलाएं, और हम इस पर चर्चा करेंगे। कृपया अपना प्रस्ताव लिखित में प्रस्तुत करें। 24 मार्च को तृणमूल कांग्रेस को छोड़कर सभी विपक्षी दलों ने इस पत्र से सहमति जताई। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खर्गे और सभी नेताओं ने किरेन रिजिजू को जवाब में लिखा, "आप संविधान में संशोधन करना चाहते हैं... कृपया सर्वदलीय बैठक बुलाएं।" 24 मार्च को सभी विपक्षी दलों ने सर्वसम्मति से कहा कि 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जानी चाहिए।

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इस मुद्दे ने राज्यसभा में तीखी बहस छेड़ दी है। सदन के नेता जेपी नड्डा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि कानून कब लाया जाए, यह तय करने का अधिकार सरकार के पास है। वहीं, कई विपक्षी सदस्यों ने चुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक की मांग की। संजय सिंह जैसे नेताओं ने भी सरकार पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। कुछ सांसदों ने व्यापक चिंताएं जताईं। फौजिया खान ने सवाल उठाया कि क्या राज्यसभा और राज्य विधान परिषदों में भी इसी तरह का आरक्षण लागू होगा। मनोज झा ने पूछा कि क्या आरक्षित सीटों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की महिलाओं के लिए उप-कोटा होगा।

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