विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि घटाकर 6 फीसदी किया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  अक्टूबर 13, 2019   17:03
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विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि घटाकर 6 फीसदी किया

हालांकि, विश्वबैंक ने कहा कि वृद्धि दर धीरे-धीरे सुधर कर 2021 में 6.9 प्रतिशत और 2022 में 7.2 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है। भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल पर टिम्मर ने कहा कि हालिया वैश्विक नरमी से भारत में निवेश और खपत प्रभावित हुये हैं।

वाशिंगटन। वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सुस्ती के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है। इससे 2019 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर कम होकर 6 प्रतिशत रह जाने का अनुमान है। इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी व्यापक संभावनाओं के साथ तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी हुई है। विश्वबैंक के अर्थशास्त्री ने रविवार को यह बात कही। विश्वबैंक के मुख्य अर्थशास्त्री (दक्षिण एशिया) हंस टिम्मर ने बताया कि हालिया सुस्ती के बावजूद भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनी हुई है। उसके आर्थिक वृद्धि के आंकड़े दुनिया के अधिकांश देशों से अधिक है। भारत अभी भी व्यापक क्षमता वाली तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। " दक्षिण एशिया आर्थिक फोकस के ताजा संस्करण में विश्वबैंक ने चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर छह प्रतिशत कर दिया।

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हालांकि, विश्वबैंक ने कहा कि वृद्धि दर धीरे-धीरे सुधर कर 2021 में 6.9 प्रतिशत और 2022 में 7.2 प्रतिशत पर पहुंच जाने का अनुमान है। भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर पूछे गए सवाल पर टिम्मर ने कहा कि हालिया वैश्विक नरमी से भारत में निवेश और खपत प्रभावित हुये हैं। इसकी वजह से उसे कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। भारत की आर्थिक वृदधि दर 2016 में 8.2 प्रतिशत थी और अगले दो साल में यह 2.2 प्रतिशत गिर गई है। उन्होंने कहा कि यह सबसे बड़ी गिरावट नहीं है लेकिन यह 2012 से तुलना करने योग्य है , जहां नरमी का असर था। हालांकि , 2009 में हमने जो गिरावट देखी यह उससे कुछ कम है। 

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लेकिन , यह गंभीर सुस्ती है। यह बात सही है। " टिम्मर ने कहा यदि आप घरेलू मांग की वृद्धि को देखते हैं तो यह जीडीपी के मुकाबले अधिक तेजी से नीचे आ रही है क्योंकि इसमें आयात भी तेजी से सुस्त पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में अलग मामला है जहां कंपनियों और घरेलू दोनों स्तरों पर निवेशक निवेश को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं। टिम्मर ने कहा कि विश्वबैंक ने अनुमान में कहा है कि " भारत की 80 प्रतिशत आर्थिक नरमी " का कारण अतंरराष्ट्रीय कारक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे विचार में यह काफी कुछ उसी के अनुरूप है जो कि दुनिया में हो रहा है। इस समय दुनिया में सब जगह निवेश की रफ्तार काफी तेजी से धीमी पड़ रही है। 

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जहां तक रिण की बात है यह एक धारणा से चल रहा है जो कि पूरी दुनिया में फैली हुई और यह धारणा वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता की है।’’ वहीं , विश्वबैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2019 में भारत के मुकाबले बांग्लादेश और नेपाल की अर्थव्यवस्था के अधिक तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि , बैंक ने वैश्विक सुस्ती के कारण चालू वित्त वर्ष में दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि में गिरावट का अनुमान जताया है।

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इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान की आर्थिक वृद्धि दर और गिरकर महज 2.4 प्रतिशत रह सकती है। बैंक ने अपनी हालिया रिपोर्ट में चालू वित्त वर्ष में दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 5.9 प्रतिशत कर दिया है। यह अप्रैल 2019 के पूर्वानुमान से 1.1 प्रतिशत कम है। बांग्लादेश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 2019 में 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह 2018 में 7.9 प्रतिशत की दर से अधिक है। इसके 2020 में 7.2 प्रतिशत और 2021 में 7.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया गया है। नेपाल के मामले में, जीडीपी की वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष में औसतन 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।





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भारत में ऐपल का कारोबार अभी भी अवसरों के मुकाबले काफी कम है: टिम कुक

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 28, 2021   11:24
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भारत में ऐपल का कारोबार अभी भी अवसरों के मुकाबले काफी कम है: टिम कुक

ऐपल ने 23 सितंबर को भारत में ऐपल स्टोर की ऑनलाइन शुरुआत की थी, जिसके जरिए पहली बार देश भर के ग्राहकों को सीधे उत्पादों की पूरी श्रृंखला और सेवाओं की पेशकश की गई।

 न्यूयॉर्क। ऐपल के सीईओ टिम कुक ने कहा कि कंपनी की भारत में बाजार हिस्सेदारी उपलब्ध अवसरों के मुकाबले काफी कम है, और वहां भविष्य में खुदरा स्टोरों को खोलना एक बड़ी पहल होगी। ऐपल ने 23 सितंबर को भारत में ऐपल स्टोर की ऑनलाइन शुरुआत की थी, जिसके जरिए पहली बार देश भर के ग्राहकों को सीधे उत्पादों की पूरी श्रृंखला और सेवाओं की पेशकश की गई।

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कुक ने बुधवार को 2021 की पहली तिमाही के लिए कंपनी की आय संभावनाओं पर चर्चा के दौरान कहा, ‘‘यदि आप भारत का उदाहरण लें, तो हमारा कारोबार पिछले साल की तुलना में दोगुना हो गया है। लेकिन वहां हमारा व्यापार अभी भी उपलब्ध अवसरों की तुलना में काफी कम है। और आप दुनिया भर में ऐसे और भी बाजार पा सकते हैं।’’ भारतीय बाजार में ऐपल के प्रयासों को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में कुक ने कहा, ‘‘जैसा कि मैंने पहले बताया, ऐसे कई बाजार हैं।

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भारत उनमें से एक है, जहां हमारी हिस्सेदारी काफी कम है। एक साल पहले के मुकाबले हमने सुधार किया है। इस अवधि में हमारा कारोबार लगभग दोगुना हो गया। और हम इस बढ़ोतरी के बारे में बहुत अच्छा महसूस कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा कि ऐपल भारत में कई पहल कर रहा है। ‘‘उदाहरण के लिए, हमने वहां ऑनलाइन स्टोर खोला, और बीती तिमाही ऑनलाइन स्टोर की पहली पूर्ण तिमाही थी। इसकी एक शानदार प्रतिक्रिया मिली और इससे पिछली तिमाही के हमारे लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिली।’’ कुक ने आगे कहा विकसित बाजारों में भी वृद्धि की काफी संभावनाएं हैं।





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भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्य 5 साल कम कर 2025 किया

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 28, 2021   11:20
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भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्य 5 साल कम कर 2025 किया

मंहगे तेल आयात पर निर्भरता कम करने के इरादे से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने एफआईपीआई (फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री) पुरस्कार समारोह में कहा, ‘‘वर्ष 2014 में पेट्रोल में एक प्रतिशत से भी कम एथनॉल का मिश्रण हो रहा था जबकि लक्ष्य 5 प्रतिशत का था।

नयी दिल्ली। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने बुधवार को कहा कि भारत ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल करने की समय सीमा पांच साल कम कर 2025 कर दी गयी है। मंहगे तेल आयात पर निर्भरता कम करने के इरादे से यह कदम उठाया गया है। उन्होंने एफआईपीआई (फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री) पुरस्कार समारोह में कहा, ‘‘वर्ष 2014 में पेट्रोल में एक प्रतिशत से भी कम एथनॉल का मिश्रण हो रहा था जबकि लक्ष्य 5 प्रतिशत का था।

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पिछले चीनी वर्ष में यह अनुपात 8.5 प्रतिशत पहुंच गया है और अगले साल यह 10 प्रतिशत होगा।’’ पिछले साल सरकार ने 2022 तक पेट्रोल में 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (90 प्रतिशत पेट्रोल के साथ 10 प्रतिशत एथनॉल का मिश्रण) और 2030 तक 20 प्रतिशत का लक्ष्य रखा था। उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन अब 20 प्रतिशत का लक्ष्य 2024-25 तक हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।’’ प्रधान ने कहा कि अगर इस लक्ष्य को हासिल किया जाता है, भारत पेट्रोल में एथनॉल मिलाने वाला ब्राजील के बाद दूसरा देश होगा। लेकिन निरपेक्ष रूप से हम ब्राजील से आगे होंगे।

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भारत अपनी तेल जरूरतों को पूरा करने के लिये 83 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण से आयात में कमी की जा सकेगी। साथ ही एथनॉल कम प्रदूषण फैलाना वाला ईंधन है। अत: इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी। प्रधान ने कहा, ‘‘2025 तक 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने के लिये , 1,000 करोड़ लीटर की जरूरत होगी। माजूदा भाव पर यह 60,000 से 65,000 करोड़ रुपये का है।’’ पेट्रोल में एथनॉल का मिश्रण बढ़ाने से चीनी मिलों को आय का अतिरिक्त स्रोत प्राप्त होगा और उन्हें किसानों के बकाये के भुगतान में मदद मिलेगी।





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असमानता दूर करने में सरकारों की विफलता की कीमत चुका रही है दुनिया : ऑक्सफैम

  •  प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क
  •  जनवरी 28, 2021   11:13
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असमानता दूर करने में सरकारों की विफलता की कीमत चुका रही है दुनिया : ऑक्सफैम

कोविड-19 महामारी के दौरान असमानता में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। ऑक्सफैम इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक गैब्रिएला बुचर ने बुधवार को कहा कि सरकारों की इस मुद्दे को हल करने की विफलता की कीमत आज दुनिया को चुकानी पड़ रही है।

नयी दिल्ली/दावोस। कोविड-19 महामारी के दौरान असमानता में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। ऑक्सफैम इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक गैब्रिएला बुचर ने बुधवार को कहा कि सरकारों की इस मुद्दे को हल करने की विफलता की कीमत आज दुनिया को चुकानी पड़ रही है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के ऑनलाइन दावोस एजेंडा शिखर बैठक में ‘सुधार के दौरान सामाजिक न्याय की आपूर्ति’ पर एक सत्र में संबोधित करते हुए बुचर ने कहा, ‘‘समानता एक ताजा और सैद्धान्तिक और गंभीर रूपरेखा है और यह जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए महत्वपूर्ण है।

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हम सरकारों की असमानता को दूर करने में विफलता की कीमत चुका रहे हैं। हमने असमानता में सबसे अधिक अधिक वृद्धि देखी है।’’ बुचर ने कहा कि किनारे पर बैठकर कुछ नहीं होगा। हमें असमानता को समाप्त करना होगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से दुनियाभर के नेताओं ने प्रणालीगत असमानता को दूर करने की नई प्रतिबद्धताएं जताई हैं और साथ ही उन्होंने सामाजिक न्याय को लेकर अपने हितधारक दायित्व को दर्शाया है।

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‘‘इनमें से कई ने जलवायु न्याय में उल्लेखनीय निवेश की घोषणा की है।’’ इसी सत्र को संबोधित करते हुए लंदन के मेयर सादिक खान ने कहा कि लंदन में श्वेत और अश्वेतों पर स्वास्थ्य नतीजों और कोविड-19 के प्रभाव का अंतर इस बात का संकेत है कि हमें असमानता से निपटने को मिलकर काम करना होगा।





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