कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच यूजीसी का यह कदम सहारानीय है

university exams 2020
जे. पी. शुक्ला । Jul 17, 2020 7:14PM
यूजीसी ने बताया कि परीक्षाएं अवश्य आयोजित की जायेगी और वो भी सितम्बर के अंत तक। यूजीसी के इस संशोधित निर्णय से नाखुश छात्रों ने ट्विटर पर लिखा है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को रद्द किया जाये।

विश्वविद्यालय की परीक्षा 2020 के लिए यूजीसी के दिशानिर्देश, मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा जारी कर दिए गए हैं। संशोधित दिशानिर्देशों के अनुसार, फाइनल और टर्मिनल सेमेस्टर की परीक्षा सितम्बर माह के अंत तक आयोजित की जा सकती हैं। 

मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने जुलाई 7 को विश्वविद्यालय की 2020 की परीक्षाओं के लिए यूजीसी के दिशानिर्देशों को जारी किया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने अपने ''परीक्षा और शैक्षिक कैलेंडर'' पर अपने दिशानिर्देशों को संशोधित कर दिया है और कहा है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को रद्द नहीं किया गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या परीक्षाएं होंगी या नहीं, यूजीसी ने बताया कि परीक्षाएं अवश्य आयोजित की जायेगी और वो भी सितम्बर के अंत तक। यूजीसी के इस संशोधित निर्णय से नाखुश छात्रों ने ट्विटर पर लिखा है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को रद्द किया जाये।

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छात्रों के शैक्षिक मूल्यांकन और परीक्षा के महत्त्व को बताते हुए यूजीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालयों और संस्थानों द्वारा टर्मिनल (अंतिम वर्ष) की परीक्षाएं अवश्य आयोजित की जानी चाहिए। नए दिशानिर्देशों के अंतर्गत विश्वविद्यालय अपनी पसंद के अनुसार ऑफलाइन (कलम और कागज़), ऑनलाइन या मिश्रित मोड चुन सकते हैं।

यूजीसी की परीक्षा 2020  के नए दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं

1. अंतिम वर्ष की परीक्षाएं सभी विश्वविद्यालयों और संस्थानों द्वारा सितम्बर के अंत तक आयोजित की जानी चाहिए।

2. विश्वविद्यालय और संस्थान अपनी साध्यता और उपयुक्तता के अनुसार किसी भी मोड का- पेन और पेपर, ऑनलाइन या दोनों के मिश्रण का चयन कर सकते हैं।

3. उन विद्यार्थियों के लिए परीक्षा अनिवार्य होगी जिनका बैकलॉग होगा. ऐसे  छात्रों की ऑफ़लाइन, ऑनलाइन या मिश्रित मोड में परीक्षा आयोजित करके अनिवार्य रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

4. यदि अंतिम वर्ष के छात्र किसी भी कारण से परीक्षा में उपस्थित नहीं हो पाते हैं, तो उन्हें ऐसे पाठ्यक्रम या पेपर के लिए विशेष परीक्षाओं में उपस्थित होने का अवसर दिया जा सकता है जो विश्वविद्यालय द्वारा जब भी संभव हो सकेगा, आयोजित किये जाएंगे।

5. मध्यवर्ती सेमेस्टर के बारे में दिशानिर्देशों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। वो उसी प्रकार से रहेगा जैसा कि यूजीसी ने अपने 2020 परीक्षा दिशानिर्देशों में 29 अप्रैल 2020 को जारी किया था।

6. अगर ज़रुरत पड़ी तो, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में दाखिले और शैक्षणिक कैलेंडर से संबंधित प्रासंगिक विवरण पहले के दिशानिर्देशों में जो लिखा गया था, उसके स्थान पर अलग अलग जारी किये जायेंगे।

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यूजीसी की परीक्षा 2020 के नए दिशानिर्देशों में क्या बदलाव आया है?

नए दिशानिर्देशों की व्याख्या में यही कहा जा सकता है कि विद्यार्थी ये ध्यान में रखें कि वास्तव में कुछ भी नहीं बदला है बजाय इसके कि परीक्षाओं को सिर्फ स्थगित किया गया है। मुख्य रूप से अंतिम सेमेस्टर के विद्यार्थियों को परीक्षा आयोजित करने के महत्त्व को समझने के लिए ये बता दें कि यूजीसी ने परीक्षा आयोजित करने के अपने इरादे को स्पष्ट रूप से निर्धारित कर दिया है। हालांकि, कॉलेजों के पास अभी पर्याप्त समय है।

इसके अलावा, चूँकि समय अभी बहुत है, इसलिए जिन राज्यों ने इस सन्दर्भ में अपनी दुबिधा जताई है, वो भी परीक्षा आयोजित करने के लिए अपनी सहमति प्रदान कर सकते हैं, बस एक बार स्थिति अनुकूल हो जाये। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने यूजीसी की परीक्षा की नयी गाइडलाइन्स अपने ट्विटर हैंडल पर जारी किया है।

आपको ये बताना ज़रूरी है कि भारत के चार राज्य- पश्चिम बंगाल, ओड़िसा, महाराष्ट्र और पंजाब ने यूजीसी के नए दिशानिर्देशों पर आपत्ति जताई है और इसका अनुपालन करने में अपनी असमर्थता व्यक्त की है। जबकि मानव संसाधन विकास मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि अंतिम वर्ष की परीक्षा पर यूजीसी की नयी गाइडलाइन्स सभी राज्यों के अनुपालन के लिए बाध्यकारी होगी और उन्हें मानना पड़ेगा।

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यह पूछे जाने पर कि विश्वविद्यालय परीक्षा का आयोजन कैसे कर सकते हैं अगर उनकी बिल्डिंग्स क्वारंटाइन के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं, यूजीसी के अधिकारी ने कहा कि विश्वविद्यालयों के पास परीक्षा के आयोजन के लिए सितम्बर तक का समय है, और उन्हें यह तय करने की स्वायत्तता है कि वे कैसे इसे आयोजित करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सभी शैक्षणिक संस्थान क्वारंटाइन के लिए इस्तेमाल नहीं किये जा रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गाँधी ने इस सम्बन्ध में अपनी असहमति जताते हुए कहा कि परीक्षाएं रद्द की जानी चाहिए और विद्यार्थियों को उनकी पिछली परफॉरमेंस के आधार पर प्रमोट कर देना चाहिए।

- जे. पी. शुक्ला

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