सीनियर और युवा नेताओं के बीच संतुलन स्थापित करना नितिन नबीन के लिए होगी बड़ी चुनौती

Nitin Nabin
प्रतिरूप फोटो
ANI

हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नबीन के पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने के साथ ही पार्टी में नए और बड़े बदलाव की शुरुआत हो जाएगी। नितिन नबीन बीजेपी के न केवल सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे बल्कि वह पार्टी के पहले ऐसे राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे जिनका जन्म पार्टी की स्थापना के बाद हुआ है।

भारतीय जनता पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तारीख जारी हो गई है। पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी बनाए गए डॉ के.लक्ष्मण ने चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी है। संगठन पर्व - 2024 के तहत जारी की गई अधिसूचना के मुताबिक, पार्टी ने शुक्रवार को ही निर्वाचक मंडल सूची का प्रकाशन कर दिया है। पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के लिए नामांकन भरने की प्रक्रिया 19 जनवरी से शुरू हो जाएगी। 19 जनवरी को ही दोपहर 2 बजे से लेकर शाम 4 बजे तक नामांकन पत्र दाखिल किया जा सकता है। इसी दिन शाम को 4 से 5 बजे तक नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। शाम 5 से 6 बजे तक नाम वापस लिया जा सकता है। अगर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद के लिए एक से अधिक नेता नामांकन भरेंगे तो 20 जनवरी को चुनाव करवाया जाएगा। हालांकि यह भी एक तथ्य है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद के लिए बीजेपी में कभी भी चुनाव की नौबत नहीं आई है। इसलिए यह तय माना जा रहा है कि 20 जनवरी को सर्वसम्मति से पार्टी के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन के चुने जाने का ऐलान कर दिया जाएगा।

हाल ही में पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाए गए नितिन नबीन के पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने के साथ ही पार्टी में नए और बड़े बदलाव की शुरुआत हो जाएगी। नितिन नबीन बीजेपी के न केवल सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे बल्कि वह पार्टी के पहले ऐसे राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे जिनका जन्म पार्टी की स्थापना के बाद हुआ है। बीजेपी की स्थापना 6 अप्रैल 1980 को हुई थी जबकि नितिन नबीन का जन्म इसके 47 दिन बाद 23 मई 1980 को हुआ था। ऐसे में अब बीजेपी आलाकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह साबित करने की भी है कि युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष की ताजपोशी सिर्फ प्रतीकात्मक बदलाव का पर्याय भर बन कर न रह जाए। वहीं नई बीजेपी में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को भी संतुलन बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका दिया जाना बहुत जरूरी है।

इसे भी पढ़ें: महाराष्ट्र के शहरी मतदाताओं ने आखिरकार पुराने धुरंधरों की हवा क्यों निकाल दी?

यही वजह है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बिहार से आने वाले इन युवा नेता के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी टीम का गठन करना होगा। पार्टी संविधान के मुताबिक, पार्टी में सर्वोच्च फैसला लेने वाली इकाई पार्टी का संसदीय बोर्ड है। इसके बाद केंद्रीय चुनाव समिति का नंबर आता है जो चुनाव के समय उम्मीदवारों का चयन करता है। फिलहाल संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष जेपी नड्डा है लेकिन राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाने के बाद नितिन नबीन ही पार्टी का फैसला लेने वाले इस सर्वोच्च इकाई के अध्यक्ष होंगे। वर्तमान में नड्डा के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, अमित शाह, बी एस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के.लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, सुधा यादव और सत्यनारायण जटिया संसदीय बोर्ड के सदस्य हैं। वहीं पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष संसदीय बोर्ड के सचिव के तौर पर इसमें शामिल हैं। इनमें से बीएल संतोष को छोड़कर बाकी सभी नेता 60 से ज्यादा उम्र के हैं। संसदीय बोर्ड के ये सारे सदस्य पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति के भी सदस्य हैं। संसदीय बोर्ड में शामिल इन 11 नेताओं के अलावा भूपेन्द्र यादव, देवेंद्र फडणवीस, ओम माथुर, और वनथी श्रीनिवासन केंद्रीय चुनाव समिति में शामिल हैं। 

सरकार के नेता के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नितिन नबीन की अध्यक्षता वाले पार्टी के संसदीय बोर्ड और केंद्रीय चुनाव समिति दोनों में ही शामिल रहेंगे। वहीं सरकार और पार्टी के अहम नेता के तौर पर अमित शाह भी इन दोनों समितियों का हिस्सा रहेंगे। लेकिन युवा नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी देने के लक्ष्य और नई बीजेपी के गठन के लिए कई दिग्गज नेताओं को इससे बाहर जाना ही पड़ेगा। इन दोनों समितियों का पुनर्गठन करने के बाद पार्टी अध्यक्ष के तौर पर नितिन नबीन को अपनी राष्ट्रीय टीम - यानी राष्ट्रीय उपाध्यक्षों, राष्ट्रीय महासचिवों, राष्ट्रीय सचिवों और राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के साथ-साथ विभिन्न मोर्चों , समितियों और विभागों के मुखियाओं की भी नियुक्ति करनी पड़ेगी।

यह बात तो साफ है कि ये सारे फैसले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सहमति से ही लिए जाएंगे। हालांकि राजनाथ सिंह और वसुंधरा राजे सिंधिया जैसे नेताओं के बारे में अंतिम फैसला करने से पहले संघ से भी चर्चा की जाएगी। पार्टी की राष्ट्रीय टीम में ऐसे कई अन्य नेता भी शामिल हैं जो अपने-अपने राज्यों के मुख्यमंत्री के करीबी माने जाते हैं और इसलिए उन्हें हटाने से पहले कई समीकरणों का ध्यान भी रखना पड़ेगा। 

ऐसे में यह देखना बहुत दिलचस्प रहेगा कि नितिन नबीन इन तमाम चुनौतियों से निपटते हुए अपनी नई टीम कैसे तैयार कर पाते हैं और कैसे तमाम उम्र के नेताओं यानी सीनियर एवं युवा के बीच संतुलन बना पाने में कामयाब हो पाते हैं।

- संतोष कुमार पाठक

लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं।

All the updates here:

अन्य न्यूज़