नरेंद्र मोदी के 12 सालः भरोसे के हकीकत में बदलने का दौर

खैर यह सब होते हुए भी नरेन्द्र मोदी सरकार के सामने अभी चुनौतियां कम नहीं हैं। रोजगार सृजन, प्रति व्यक्ति आय में अंतर, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जल जीवन मिशन के बावजूद पेयजल की सहज उपलब्धता, खेती की बरसात पर निर्भरता, परिसीमन आदि ऐसे बहुत से मुद्दे हैं जिन पर ठोस काम किया जाना है।
यदि मॉनिंग कंसल्ट की माने तो दुनिया के नेताओं की सूची पर एक नजर दौड़ाई जाएं तो केई भी वैश्विक नेता स्वीकार्यता में नरेन्द्र मोदी के आसपास भी नहीं टिकते। विपक्षी पार्टियां द्वारा लगातार देश और विदेश में अभियान चलाने के बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रेंकिंग या स्वीकार्यता के मामलें में वैश्विक नेताओं से बहुत आगे हैं। 68 प्रतिशत स्वीकार्यता नरेन्द्र मोदी की है जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की स्वीकार्यता रेंक लगातार नेगेटिव जा रही है। फालोवर्स में भी नरेन्द्र मोदी सबसे आगे हैं। दुनिया का संभवतः हमारा ही देश होगा जहां देश के बाहर भारत की छवि खराब करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही उसके बावजूद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यह स्वीकार्यता निश्चित रुप से भारत ही नहीं दुनिया के अन्य देशों में भी उनकी लोकप्रियता और सर्वमान्यता को दर्शाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री पद पर रहने वाले चुनिंदा प्रधानमंत्री बन गए हैं। चुनिंदा इसलिए कि देश में पहले लोकसभा चुनाव 1952 में हुए पर पं. नेहरु 1947 से 1952 तक भी प्रधानमंत्री रहे। लगातार 12 साल कोई कम नहीं होते और वह भी लगातार 12 साल। सबसे बडी बात यह कि इस दौरान नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा ऐसे साहसिक निर्णय किये गये हैं जिनकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। माना तो यही जाता था कि कश्मीर में धारा 370 और 35 ए हटाना, राममंदिर का निर्माण, डिजिटल क्रांति, वैश्विक नेतृत्व, नोटबंदी, एक देश एक कर, घर घर शोचालय, घर घर कचरा संग्रहण, रक्षा उपकरणों का निर्यात, किसान सम्मान, मेक इन इंडिया, इंडिया फर्स्ट, बड़ी अर्थ व्यवस्था, तेजी से ढांचागत विकास, डिजिटल भुगतान, नक्सलवाद की नेस्तनाबूदी, आत्मनिर्भर भारत, परिवहन क्षेत्र में ढांचागत बदलाव आदि आदि समय समय पर की जाने वाली घोषणाएं केवल चुनाव जीतने के जुमले हैं पर लगभग असंभव माने जाने वाले यह काम आज धरातल पर उतरना सबसे बड़ी उपलब्धी मानी जा सकती है। इससे सबके साथ ही सबसे आश्चर्य जनक बात यह है कि लाख विरोध के बावजूद विपक्ष आज हाशिये में चला गया है।
कश्मीर से धारा 370 और 35 ए की समाप्ति हो चुकी है। दुनिया के किसी देश ने खुलकर इसका विरोध करने की हिम्मत नहीं दिखाई। बाबरी मस्जिद के स्थान पर राममंदिर का निर्माण हो चुका है तो तीन तलाक, सीएए, यूसीसी और यहां तक कि सर्जीकल स्ट्राइक के बाद ऑपरेशन सिन्दुर तक पर दुनिया के किसी देश की भारत के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने की हिम्मत नहीं हो पाई है। आज अर्थ व्यवस्था में जिस तेजी से बदलाव आया है और चौथी बड़ी अर्थ व्यवस्था बनने के बाद अब तीसरी बड़ी अर्थ व्यवस्था बनने की और तेजी से कदम बढ़ चुके हैं। जनधन योजना के समय जिस तरह से आलोचना का दौर चला था आज भुगतान में डिजिटलीकरण में इसकी बड़ी भूमिका तय हो चुकी है। जो लगभग असंभव माना जा सकता था वह आज डिजिटल भुगतान के माध्यम से संभव हो पाया है और पांच रु. के टमाटर का भुगतान भी सब्जीवाले तक को यूपीआई से आसानी से होने लगा है। सरकारी सामाजिक सुरक्षा योजना के भुगतान, पेंशन, अनुदान आदि आज सीधे खातों में जाने लगे हैं। यह किसी दिवा स्वप्न से कम नहीं है। आईपीसी सीपीसी में बदलाव किया जा चुका है। तो जीएसटी में लाख कमियां गिनाने के बावजूद आज समूचा देश एक देश एक कर के छाते के नीचे आ चुका है। बुनियादी ढांचें में तेजी से बदलाव आया है। आज वंदे भारत और नमो भारत ट्रेन चलने लगी है तो 33 किमी प्रतिदिन हाईवे का निर्माण हो रहा है। एक्सप्रेस हाईवे से आवागमन आसान हुआ है। आयुष्मान योजना से 50 करोड़ लोगों को जोड़ा जा चुका है तो सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता का नेटवर्क विस्तारित किया गया है। आज 98 प्रतिशत घरों से घर घर कचरा संग्रहण होने लगा है तो अब घर घर में शोचालय बन चुके हैं। कोरोना के दौरान हमारे प्रयासों को सारी दुनिया द्वारा सराहा गया यहां तक कि कोरोना के दौरान जीवन रक्षक की भूमिका में भारत ने भूमिका निभाई। किसानों की आय में बढ़ोतरी के ठोस प्रयास हुए हैं तो किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों को उनका आत्मसम्मान उपलब्ध कराया गया है। एमएसपी व्यवस्था में सुधार हुए हैं तो खेती किसानी के क्षेत्र में बदलाव छाप दिखाई दे रहा है। मेक इन इंडिया और इंडिया फर्स्ट भी आज साकार होता दिखाई दे रहा है। आज हम रक्षा उपकरणों का निर्यात करने लगे हैं तो सहस्त्रबलों के आधुनिकीकरण और निर्णय की स्वतंत्रता का परिणाम है कि आज सेनाएं आत्मगौरव के साथ आगे बढ़ रही है। आज देश आत्म निर्भर भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
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जहां तक कूटनीतिक स्तर पर सफलता की बात है तो भारत आज पिछलग्गू देशों में नहीं बल्कि दुनिया का नेतृत्व करने की स्थिति में आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लाख प्रयासों के बावजूद भारत के खिलाफ कुछ खास कर नहीं पा रहे हैं। पाकिस्तान के पक्ष में आज तुरकिया जैसे एकाध को छोड़कर कोई देश बोलने की स्थिति में नहीं है। मालदीव को नरेन्द्र मोदी के एक फोटो ट्वीट ने सबक सीखा दिया तो दूसरे देश भी भारत की ताकत को समझने लगे हैं।
खैर यह सब होते हुए भी नरेन्द्र मोदी सरकार के सामने अभी चुनौतियां कम नहीं हैं। रोजगार सृजन, प्रति व्यक्ति आय में अंतर, शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, जल जीवन मिशन के बावजूद पेयजल की सहज उपलब्धता, खेती की बरसात पर निर्भरता, परिसीमन आदि ऐसे बहुत से मुद्दे हैं जिन पर ठोस काम किया जाना है। देश में जिस तरह से पेपर लीक होने के मामले सामने आये हैं इससे युवाओं में निराशा हुई है उसे दूर करने की चुनौती सामने हैं तो स्टार्ट अप और कौशल विकास के बावजूद बेरोजगारी की दर अभी भी चिंतनीय स्तर पर है। साइबर क्राइम और गेमिंग जैसी नई चुनौतियां तो सोशल मीडिया के दुरुपयोग और अत्यधिक उपयोग के साइड इफेक्ट आदि अनेक समस्याएं समाधान चाहती है। देश आज तेजी से एक देष एक चुनाव के धरातल पर उतरने का इंतजार कर रहा है। रिन्यूवल एनर्जी पर बहुत कुछ हासिल करने के बावजूद अमेरिका ईरान युद्ध के कारण जिस तरह से तेल और एलपीजी का संकट आया है इसका भी दीर्घकालीन समाधान खोजा जाना है। हांलाकि समस्याएं अनवरत और नियमित प्रक्रिया है पर दीर्घकालीन योजनाओं से आसानी से निपटा जा सकता है।
इस सबके बावजूद देशवासियों को नरेन्द्र मोदी के प्रति पूरा भरोसा है। यही कारण है कि विपक्ष की लाख आलोचनाओं के बावजूद नरेन्द्र मोदी की स्वीकार्यता और भरोसे व उनके आत्मविश्वास में किसी तरह की कमी नहीं आई है। सौ टके की बात कही जाएं तो नरेन्द्र मोदी की अपार उपलब्धियों के बावजूद चुनौतियां भी अपार है और सबसे अच्छी बात यह कि देशवासियों का उनपर भरोसा भी पूरा है और वैश्विक स्वीकार्यता भी सबसे अधिक है।
- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा
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